रायपुर 24 अप्रैल 2026/ नौकरी का सपना दिखाकर एक ऐसा फर्जीवाड़ा सामने आया है जिसने सिस्टम की विश्वसनीयता पर ही सवाल खड़ा कर दिया है, सामान्य प्रशासन विभाग के नाम से जारी एक कथित नियुक्ति आदेश ने सैकड़ों युवाओं को भ्रम में डाल दिया जिसमें परिवहन, राजस्व-आपदा प्रबंधन, वन-जलवायु परिवर्तन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास और स्कूल शिक्षा जैसे पांच बड़े विभागों में भर्ती की सिफारिश दिखाई गई, पहली नजर में यह आदेश पूरी तरह असली जैसा लगा क्योंकि इसमें विभागीय सचिव रजत कुमार और उप सचिव शिव कुमार सिंह के डिजिटल सिग्नेचर तक लगाए गए थे, लेकिन जब जांच हुई तो पूरा दस्तावेज फर्जी निकला और खुलासा हुआ कि यह आदेश 5 मार्च 2026 की तारीख में तैयार कर सुनियोजित तरीके से डाक के जरिए अभ्यर्थियों तक पहुंचाया गया ताकि भरोसा और भ्रम दोनों पैदा हो सके, इस फर्जी आदेश में चरित्र सत्यापन और प्रशिक्षण के बाद नियुक्ति की बात भी लिखी गई थी जो सीधे तौर पर युवाओं को जाल में फंसाने की कोशिश थी, मामले की भनक लगते ही अनुभाग अधिकारी राजपाल बघेल ने राखी थाना में शिकायत दर्ज कराई जिसके बाद पुलिस ने तत्काल एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी, शुरुआती जांच में शक गहराया है कि इस पूरे खेल में किसी अंदरूनी व्यक्ति की भूमिका हो सकती है क्योंकि दस्तावेज में इस्तेमाल की गई जानकारी बेहद सटीक और सिस्टम से जुड़ी हुई है, पुलिस अब तकनीकी साक्ष्यों को खंगाल रही है, डिजिटल सिग्नेचर के दुरुपयोग की परतें खोल रही है और संदिग्धों से पूछताछ कर रही है, दावा किया जा रहा है कि जल्द ही इस रैकेट का खुलासा कर आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा, फिलहाल यह मामला सिर्फ एक फर्जी आदेश का नहीं बल्कि उन उम्मीदों का है जो नौकरी के नाम पर युवाओं के दिलों में बोई जाती हैं और ऐसे फर्जीवाड़े उन्हें तोड़ देते हैं, बहरहाल यह घटना एक कड़ा संदेश है—नौकरी के नाम पर मिलने वाले हर ऑफर को आंख मूंदकर भरोसा करने से पहले परखना जरूरी है, वरना ठगी का यह जाल किसी को भी अपनी चपेट में ले सकता है।



