दुर्ग 19 मई (आरएनएस) जिस महिला को बुजुर्ग दंपत्ति की देखभाल और भरोसे की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, उसी ने उनके संयुक्त बैंक खाते में सेंध लगाकर हजारों रुपये निकाल लिए, लेकिन नेवई पुलिस की त्वरित जांच और तकनीकी पड़ताल ने आरोपी महिला को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। दुर्ग जिले के रिसाली सेक्टर इलाके में सामने आए इस चौंकाने वाले मामले ने बुजुर्गों की वित्तीय सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। मामला तब खुला जब पीड़ित परिवार ने 17 मई 2026 को थाना नेवई पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई कि उनके वृद्ध माता-पिता के संयुक्त बैंक खाते की देखरेख करने वाली केयर टेकर स्मिता बरगटे उम्र 44 वर्ष निवासी रिसाली सेक्टर थाना नेवई जिला दुर्ग ने विश्वास में लेकर बिना अनुमति खाते से 40 हजार 85 रुपये निकाल लिए। शिकायत में यह भी सामने आया कि आरोपी महिला द्वारा अन्य वित्तीय लेनदेन और रकम निकासी की जानकारी भी मिली है, जिसके बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अपराध क्रमांक 312/2026 धारा 316(2) बीएनएस के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू की। नेवई पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, बैंक ट्रांजेक्शन और दस्तावेजी रिकॉर्ड खंगाले तो शक सीधे केयर टेकर पर जाकर टिक गया। पुलिस टीम ने आरोपी के ठिकाने पर दबिश देकर पूछताछ की, जहां स्मिता बरगटे ने बुजुर्ग दंपत्ति के खाते से रकम निकालने की बात कबूल कर ली। पुलिस ने 18 मई 2026 को विधिसम्मत कार्रवाई करते हुए आरोपी महिला को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर केंद्रीय जेल दुर्ग भेज दिया गया। मामले में बैंक ट्रांजेक्शन और संबंधित दस्तावेजी साक्ष्य जब्त किए गए हैं। इस कार्रवाई में निरीक्षक अनिल साहू, सउनि निगम प्रसाद पात्रे, प्रधान आरक्षक नंदलाल सिंह, आरक्षक रवि बिसाई, प्यावरे लाल साहू, देवप्रकाश वर्मा और महिला आरक्षक कीर्ति साहू की अहम भूमिका रही। दुर्ग पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि बुजुर्ग परिजनों के बैंक खाते, एटीएम, मोबाइल बैंकिंग और वित्तीय जानकारी किसी के साथ साझा करते समय बेहद सतर्क रहें, क्योंकि कई बार सबसे बड़ा खतरा बाहर से नहीं बल्कि भरोसे के दायरे के भीतर से निकलता है।





