बिलासपुर 26 फरवरी 2026/हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद अग्रवाल की खंडपीठ में बिलासपुर हवाई सुविधा विस्तार से जुड़ी जनहित याचिकाओं की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान खंडपीठ में कहा कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार कुछ कार्य करते तो दिखाई दे रहे हैं इसलिए उन्हें और समय प्रदान किया जाना उचित होगा। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अपने आदेश में राज्य सरकार के विमानन विभाग के संचालक को आधारभूत संरचना की वर्तमान स्थिति और उसमें किए जाने वाले नए कामों, नाइट लैंडिंग सुविधा हो जाने के बाद वर्तमान में उपस्थित स्टाफ की स्थिति और समर शेड्यूल में किन उड़ानों का परिचालन होगा इस पर एक शपथ पत्र देने के निर्देश भी दिए हैं। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया की तरफ से अधिवक्ता अनुमेह श्रीवास्तव ने बिलासपुर एयरपोर्ट नाइट लैंडिंग के संबंध में जारी नोटिस टू एयरमैन जिसे शॉर्ट में नोटाम कहा जाता है की प्रति फाइल की। इसके तहत 30 दिन के बाद बिलासपुर एयरपोर्ट नाइट लैंडिंग में विमान को उतारने के लिए खुल जाएगा। केंद्र सरकार की ओर से अधिवक्ता रमाकांत मिश्रा और राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शशांक ठाकुर ने खंडपीठ को इस बात से अवगत कराया कि राज्य और केंद्र सरकार बिलासपुर एयरपोर्ट में आगे और कार्य करने के लिए तत्पर हैं। याचिक कर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आशीष श्रीवास्तव ने नाइट लैंडिंग सुविधा के लिए पर्याप्त स्टाफ की कमी का जिक्र करते हुए कहा कि इस अगर यह स्टाफ नहीं रहेगा तो नाइट लैंडिंग सुविधा पूरे टाइम नहीं मिल पाएगी। अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने भी इस बात का समर्थन करते हुए यह भी बताया कि राज्य सरकार ने जो फंड बिलासपुर एयरपोर्ट विकास के लिए आवंटित किए हैं उन्हें किस-किस कार्य में खर्च किया जाना है इस पर भी अभी कोई स्थिति साफ नहीं है अतः यह साफ होना चाहिए कि क्या-क्या काम भविष्य में किए जाएंगे। दोनों ही अधिवक्ताओं ने समर शेड्यूल में पुराने की संख्या पर्याप्त किए जाने की मांग की वही सुदीप श्रीवास्तव ने विशेष रूप से प्रयागराज की उड़ान में कमी किए जाने का जिक्र किया।
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