Close Menu
The Bharat TimesThe Bharat Times
  • होम
  • देश दुनिया
  • छत्तीसगढ़
    • कोरबा
    • अंबिकापुर
    • कोंडागाँव
    • जांजगीर चांपा
    • दुर्ग
    • जगदलपुर
    • धमतरी
    • दंतेवाड़ा
    • बलौदाबाजार
    • भटगांव
    • महासमुंद
    • रायगढ़
    • राजनांदगांव
    • रायपुर
    • देश दुनिया
    • सारंगढ़ बिलाईगढ़
  • मध्य प्रदेश
    • डिंडोरी
      • समनापुर
      • सरसीवा
      • सलिहा
  • राजनीति
  • मेरा शहर

Subscribe to Updates

Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

What's Hot

बिलासपुर से गूंजा ST आरक्षण का शंखनाद, राष्ट्रीय बैठक में एकजुट हुआ पनिका समाज

07/09/2026 - 11:35 PM

जन्माष्टमी पर छत्तीसगढ़ी सिनेमा का बड़ा तोहफा: ‘मोर मयारू, तोर मयारू’ ने पहले ही दिन जीता दर्शकों का दिल

04/09/2026 - 11:47 PM

सुसाइड नोट और वीडियो बने सबूत, बहू समेत तीन आरोपी जेल भेजे गए

04/09/2026 - 8:48 AM
Facebook X (Twitter) Instagram
Tuesday, September 8
Facebook X (Twitter) Instagram
The Bharat TimesThe Bharat Times
Demo
  • होम
  • देश दुनिया
  • छत्तीसगढ़
    • कोरबा
    • अंबिकापुर
    • कोंडागाँव
    • जांजगीर चांपा
    • दुर्ग
    • जगदलपुर
    • धमतरी
    • दंतेवाड़ा
    • बलौदाबाजार
    • भटगांव
    • महासमुंद
    • रायगढ़
    • राजनांदगांव
    • रायपुर
    • देश दुनिया
    • सारंगढ़ बिलाईगढ़
  • मध्य प्रदेश
    • डिंडोरी
      • समनापुर
      • सरसीवा
      • सलिहा
  • राजनीति
  • मेरा शहर
  • होम
  • देश दुनिया
  • छत्तीसगढ़
  • मध्य प्रदेश
  • राजनीति
  • मेरा शहर
The Bharat TimesThe Bharat Times
Home»छत्तीसगढ़»क्या हर शिक्षक हर विषय पढ़ा सकता है – और इसकी कीमत कौन चुका रहा है?
छत्तीसगढ़ बिलासपुर

क्या हर शिक्षक हर विषय पढ़ा सकता है – और इसकी कीमत कौन चुका रहा है?

HD MAHANTBy HD MAHANT22/06/2026 - 3:31 PM
Facebook Twitter WhatsApp Copy Link
Share
Facebook Twitter WhatsApp Copy Link

डॉ. भूपेन्द्र धर दीवान बिलासपुर छत्तीसगढ़ 22 जून 2026/ 
शिक्षा-विश्लेषक, मनोशैक्षिक परामर्शदाता, बहु-बुद्धिमत्ता एवं अधिगम अध्ययन विशेषज्ञ

1. जब शिक्षा व्यवस्था चलती दिखे, पर सीखना ठहरने लगे :

कल्पना कीजिए एक ऐसे विद्यालय की, जहाँ गणित का शिक्षक इतिहास पढ़ा रहा है, विज्ञान का शिक्षक भाषा पढ़ा रहा है और सामाजिक विज्ञान का शिक्षक भौतिकी समझाने का प्रयास कर रहा है। विद्यालय चल रहा है, कक्षाएँ लग रही हैं, उपस्थिति दर्ज हो रही है और पाठ्यक्रम आगे बढ़ रहा है। पहली दृष्टि में सब कुछ सामान्य दिखाई देता है।

लेकिन इसी सामान्यता के भीतर एक गंभीर प्रश्न छिपा है – क्या वास्तव में शिक्षा दी जा रही है, या केवल व्यवस्था को किसी तरह बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है?

