नई दिल्ली 19 अगस्त 2026/ देशभर के न्यायिक अधिकारियों (Judicial Officers) की सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष किए जाने का मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में चर्चा का विषय बना हुआ है। फिलहाल अदालत ने कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है, लेकिन सभी राज्य सरकारों और हाई कोर्ट से इस मुद्दे पर दोबारा विचार कर अपनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने 22 जुलाई 2026 को अंतरिम व्यवस्था देते हुए कहा था कि यदि कोई राज्य सरकार संबंधित हाई कोर्ट से परामर्श के बाद न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने का निर्णय लेती है, तो संबंधित अधिकारी बढ़ी हुई आयु तक सेवा में बने रहेंगे। हालांकि अधिकांश राज्यों ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि इससे न्यायिक अधिकारियों और अन्य सरकारी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु अलग हो जाएगी तथा राज्य के खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने All India Judges Association बनाम Union of India के पुराने फैसले का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि न्यायपालिका को सामान्य सरकारी कर्मचारियों के समान नहीं माना जा सकता। न्यायिक अधिकारी केवल सरकारी कर्मचारी नहीं, बल्कि संविधान के तहत न्यायिक शक्तियों का प्रयोग करने वाले सार्वजनिक पदाधिकारी हैं। अदालत ने यह भी कहा कि अनुभवी न्यायिक अधिकारी दो वर्ष अतिरिक्त सेवा देंगे तो उनकी पेंशन बाद में शुरू होगी, नए अधिकारियों की तत्काल भर्ती और प्रशिक्षण का खर्च बचेगा तथा न्यायिक कार्यों के निपटारे में भी लाभ मिलेगा।
फिलहाल पूरे देश में न्यायिक अधिकारियों की रिटायरमेंट आयु 62 वर्ष नहीं हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने केवल राज्य सरकारों और हाई कोर्ट से इस विषय पर पुनर्विचार करने को कहा है। सभी राज्यों और हाई कोर्ट को 31 अगस्त 2026 दोपहर 2 बजे तक अपनी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 1 सितंबर 2026 को होगी, जहां इस मुद्दे पर आगे की दिशा तय की जाएगी।
05.08.2026 ORDER 1 / Click here





