बतौली 4 जून 2026/ राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत विकासखंड मैनपाट के ग्राम पंचायत नर्मदापुर में संचालित स्व-सहायता समूहों की वित्तीय गतिविधियों में कथित अनियमितताओं एवं राशि गबन के आरोपों को लेकर जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। इस संबंध में कलेक्टर सरगुजा को शिकायत पत्र सौंपकर दोषियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया गया है।शिकायत में आरोप लगाया गया है कि ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत कार्यरत पीआरपी (Participatory Resource Person) ईल्का खेस तथा अन्य संबंधित व्यक्तियों द्वारा ग्राम संगठन, संकुल संगठन एवं स्व-सहायता समूहों की अशिक्षित और गरीब महिलाओं को गुमराह कर विभिन्न ऋण योजनाओं एवं बैंक लिंकेज के माध्यम से प्राप्त राशि में अनियमितताएं की गई हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि महिलाओं को योजनाओं की वास्तविक जानकारी दिए बिना उनके नाम पर ऋण स्वीकृत कर राशि के उपयोग में पारदर्शिता नहीं बरती गई। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि बिहान योजना के प्रावधानों के अनुसार पीआरपी की नियुक्ति संबंधित क्षेत्र या पंचायत से बाहर की होनी चाहिए, जबकि संबंधित पीआरपी स्थानीय क्षेत्र की निवासी बताई जा रही हैं। इससे हितों के टकराव और प्रभाव के दुरुपयोग की आशंका व्यक्त की गई है। शिकायत के अनुसार निम्नलिखित समूहों की राशि में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की गई है— अमिला स्व-सहायता समूह, दांतीडबरा गांव – बैंक लिंकेज ऋण राशि ₹3,00,000
महामाया स्व-सहायता समूह, रंगुआपारा गांव – बैंक लिंकेज ऋण राशि ₹80,000 सूरजमुखी स्व-सहायता समूह, विहीपारा – एमसीपी राशि ₹60,000 संपदा स्व-सहायता समूह – लगभग ₹60,050 की राशि में अनियमितता का आरोप।शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि ग्राम संगठन, एमसीपी (माइक्रो क्रेडिट प्लान) तथा बैंक से प्राप्त सीसीएल (कैश क्रेडिट लिमिट) ऋण की राशि के उपयोग में गंभीर वित्तीय गड़बड़ियां हुई हैं। साथ ही संबंधित बैंक अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है। ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के उद्देश्य से संचालित बिहान योजना की पारदर्शिता एवं विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए शिकायतकर्ताओं ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते मामले की जांच नहीं हुई तो इससे गरीब एवं जरूरतमंद महिलाओं का योजना पर से विश्वास कमजोर हो सकता है।






