रायपुर, 2 अक्टूबर गांधी जयंती के अवसर पर पनिका/पनका समाज के नेता सुमित दास ने समाज को एकता, अपनी सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा और संवैधानिक अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा और एकता के सिद्धांत आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक हैं।
सुमित दास ने कहा कि कबीरपंथ की परंपरा में ‘सत्यनाम’ का विशेष महत्व है और महात्मा गांधी ने भी सत्य को सर्वोच्च स्थान दिया। उन्होंने कहा कि गांधी जी का अंत्योदय का विचार समाज के अंतिम व्यक्ति के विकास से जुड़ा था। पनिका समाज द्वारा लंबे समय से अपने अधिकारों की मांग को उन्होंने इसी भावना से जोड़ते हुए कहा कि समाज किसी संघर्ष या टकराव का रास्ता नहीं, बल्कि संवैधानिक और शांतिपूर्ण मार्ग अपनाकर अपनी मांग रख रहा है।
उन्होंने गांधी जयंती पर समाज के सामने तीन संकल्प—एकता, अस्मिता और अधिकार रखने का आह्वान किया।
1. एकता – चाहे कबीरपंथी हों या साकत, हम सब एक हैं।
2. अस्मिता -अपनी संस्कृति और पहचान को बचाए रखेंगे।
3. अधिकार – अपना ST का हक गांधी जी के बताए हुए शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक रास्ते से लेकर रहेंगे।
उन्होंने कहा कि कबीरपंथी हों या साकत, सभी पनिका समाज के लोग एकजुट होकर अपनी संस्कृति, पहचान और सामाजिक विरासत की रक्षा करें।
सुमित दास ने कहा कि समाज अपने संवैधानिक अधिकारों की मांग को लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाएगा। उन्होंने कहा कि गांधी जी को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी, जब समाज सत्य, अहिंसा और एकता के मार्ग पर आगे बढ़ते हुए अपने अधिकारों के लिए संगठित रहे। अंत में उन्होंने “हमारी पहचान, हमारा हक—पनिका समाज एकजुट”का संदेश देते हुए जय हिंद और जय छत्तीसगढ़ का उद्घोष किया।




