बिलासपुर 18 मई 2026/ वर्ष 2026 का ज्येष्ठ मास प्रकृति और आध्यात्मिकता का एक बेहद दुर्लभ संयोग लेकर आ रहा है। इस वर्ष ज्येष्ठ के महीने में ‘अधिक मास’ (मलमास) जुड़ने जा रहा है, जिसके कारण यह महीना सामान्य के बजाय लगभग 60 दिनों का होगा। पौराणिक भाषा में इस विशेष अवधि को ‘महा-ज्येष्ठ’ या ‘पुरुषोत्तम मास’ कहा जाता है। श्री पीताम्बरा पीठ के पीठाधीश्वर आचार्य डॉ. दिनेश महाराज ने इस दुर्लभ संयोग के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि ब्रह्मांडीय गति के अनुसार सौर वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच प्रति वर्ष 11 दिनों का अंतर आता है। इसी अंतर को पाटने के लिए सनातन कैलेंडर में हर 32 माह के बाद एक ‘अधिक मास’ की व्यवस्था की गई है। प्राचीन काल में इसे ‘मलमास’ कहकर उपेक्षित किया गया था, लेकिन बाद में भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम ‘पुरुषोत्तम’ देकर जगत का सबसे पवित्र महीना बना दिया। वर्ष 2026 में यह दिव्य संयोग 17 मई से 15 जून के बीच बन रहा है, जहाँ ज्येष्ठ की तपती गर्मी भक्तों के लिए अक्षय पुण्य कमाने का मार्ग प्रशस्त करेगी।
यह पूरा ‘महा-ज्येष्ठ’ काल 2 मई से शुरू होकर 29 जून तक चलेगा। इस भीषण गर्मी में जल और छाया का दान करना ही सबसे बड़ा धर्म माना गया है। चूंकि इस माह के मुख्य देवता वरुण (जल देव) और सूर्य देव हैं, इसलिए राहगीरों के लिए प्याऊ लगवाना और पशु-पक्षियों के लिए जल की व्यवस्था करना अनंत फलदायी माना गया है।
आध्यात्मिक दृष्टिकोण से इस दौरान भगवान विष्णु के ‘त्रिविक्रम’ स्वरूप की पूजा की जानी चाहिए। इस कठिन तपिश में विष्णु सहस्रनाम का पाठ और सात्विक दिनचर्या का पालन करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है। हालांकि, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मलमास की इस अवधि के दौरान विवाह, मुंडन और गृह प्रवेश जैसे सभी मांगलिक कार्य पूरी तरह से वर्जित रहेंगे, क्योंकि यह समय केवल आत्म-चिंतन, जप और आध्यात्मिक साधना के लिए आरक्षित माना गया है।
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