यदि हम आज भी बच्चों को वैसे ही पढ़ाते हैं जैसे कल पढ़ाते थे, तो हम उनका भविष्य छीन रहे हैं।

शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम समाप्त करना नहीं है। शिक्षा का उद्देश्य समझ पैदा करना, जिज्ञासा को जीवित रखना, प्रश्न करने की क्षमता विकसित करना और स्वतंत्र चिंतन की बौद्धिक नींव तैयार करना है।

जब कक्षा में विषय की गहराई कम होने लगती है, तब सबसे पहले भविष्य की ऊँचाई कम होने लगती है।

2. शिक्षक का मूल्य केवल उपस्थिति नहीं, विशेषज्ञता है :

शिक्षक केवल अध्यापन करने वाला व्यक्ति नहीं होता; वह अपने विषय का प्रशिक्षित विशेषज्ञ होता है। वर्षों की तैयारी, गहन अध्ययन, प्रशिक्षण और अनुभव के बाद वह एक विशिष्ट ज्ञान क्षेत्र में दक्षता अर्जित करता है।

गणित शिक्षक तार्किक संरचनाओं और विश्लेषणात्मक समस्या समाधान में विशेषज्ञ होता है। विज्ञान शिक्षक प्रयोगधर्मिता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने में दक्ष होता है। भाषा शिक्षक अभिव्यक्ति, साहित्य, विचार और संप्रेषण की सूक्ष्मताओं को समझता है।

ज्ञान केवल जानकारी नहीं, बल्कि उसे समझने और सही संदर्भ में प्रयोग करने की क्षमता है।

See also  बारात में हुई कहा सुनी होने पर घर में घुसकर हथियारों सहित मार पीट कर घायल किया

जब शिक्षक को उसकी विषय विशेषज्ञता से बाहर जाकर अन्य विषय पढ़ाने पड़ते हैं, तब शिक्षण धीरे-धीरे अपनी गहराई खोने लगता है।

हर शिक्षक पढ़ा सकता है, लेकिन हर शिक्षक हर विषय समान गुणवत्ता से नहीं पढ़ा सकता।

3. व्यवस्था बच सकती है, लेकिन शिक्षा कमजोर हो सकती है :

भारत सहित अनेक शिक्षा व्यवस्थाओं में शिक्षकों की कमी, असंतुलित पदस्थापना और प्रशासनिक दबाव के कारण एक शिक्षक को कई विषय पढ़ाने पड़ते हैं। इसे अक्सर व्यवस्था संचालन की मजबूरी कहकर स्वीकार कर लिया जाता है।

लेकिन मूल प्रश्न यह है – क्या प्रशासनिक सुविधा को बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता से ऊपर रखा जा सकता है?

विद्यालय चलाना आवश्यक है, किंतु उससे कहीं अधिक आवश्यक यह सुनिश्चित करना है कि बच्चा वास्तव में सीख रहा है।

यदि व्यवस्था बचाने के लिए गुणवत्ता गिर रही है, तो शिक्षा नहीं, भविष्य कमजोर हो रहा है।

4. दुनिया की श्रेष्ठ शिक्षा प्रणालियाँ इस प्रश्न का उत्तर दे चुकी हैं :

यह केवल स्थानीय प्रशासनिक चुनौती नहीं है। विश्व की सफल शिक्षा प्रणालियाँ इस प्रश्न पर बहुत पहले स्पष्ट निर्णय दे चुकी हैं।

उच्च प्रदर्शन करने वाले देशों में माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्तर पर शिक्षक चयन, प्रशिक्षण और अध्यापन दायित्व विषय विशेषज्ञता के आधार पर निर्धारित किए जाते हैं। वहाँ शिक्षा को प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि ज्ञान निर्माण की वैज्ञानिक प्रक्रिया माना जाता है।

शिक्षा दुनिया को बदलने का सबसे शक्तिशाली हथियार है।

यदि शिक्षा परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम है, तो उसके केंद्र में विशेषज्ञता, गुणवत्ता और विषयगत दक्षता का होना अनिवार्य है।

5. सबसे बड़ी कीमत हमेशा बच्चा चुकाता है :

