बिलासपुर।अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन (विश्वविद्यालयों का समग्र विकास) का भव्य एवं उत्साहपूर्ण शुभारंभ हो गया। इस महत्वपूर्ण आयोजन में देशभर के केंद्रीय, राज्य एवं निजी विश्वविद्यालयों के लगभग 42 कुलपति, प्रमुख शिक्षाविद्, शोधार्थी तथा छात्र-छात्राओं ने उत्साह से भाग लिया।विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद के सदस्य भी इस ऐतिहासिक अवसर पर विशेष रूप से उपस्थित रहे।उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ के राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति रमेन डेका ने की। अपने प्रेरक उद्बोधन में उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय अब केवल डिग्री प्रदान करने वाले संस्थान नहीं रह सकते, बल्कि इन्हें राष्ट्र निर्माण के सशक्त माध्यम के रूप में उभरना चाहिए। उन्होंने समग्र शिक्षा, चरित्र निर्माण, नैतिक मूल्यों की स्थापना, कौशल विकास तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के आधुनिक संदर्भ में समन्वय पर विशेष बल दिया। उन्होंने विश्वविद्यालयों से आह्वान किया कि वे ऐसे नागरिक तैयार करें जो रोजगारोन्मुखी, तकनीकी रूप से दक्ष तथा समाज के प्रति पूर्ण रूप से उत्तरदायी हों।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ए.डी.एन. वाजपेयी ने स्वागत उद्बोधन में विगत पाँच वर्षों की उपलब्धियों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति का प्रभावी क्रियान्वयन, परीक्षा परिणामों की समयबद्ध घोषणा, प्रशासनिक पारदर्शिता तथा आधारभूत संरचना के विकास में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। विश्वविद्यालय का बजट 2.72 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये कर दिया गया है। पीएम-यूएसएचए योजना के अंतर्गत 20 करोड़ रुपये की अनुदान राशि प्राप्त हुई है तथा लगभग 100 करोड़ रुपये की विभिन्न निर्माण परियोजनाएँ वर्तमान में प्रगति पर हैं। एनएसएस गतिविधियों में छात्रों की बढ़ती सक्रियता, नई शिक्षक नियुक्तियाँ तथा नए विभागों के प्रस्ताव विश्वविद्यालय की निरंतर विकास यात्रा के प्रमाण हैं।सम्मेलन के पहले दिन पाँच महत्वपूर्ण तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें गहन विचार-विमर्श हुआ।
पहला सत्र: विश्वविद्यालयों का समग्र विकास -इसमें प्रशासनिक सुधारों तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा हुई।दूसरा सत्र: भारतीय ज्ञान प्रणाली तथा अकादमिक मूल्यों की पुनर्स्थापना; भारतीय परंपरा, मूल्यों की पुनर्प्राप्ति तथा परंपरा व आधुनिकता के संतुलित समन्वय पर मंथन हुआ।तीसरा सत्र: श्रेष्ठ अभ्यासों एवं नवाचारी मॉडलों का आदान-प्रदान :विभिन्न विश्वविद्यालयों द्वारा अपनाई गई उत्कृष्ट शैक्षणिक, अनुसंधान एवं प्रशासनिक पहलों का प्रस्तुतीकरण किया गया।
चौथा सत्र: व्यक्तित्व विकास, छात्र कौशल तथा शोध अभिवृत्ति, छात्रों के सर्वांगीण विकास, कौशल वृद्धि, नवाचार तथा शोध-उन्मुखीकरण पर बल दिया गया।पाँचवाँ सत्र: उच्च शिक्षा में डिजिटल नवाचार तथा सामाजिक चुनौतियाँ, डिजिटल तकनीक का समावेशन, ऑनलाइन शिक्षण मंच तथा वर्तमान सामाजिक मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श हुआ।
प्रतिभागियों ने उच्च शिक्षा को अधिक प्रभावी, समावेशी, मूल्य-आधारित तथा भविष्योन्मुखी बनाने हेतु महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए। समग्र विकास की अवधारणा को विश्वविद्यालयीय नीतियों एवं दैनिक व्यवहार में उतारने पर सर्वसम्मति व्यक्त की गई।
कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी विशिष्ट अतिथियों, कार्यपरिषद सदस्यों, कुलपतियों, शिक्षाविदों, प्रतिभागियों तथा आयोजन समिति के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। दूसरे दिन अंतिम सत्र में इन चर्चाओं को आगे बढ़ाया जाएगा। यह राष्ट्रीय कुलपति सम्मेलन उच्च शिक्षा के क्षेत्र में समग्र, मूल्यनिष्ठ एवं नवोन्मेषी परिवर्तन की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं प्रेरणादायी शुभारंभ सिद्ध हो रहा है।
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