सुरेश सिंह बैस
बिलासपुर। अचानकमार टाइगर रिजर्व (एटीआर) क्षेत्र के गांवों में वर्षों से लंबित विस्थापन प्रक्रिया अब तेजी पकड़ चुकी है। 171 परिवारों के पुनर्वास के लिए जमीन चिन्हांकन से लेकर आवास निर्माण तक के कार्य युद्धस्तर पर चल रहे हैं। प्रशासन का लक्ष्य है कि इस वर्ष ये परिवार अपने नए घरों में दीपावली का त्योहार मनाएं। पीसीसीएफ के निर्देश के बाद अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर कार्यों की समीक्षा की और निर्माण एजेंसियों को तय समय-सीमा में काम पूरा करने के निर्देश दिए। पहले चरण में गांव बिरारपानी, चीरहट्टा ,तिलई डबरा के 93 परिवारों को स्थानांतरित किया जा रहा है, जहां बुनियादी सुविधाओं के साथ आवास निर्माण तेजी से जारी है।
255 हेक्टेयर में बसेंगे नए गांव
मुंगेली वन मंडल क्षेत्र में लगभग 255.300 हेक्टेयर भूमि पर पुनर्वास स्थल विकसित किया जा रहा है। यहां सड़क, पानी, बिजली और अन्य मूलभूत सुविधाओं के साथ व्यवस्थित बसाहट तैयार की जा रही है। प्रत्येक परिवार को 15 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जा रही है, जिससे वे अपने घर और आजीविका को नए सिरे से स्थापित कर सकें।
बिरारपानी छिरहट्टा तिलईडबरा तीन गांवों का हो रहा विस्थापन
एटीआर के तीन गांवों के ग्रामीणों को सुरक्षित और बेहतर जीवन के उद्देश्य से स्थानांतरित किया जा रहा है। वर्षों से चली आ रही इस प्रक्रिया में अब ठोस प्रगति दिख रही है। पहले जहां योजनाएं कागजों में सीमित थीं, अब जमीन पर निर्माण कार्य स्पष्ट नजर आ रहा है।
ग्रामीणों की पहली पसंद :पक्का आवास
विस्थापित परिवारों के लिए पक्के मकानों का निर्माण प्राथमिकता में है। ग्रामीणों ने भी बेहतर सुविधाओं वाले नए घरों में बसने की इच्छा जताई है। प्रशासन का कहना है कि पुनर्वास केवल स्थान परिवर्तन नहीं, बल्कि बेहतर जीवन स्तर सुनिश्चित करने की पहल है।
तेजी से काम पूरा करने के निर्देश
अधिकारियों ने निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश देते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लक्ष्य है कि दीपावली से पहले सभी परिवारों को नया आशियाना मिल जाए, ताकि वे अपने नए जीवन की शुरुआत उत्साह और सम्मान के साथ कर सकें।




