शिव-पार्वती विवाह स्वरूप में विराजेंगी माता रानी, कोलकाता से आएंगे विशेष आभूषण और श्रृंगार सामग्री; 12 अक्टूबर को होगा भव्य आगमन
बिलासपुर। मध्य नगरी दुर्गा उत्सव समिति इस वर्ष अपने 50वें वर्ष में प्रवेश करने जा रही है। स्वर्ण जयंती वर्ष को यादगार बनाने के लिए समिति द्वारा विशेष तैयारियां की जा रही हैं। मध्य नगरी चौक में बनने वाला भव्य पंडाल कोलकाता के कारीगरों द्वारा तैयार किया जा रहा है। पंडाल की थीम को आकर्षक और धार्मिक स्वरूप देने के साथ इस वर्ष माता रानी की प्रतिमा को शिव-पार्वती विवाह के स्वरूप में प्रस्तुत किया जाएगा।
समिति के सदस्यों के अनुसार माता रानी के लिए विशेष आभूषण एवं श्रृंगार सामग्री कोलकाता से मंगाई जा रही है। समिति की प्रमुख विशेषताओं में माता रानी की भव्य प्रतिमा, आकर्षक पंडाल और श्रद्धालुओं के लिए आयोजित होने वाला भंडारा शामिल है। भंडारे में प्रतिदिन करीब चार क्विंटल भोग तैयार किए जाने की व्यवस्था की जा रही है। माता रानी का भव्य आगमन 12 अक्टूबर को होगा, जिसके लिए तैयारियां अंतिम चरण में हैं।
मध्य नगरी दुर्गा उत्सव समिति की स्थापना की परंपरा संथालिया परिवार और शर्मा परिवार सहित समिति के वरिष्ठ सदस्यों के प्रयासों से शुरू हुई थी। प्रारंभिक दौर में माता की प्रतिमा कोलकाता से मंगाई जाती थी। पिछले करीब 10-15 वर्षों से प्रतिमा निर्माण का कार्य ठाकरे परिवार द्वारा किया जा रहा है और इस परंपरा को आज भी कायम रखा गया है।
स्वर्ण जयंती वर्ष में समिति का पंजीयन और बैंक खाता भी खोल दिया गया है, जिससे श्रद्धालु एवं नागरिक अपनी इच्छानुसार समिति को सहयोग राशि प्रदान कर सकते हैं। इस वर्ष विजय वर्मा को अध्यक्ष तथा अभिषेक त्रिपाठी ‘लकी’ को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। समिति के सदस्य चुट्टू अवस्थी ने बताया कि 50वें वर्ष के आयोजन को सफल बनाने के लिए समिति के सभी सदस्य एकजुट होकर कार्य कर रहे हैं। समिति का संकल्प है कि इस वर्ष का दुर्गा उत्सव धार्मिक आस्था, सामाजिक सहभागिता और भव्य आयोजन की दृष्टि से विशेष रूप से यादगार बने।




