अयोध्या में सजा दिव्य दरबार, पूर्णिमा पर अलौकिक श्रृंगार में निहारे गए रामलला सरकार
अयोध्या धाम में रविवार को ऐसा दिव्य दृश्य सजा कि श्रद्धालु रामलला सरकार के अलौकिक स्वरूप के दर्शन कर भाव-विभोर हो उठे, ज्येष्ठ पूर्णिमा के शुभ अवसर पर ब्रह्मांड नायक प्रभु श्रीराम का भव्य श्रृंगार हुआ और भक्तों ने श्रद्धा, भक्ति और आस्था के अद्भुत संगम का अनुभव किया। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र अयोध्या धाम में 31 मई को ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तिथि और विक्रम संवत 2082 के शुभ संयोग पर विराजमान रामलला सरकार का विशेष श्रृंगार किया गया। प्रतिदिन की तरह प्रभु के पूजन की शुरुआत सुबह उन्हें जगाने के साथ हुई, इसके बाद लेप, स्नान और दिव्य वस्त्र धारण कराने की परंपरा निभाई गई। मौसम के अनुरूप रामलला को हल्के और सूती वस्त्र पहनाए गए, जबकि उनके श्रृंगार को आकर्षक बनाने के लिए विशेष फूलों की मालाएं भी अर्पित की गईं। मंदिर परंपरा के अनुसार पहली आरती सुबह 6:30 बजे संपन्न हुई, जिसके बाद भक्तों ने प्रभु के दर्शन किए। दोपहर 12 बजे भोग आरती और शाम 7:30 बजे संध्या आरती का आयोजन हुआ। रामलला को प्रतिदिन चार समय भोग अर्पित किया जाता है, जिनमें समय और परंपरा के अनुसार अलग-अलग व्यंजन शामिल होते हैं। ये सभी प्रसाद राम मंदिर की रसोई में तैयार किए जाते हैं। सुबह की शुरुआत बाल भोग से होती है, जो विशेष महत्व रखता है। दिनभर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ प्रभु के दर्शन के लिए उमड़ती रही और मंदिर परिसर जय श्रीराम के उद्घोष से गूंजता रहा। दर्शन की व्यवस्था निर्धारित समय तक जारी रही और रात्रि 8:30 बजे शयन आरती के साथ भगवान को विश्राम कराया गया। आस्था के इस भव्य केंद्र में हर दिन रामलला का नया स्वरूप भक्तों को दिव्यता का एहसास कराता है और यही अयोध्या की आध्यात्मिक पहचान को और अधिक गौरवशाली बनाता है।





