सुरेश सिंह बैस
बिलासपुर 18 अप्रैल 2026/ उच्च गुणवत्तायुक्त शिक्षा देने के एवज में पालकों की जेब ढीली करने वाले स्कूल प्रबंधन पर जल्द ही गाज गिरने वाली है। इस मामले को लेकर सरकार सख्त हो गई है। शिक्षा विभाग रायुषर के उप संचालक ने संभागीय जेडी को एक लिखा है, जिसमें कहा गया है कि निजी स्कूलों की फीस की जानकारी पूरी तरह से स्पष्ट होनी चाहिए और उसमें अगर कही पर ज्यादा फीस ली जाती है और परिजनों की शिकायत आती है तो जांच कर कार्रवाई होनी चाहिए। पत्र में 3 बिंदुओं पर निर्देश दिए गए हैं। उप संचालक ने पूछा है कि जिले में संचालित सभी निजी शालाओं में फीस विनियमन समित्ति का गठन हुआ है अथवा नहीं? यदि नहीं तो क्या कार्रवाई की गई है। क्या इन निजी शालाओं में शुल्क निर्धारण के लिए समिति की बैठक प्रति वर्ष आयोजित हो रही है? क्या बैठक आयोजन के पश्चात शुल्क निर्धारण का प्रदर्शन नोटिस बोर्ड में किया जा रहा है? जिला स्तरीय शुल्क समिति की विगत तीन वर्ष (2024-25, 2025-26, 2026-27) में आयोजित बैठकों की जानकारी दें।
शिक्षा विभाग भी लापरवाह
मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों द्वारा फीस विनियमन अधिनियम का पालन नहीं किया जा रहा है। कई स्कूल ऐसे हैं, जो जानकारी उपलब्ध कराना उचित नहीं समझ रहे हैं। इस मामले में जिला शिक्षा विभाग भी लापरवाही बरत रहा है। जानकारों का कहना है कि यह जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की है. जिनको फीस स्ट्रक्चर की पूरी जानकारी निजी स्कूलों से मांगनी चाहिये।