किसी भी शैक्षिक निर्णय का अंतिम प्रभाव बच्चे पर पड़ता है। जब शिक्षक स्वयं विषय को लेकर पूर्ण आत्मविश्वास में नहीं होता, तब कक्षा संवाद सीमित हो जाता है। जटिल अवधारणाएँ सतही रह जाती हैं और शिक्षण केवल पाठ समाप्त करने की प्रक्रिया बन जाता है।

See also  प्रदेश के राज्यपाल रमेन डेका ने अरपा नदी की दुर्दशा पर दिखाए तीखे तेवर -

सबसे गंभीर प्रभाव मनोवैज्ञानिक स्तर पर दिखाई देता है।

जब बच्चा बार-बार अधूरी व्याख्या सुनता है, अस्पष्ट उत्तर प्राप्त करता है और विषय की गहराई को समझ नहीं पाता, तब वह केवल पाठ नहीं खोता – वह प्रश्न पूछने का साहस भी खोने लगता है।

धीरे-धीरे शिक्षा समझने की प्रक्रिया न रहकर केवल परीक्षा उत्तीर्ण करने का माध्यम बन जाती है।

शिक्षा में की गई छोटी प्रशासनिक भूलें, अक्सर बच्चों के जीवन में बड़े बौद्धिक अंतर पैदा कर देती हैं।

6. बहुविषयी शिक्षा का अर्थ हर शिक्षक से हर विषय नहीं :

समस्या तब और गंभीर हो जाती है, जब आधुनिक शिक्षा की अवधारणाओं की गलत व्याख्या की जाती है।

आज शिक्षा व्यवस्था बहुविषयी शिक्षा को प्रोत्साहित कर रही है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों में समग्र दृष्टिकोण और विभिन्न विषयों के बीच संबंध स्थापित करने की क्षमता विकसित करना है।

लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि एक शिक्षक बिना पर्याप्त विशेषज्ञता के हर विषय पढ़ाने लगे।

बहुविषयी शिक्षा का अर्थ ज्ञान का एकीकरण है; जबकि एक शिक्षक से अनेक विषय पढ़वाना कई बार केवल संसाधनों की कमी का प्रशासनिक प्रबंधन बन जाता है।

इन दोनों अवधारणाओं को समान समझ लेना शिक्षा दर्शन की गंभीर त्रुटि है।

7. नीति कुछ कहती है, ज़मीनी सच्चाई कई बार कुछ और दिखाती है :

शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 द्वारा लागू स्पष्ट रूप से दक्ष शिक्षक, क्षमता आधारित अधिगम, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण और समग्र विकास को शिक्षा की मूल शर्त मानती है।

लेकिन यदि व्यवहारिक स्तर पर शिक्षक को उसकी विषय विशेषज्ञता से बाहर जाकर अनेक विषयों का अध्यापन करना पड़ रहा है, तो यह नीति और व्यवहार के बीच मौजूद गंभीर अंतर को उजागर करता है।

नीति की सफलता कागज़ पर नहीं, कक्षा के भीतर दिखाई देनी चाहिए।

See also  पंडित राजेंद्र गंगानी की कथक प्रस्तुति ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

8. समाधान केवल पद भरना नहीं, शिक्षा की सोच बदलना है :

समस्या का समाधान केवल रिक्त पदों को भर देना नहीं है। वास्तविक समाधान शिक्षा प्रशासन की सोच में संरचनात्मक परिवर्तन से आएगा।

आवश्यक है कि शिक्षक नियुक्तियाँ विषय आधारित हों, विद्यालयों में संतुलित पदस्थापना सुनिश्चित की जाए, शिक्षकों को उनकी विशेषज्ञता के अनुरूप अध्यापन दायित्व दिए जाएँ और गैर-विशेषज्ञ विषयों का अनावश्यक भार कम किया जाए। साथ ही सतत व्यावसायिक प्रशिक्षण को मजबूत करना और गुणवत्ता को प्रशासनिक सुविधा से ऊपर रखना अनिवार्य होगा।

जब तक शिक्षक को केवल कर्मचारी नहीं, बल्कि ज्ञान विशेषज्ञ के रूप में नहीं देखा जाएगा, तब तक उत्कृष्ट शिक्षा एक आदर्श भर बनी रहेगी।

