बिलासपुर 11 जून 2026/ जिले में सड़क निर्माण के बड़े प्रोजेक्ट पर मानसून ने ब्रेक लगा दिया है। लोक निर्माण विभाग द्वारा स्वीकृत 46 सड़कों में से 28 सड़कों का निर्माण कार्य बारिश के कारण प्रभावित हो गया है। लगभग 275 करोड़ रुपये की लागत वाली इन परियोजनाओं का काम अब मानसून समाप्त होने के बाद ही गति पकड़ सकेगा। इससे कई क्षेत्रों के लोगों को आगामी चार महीनों तक जर्जर और उबड़-खाबड़ सड़कों पर आवागमन करने की मजबूरी झेलनी पड़ेगी।
46 में से केवल 8 सड़कों पर शुरू हो पाया काम
लोक निर्माण विभाग को 448 करोड़ रुपये की लागत से 46 सड़क निर्माण कार्यों की स्वीकृति मिली थी। इनमें से अब तक केवल 8 सड़कों पर ही निर्माण कार्य प्रारंभ हो सका है, जबकि 10 सड़कें निर्माणाधीन हैं। शेष 28 सड़कों का काम विभिन्न कारणों से शुरू नहीं हो पाया और अब बारिश के कारण इन पर निर्माण कार्य फिलहाल टालना पड़ेगा।
टेंडर प्रक्रिया और बारिश बनी बाधा
विभागीय अधिकारियों के अनुसार कई परियोजनाओं में अभी टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है, जबकि कुछ कार्यों में प्रारंभिक औपचारिकताएं शेष हैं। मानसून के दौरान सड़क निर्माण की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका रहती है, इसलिए अधिकांश कार्य बारिश के बाद ही शुरू किए जाएंगे।
मोपका–खैरा–गतोरा मार्ग का इंतजार बढ़ा
करीब 50 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली मोपका–खैरा–गतोरा–जयरामनगर सड़क भी बारिश से प्रभावित परियोजनाओं में शामिल है। इस मार्ग के निर्माण से हजारों लोगों को राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन अब उन्हें चार माह और इंतजार करना होगा।
कोनी–मोपका फोरलेन भी प्रभावित
करीब 80 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित कोनी–मोपका फोरलेन सड़क का निर्माण भी मानसून के कारण आगे नहीं बढ़ पाएगा। यह सड़क लंबे समय से क्षेत्र की प्रमुख मांग रही है। सड़क की खराब स्थिति के कारण लोगों को लगातार आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सीपत–बेलतरा–कोरबा मार्ग पर केवल वर्क ऑर्डर
लगभग 41 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली सीपत–बेलतरा–कोरबा सड़क के लिए वर्क ऑर्डर जारी हो चुका है, लेकिन निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। सड़क की वर्तमान स्थिति खराब होने से दुर्घटनाओं का खतरा बना हुआ है। बारिश के मौसम में यह समस्या और गंभीर हो सकती है।
कुछ कार्य मानसून में भी जारी रहेंगे
PWD अधिकारियों का कहना है कि जिन परियोजनाओं में केवल दस्तावेजी या प्रशासनिक प्रक्रियाएं शेष हैं, उन्हें मानसून के दौरान पूरा किया जाएगा ताकि बारिश समाप्त होते ही निर्माण कार्य तेजी से शुरू किया जा सके। विभाग का लक्ष्य है कि सभी लंबित परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा में पूरा किया जाए।
जनता को राहत का इंतजार
सड़क निर्माण में हो रही देरी का सबसे अधिक असर ग्रामीण और उपनगरीय क्षेत्रों के लोगों पर पड़ रहा है। खराब सड़कों के कारण आवागमन कठिन हो गया है और दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ गई है। अब लोगों की निगाहें मानसून समाप्त होने के बाद शुरू होने वाले निर्माण कार्यों पर टिकी हैं।





