उपस्थिति घटी, कई स्कूलों में शाला प्रवेशोत्सव भी प्रभावित
– सुरेश सिंह बैस
बिलासपुर 18 जून 2026/ क्षेत्र में मानसून की आहट के बीच भीषण गर्मी और उमस का असर कम नहीं हो सका है। मौसम में नमी बढ़ने के बावजूद चिपचिपी गर्मी ने जनजीवन को बेहाल कर दिया है। इसी बीच 16 जून से प्रदेश में शासकीय एवं निजी स्कूलों के खुलते ही पहले दिन ही हालात बच्चों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हुए। सुबह से ही तेज धूप और उमस के कारण छोटे बच्चे परेशान नजर आए। कई स्कूलों में बच्चे पसीने से तरबतर दिखे, जबकि दोपहर तक स्थिति और कठिन हो गई। उमस और गर्मी के चलते स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति भी काफी कम रही। कई जगहों पर कक्षाएं लगभग खाली रहीं।
कम उपस्थिति, प्रभावित हुआ शाला प्रवेशोत्सव
पहले ही दिन 100 से अधिक स्कूलों में शाला प्रवेशोत्सव का आयोजन भी प्रभावित हुआ। कई विद्यालयों में बच्चों की संख्या इतनी कम रही कि कार्यक्रम औपचारिकता मात्र बनकर रह गया। कुछ स्कूलों में तो केवल 4–5 बच्चे ही पहुंचे, जबकि कई जगहों पर प्रवेशोत्सव स्थगित करना पड़ा।
स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर अभिभावकों की चिंता
अभिभावकों ने कहा कि मौजूदा मौसम में छोटे बच्चों को स्कूल भेजना मुश्किल हो रहा है। उमस के कारण बच्चों में सिर दर्द, थकान, बेचैनी और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याओं की आशंका बढ़ गई है। पालकों का कहना है कि मौसम को देखते हुए स्कूलों के समय में बदलाव या कुछ दिनों की अतिरिक्त राहत दी जानी चाहिए थी।
जर्जर स्कूल भवनों ने बढ़ाई मुश्किलें
जिले के कई स्कूल भवनों की स्थिति भी चिंता का विषय बनी हुई है। कहीं छतों से पानी टपक रहा है, तो कहीं फर्श और बेंच टूटे पड़े हैं। कई स्थानों पर कक्षाएं बरामदे या एक ही कमरे में संचालित करनी पड़ीं।
जानकारी के अनुसार जिले में लगभग 222 स्कूल भवन जर्जर स्थिति में हैं, जिनकी मरम्मत के लिए डीएमएफ फंड से करोड़ों की राशि स्वीकृत की गई थी, लेकिन समय पर मरम्मत न होने से छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
प्रशासनिक व्यवस्था और जमीनी हकीकत में अंतर
जिले में 1800 से अधिक शासकीय स्कूल संचालित हैं, जिनमें प्राथमिक से लेकर हायर सेकेंडरी स्तर तक की कक्षाएं शामिल हैं। कई विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं की कमी बनी हुई है, शौचालय बंद हैं, पेयजल व्यवस्था बाधित है और स्टाफ रूम तक जर्जर हालत में हैं।
शिक्षा विभाग का पक्ष
शिक्षा विभाग रामेश्वर जायसवाल जिला शिक्षा अधिकारी बिलासपुर के अनुसार का कहना है कि जर्जर स्कूलों की सूची तैयार कर मरम्मत एवं निर्माण कार्य के लिए प्रक्रिया जारी है। डीएमएफ फंड से अतिरिक्त राशि की मांग भी की गई है ताकि बच्चों को बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।
स्थिति फिलहाल जस की तस
भीषण उमस और अव्यवस्थित स्कूल ढांचे के बीच शैक्षणिक सत्र की शुरुआत बच्चों और अभिभावकों दोनों के लिए कठिन साबित हो रही है। मौसम में सुधार और स्कूल व्यवस्था में सुधार के बिना हालात सामान्य होने की उम्मीद फिलहाल कम दिखाई दे रही है।