अंतिम प्रश्न यह नहीं कि विद्यालय चल रहा है, बल्कि यह कि बच्चा कितना सीख रहा है

उच्चतम शिक्षा वह है जो हमें केवल जानकारी नहीं देती, बल्कि जीवन के साथ सामंजस्य स्थापित करना सिखाती है।

यदि एक शिक्षक, जो वर्षों की तैयारी के बाद किसी एक विषय में विशेषज्ञ बना है, उससे अनेक विषयों का अध्यापन करवाया जाता है, तो यह केवल कार्य विभाजन का प्रश्न नहीं है – यह शिक्षा की गुणवत्ता के साथ जोखिम लेने जैसा है।

जब शिक्षक की विशेषज्ञता से समझौता होता है, तब शिक्षा की गुणवत्ता नहीं, पूरी पीढ़ी प्रभावित होती है।

हमें यह स्वीकार करना होगा कि शिक्षक से उसकी विशेषज्ञता से बाहर जाकर अध्यापन करवाना प्रशासनिक सुविधा तो हो सकती है, लेकिन बच्चों के सीखने के अधिकार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दृष्टि से यह न्यायपूर्ण व्यवस्था नहीं कही जा सकती।

किसी राष्ट्र का भविष्य कक्षाओं में लिखा जाता है – और यदि शिक्षक को उसकी विशेषज्ञता से दूर कर दिया जाए, तो आने वाली पीढ़ियाँ उसकी सबसे बड़ी कीमत चुकाती हैं।

WhatsApp पर शेयर करें
HD MAHANT
Share. Facebook Twitter WhatsApp Copy Link

Related Posts

बिलासपुर से गूंजा ST आरक्षण का शंखनाद, राष्ट्रीय बैठक में एकजुट हुआ पनिका समाज

07/09/2026 - 11:35 PM

जन्माष्टमी पर छत्तीसगढ़ी सिनेमा का बड़ा तोहफा: ‘मोर मयारू, तोर मयारू’ ने पहले ही दिन जीता दर्शकों का दिल

04/09/2026 - 11:47 PM

सुसाइड नोट और वीडियो बने सबूत, बहू समेत तीन आरोपी जेल भेजे गए

04/09/2026 - 8:48 AM

वरिष्ठ समाजसेवी चमरु दास महंत को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि, प्रदेश अध्यक्ष डॉ. ललित कुमार मानिकपुरी ने शोकाकुल परिवार को बंधाया ढांढस

04/09/2026 - 7:35 AM

शिक्षा विभाग में हड़कंप! 10 हजार की रिश्वत लेते BEO चंद्र कुमार यारदा गिरफ्तार

02/09/2026 - 11:38 PM

प्रधानमंत्री आवास योजना- ग्रामीण के अपात्र हितग्राहियों की सूची जारी

02/09/2026 - 11:06 PM
Leave A Reply Cancel Reply

पोस्ट

बिलासपुर से गूंजा ST आरक्षण का शंखनाद, राष्ट्रीय बैठक में एकजुट हुआ पनिका समाज

07/09/2026 - 11:35 PM

जन्माष्टमी पर छत्तीसगढ़ी सिनेमा का बड़ा तोहफा: ‘मोर मयारू, तोर मयारू’ ने पहले ही दिन जीता दर्शकों का दिल

04/09/2026 - 11:47 PM

सुसाइड नोट और वीडियो बने सबूत, बहू समेत तीन आरोपी जेल भेजे गए

04/09/2026 - 8:48 AM

वरिष्ठ समाजसेवी चमरु दास महंत को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि, प्रदेश अध्यक्ष डॉ. ललित कुमार मानिकपुरी ने शोकाकुल परिवार को बंधाया ढांढस

04/09/2026 - 7:35 AM

एच. डी. महंत
मुख्य संपादक

Official Address :
Shop No. 2, Ground Floor, Gokul Apartment, Near Shyam Nagar Chowk, Shyam Nagar, Telibandha Raipur, Chhattisgarh – 492013

Facebook X (Twitter) YouTube WhatsApp
UDYAM-CG-33-0000933
September 2026
M T W T F S S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930  
« Aug    
© 2026 The Bharat Times. Designed by Nimble Technology.

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.