सुरेश सिंह बैस
बिलासपुर। शहर के अशोकनगर चौक से बिरकोना (वार्ड क्रमांक 64) को जोड़ने वाली मुख्य सड़क पिछले तीन वर्षों से बदहाली के आंसू बहा रही है। धूल के गुबार, गहरे गड्ढे और बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों ने स्थानीय निवासियों और राहगीरों का जीना मुहाल कर दिया है। स्थिति इतनी गंभीर है कि अब कांग्रेस ने इस मुद्दे पर बड़े जन-आंदोलन की चेतावनी दी है।
प्रमुख समस्याएँ एक नज़र में
सड़क की जर्जर हालत: पिछले 3 सालों से मरम्मत न होने के कारण सड़क पूरी तरह उखड़ चुकी है।
अंधेरे का साम्राज्य: स्ट्रीट लाइट बंद होने से रात के समय यह मार्ग ‘डेथ ट्रैप’ बन गया है, जहाँ आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं।
घटिया नाली निर्माण: हाल ही में बनी नालियों में कुछ ही दिनों में दरारें पड़ गई हैं, जो निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती हैं। प्रदूषण की मार : उड़ती धूल के कारण स्थानीय लोगों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है और व्यापार भी प्रभावित हो रहा है।
शिक्षा और आवास का केंद्र, फिर भी उपेक्षा
हैरानी की बात यह है कि इसी मार्ग पर सेंट्रल यूनिवर्सिटी, पंडित सुंदरलाल शर्मा विश्वविद्यालय, पत्रकार कॉलोनी सहित 10 से अधिक प्रमुख आवासीय कॉलोनियां स्थित हैं। हजारों छात्रों और नागरिकों की आवाजाही के बावजूद प्रशासन की चुप्पी ने लोगों के सब्र का बांध तोड़ दिया है।
राजनीतिक सरगर्मी और चेतावनी
कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने सीधे तौर पर प्रशासन और ठेकेदारों की मिलीभगत का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा:
“नाली निर्माण पूरी तरह गुणवत्ता विहीन है। अगर जल्द ही सड़क और नाली की स्थिति नहीं सुधारी गई और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो कांग्रेस चक्काजाम और उग्र आंदोलन करेगी।”
प्रशासन का पक्ष
शिकायतों के बढ़ते दबाव के बीच महापौर रामशरण यादव (या संबंधित अधिकारी/विधानी) ने आश्वासन दिया है कि सड़क और नाली निर्माण की गुणवत्ता की जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि शिकायतों के आधार पर आवश्यक सुधार कार्य जल्द शुरू किए जाएंगे।
स्थानीय निवासियों का अभिमत
स्थानीय निवासी रामप्रसाद साहू और प्रकाश कश्यप का कहना है कि वे कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला। सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहा है या इस बार वाकई धरातल पर काम होगा?






