बिलासपुर 6 जून 2026/ पर्यावरण संकट और जलवायु परिवर्तन की बढ़ती चुनौती के बीच बिलासपुर में विश्व पर्यावरण दिवस पर ऐसा आयोजन हुआ जिसने बच्चों से लेकर साहित्यकारों, कलाकारों और पर्यावरण प्रेमियों तक सभी को एक मंच पर जोड़ दिया। पर्यावरण एवं पर्यटन विकास समिति, छत्तीसगढ़ी राजभाषा परिषद, वन विभाग और छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा सरस्वती शिशु मंदिर सभागार, तिलक नगर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण का सशक्त संदेश गूंजा और समाज, साहित्य, कला, पत्रकारिता तथा समाजसेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाली विभूतियों का सम्मान किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत चित्रकला एवं पेंटिंग प्रतियोगिता से हुई, जिसमें शताधिक बच्चों ने पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, वन्यजीवन और प्लास्टिक प्रदूषण जैसे विषयों पर अपनी रचनात्मकता दिखाई। छत्तीसगढ़ी गीतों की संगीतमय प्रस्तुति ने माहौल को जीवंत बना दिया। मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग की सचिव डॉ. अभिलाषा बेहार ने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण आज की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है और इसके संरक्षण की जिम्मेदारी हम सभी की है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे थावे विद्यापीठ, गोपालगंज (बिहार) के कुलपति डॉ. विनय कुमार पाठक ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए जन-जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है और समिति पिछले तीन दशकों से इस दिशा में अनुकरणीय कार्य कर रही है।
आयोजन में काव्य गोष्ठी, नृत्य, गीत-संगीत, फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता, छत्तीसगढ़ी व्यंजन मेला और साहित्यिक प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र रहे। शाम को आयोजित राज्य स्तरीय सम्मान समारोह में प्रदेशभर के साहित्यकारों, कलाकारों, पर्यावरणविदों, पत्रकारों और समाजसेवियों को शाल, श्रीफल और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। बहरहाल, कार्यक्रम ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि पर्यावरण बचाना केवल अभियान नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।






