स्कूल शिक्षा विभाग ने जारी किए नए दिशा-निर्देश, पुरानी एसएमडीसी भंग कर बनेगी नई विद्यालय प्रबंधन समिति
– सुरेश सिंह बैस
बिलासपुर 19 जून 2026/ छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में प्रबंधन व्यवस्था को अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और जनभागीदारी आधारित बनाने की दिशा में स्कूल शिक्षा विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। भारत सरकार की नई गाइडलाइन के अनुरूप राज्य के सभी सरकारी विद्यालयों में संचालित पुरानी स्कूल प्रबंधन एवं विकास समिति (एसएमडीसी) को भंग कर नई विद्यालय प्रबंधन समिति (एसएमसी) का गठन किया जाएगा। नई व्यवस्था लागू होने के बाद स्कूलों में स्थानीय नेताओं और बाहरी प्रभावशाली व्यक्तियों की भूमिका सीमित हो जाएगी तथा निर्णय प्रक्रिया में अभिभावकों की भागीदारी बढ़ेगी।
स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव कमलप्रीत सिंह द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार अब विद्यालयों के संचालन और विकास संबंधी निर्णयों में अभिभावकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी।
75 प्रतिशत सदस्य होंगे अभिभावक, अध्यक्ष भी माता-पिता में से
नई एसएमसी में कुल सदस्यों का 75 प्रतिशत हिस्सा विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों के माता-पिता अथवा कानूनी अभिभावकों का होगा। शेष 25 प्रतिशत में जनप्रतिनिधि, शिक्षक, शिक्षाविद, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तथा अन्य आवश्यक प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा। इससे किसी भी बाहरी समूह या व्यक्ति का समिति पर वर्चस्व समाप्त हो जाएगा।
समिति के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चयन भी केवल अभिभावक सदस्यों में से ही किया जाएगा। विद्यालय के प्राचार्य सदस्य सचिव की भूमिका निभाएंगे।
महिलाओं को मिलेगा आधा प्रतिनिधित्व
नई व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए समिति में कम से कम 50 प्रतिशत महिला सदस्यों को शामिल करना अनिवार्य किया गया है। साथ ही अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग तथा दिव्यांग विद्यार्थियों के अभिभावकों को भी उनकी जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व दिया जाएगा।
एक लाख रुपये तक के कार्य अब समिति स्वयं करा सकेगी
विद्यालयों में छोटे निर्माण एवं मरम्मत कार्यों के लिए अब लंबी प्रशासनिक प्रक्रियाओं की आवश्यकता नहीं होगी। शौचालय मरम्मत, पेयजल व्यवस्था, बिजली-पंखे, बाउंड्री वॉल तथा अन्य आधारभूत सुविधाओं से जुड़े एक लाख रुपये तक के कार्य विद्यालय प्रबंधन समिति सीधे करा सकेगी। विशेष बात यह है कि इन कार्यों में ठेकेदारों की बजाय स्थानीय स्व-सहायता समूहों की प्रशिक्षित महिलाओं, मिस्त्रियों, प्लंबरों और इलेक्ट्रिशियनों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।
हर माह होगी बैठक, डिजिटल पारदर्शिता अनिवार्य
समिति की प्रत्येक माह कम से कम एक बैठक आयोजित करना अनिवार्य होगा। किसी भी प्रस्ताव को पारित करने के लिए कुल सदस्यों में से न्यूनतम 50 प्रतिशत की उपस्थिति आवश्यक होगी। बैठक की कार्यवाही और निर्णयों को डिजिटल माध्यम से दर्ज कर सार्वजनिक किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
कलेक्टर की निगरानी में होगी कार्यप्रणाली
विद्यालय प्रबंधन समितियों की गतिविधियों की निगरानी के लिए जिला स्तर पर मॉनिटरिंग समिति गठित की जाएगी, जिसकी अध्यक्षता जिला कलेक्टर करेंगे। वित्तीय अनियमितता, लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित समिति के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। यह समिति मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता की निगरानी, विद्यालय विकास की तीन वर्षीय कार्ययोजना तैयार करने तथा शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी नजर रखेगी।
शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और जनभागीदारी की नई पहल
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नई व्यवस्था से सरकारी स्कूलों में अभिभावकों की सहभागिता बढ़ेगी, स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप निर्णय लिए जा सकेंगे और राजनीतिक हस्तक्षेप में कमी आएगी। इससे विद्यालयों के विकास, संसाधनों के बेहतर उपयोग और बच्चों की शैक्षणिक प्रगति को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।





