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शिवरीनारायण में माघी परंपरा का अनुपम दृश्य, श्रद्धालु भुइयां नापते पहुँचे शबरी धाम

शिवरीनारायण।भगवान श्री जगन्नाथ स्वामी जी का मूल स्थान एवं माता शबरी की पुण्य जन्मभूमि, मंदिरों की नगरी पावन शिवरीनारायण धाम में इन दिनों आस्था और श्रद्धा का अद्भुत दृश्य देखने को मिल रहा है। माघ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी से लेकर माघ शुक्ल पूर्णिमा तक श्रद्धालु हाथों में नारियल (श्रीफल) लेकर जमीन पर दंडवत लोट लगाते हुए बड़ी संख्या में शबरी धाम पहुँच रहे हैं।विदित हो कि यह परंपरा वर्षों पुरानी है, जिसमें श्रद्धालु अपने घरों से ही जमीन पर भुइयां नापते हुए भगवान श्री शिवरीनारायण जी के दर्शन हेतु निकलते हैं। मान्यता है कि इस कठिन साधना से भगवान श्री शिवरीनारायण जी, माता शबरी जी एवं भगवान महाप्रभु श्री जगन्नाथ स्वामी श्रद्धालुओं की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। इसी आस्था और विश्वास के चलते 15 से 20 किलोमीटर दूर-दराज़ के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु दंडवत लोट लगाते हुए शबरी धाम पहुँच रहे हैं।श्रद्धालुओं का कहना है कि इतनी लंबी दूरी तय करने के बावजूद उन्हें किसी प्रकार का दर्द, थकान या शारीरिक कष्ट नहीं होता। उनका विश्वास है कि यह सब भगवान श्री शिवरीनारायण जी, माता शबरी जी एवं भगवान जगन्नाथ स्वामी के आशीर्वाद से ही संभव हो पाता है। शबरी धाम पहुँचने पर श्रद्धालु श्री शिवरीनारायण भगवान मंदिर की 7 या 11 परिक्रमा करते हैं, साथ ही शबरी मंदिर में भी भुइयां लोट लगाकर पूजा-अर्चना करते हैं।भुइयां लोट लगाने वाले साधकों पर भगवान श्री शिवरीनारायण जी की कृपा-दृष्टि बनी रहती है और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। श्रद्धालुओं की सेवा हेतु नारायण सेवा समिति शिवरीनारायण द्वारा प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी निःशुल्क भोजन एवं आवश्यक दवाइयों की व्यवस्था की गई है। नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले साधकों को सुबह 11 बजे से रात्रि 10 बजे तक निःशुल्क भोग-प्रसाद उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसका लाभ श्रद्धालु बड़ी संख्या में उठा रहे हैं।गौरतलब है कि नारायण सेवा समिति शिवरीनारायण द्वारा पिछले लगभग 32 वर्षों से भुइयां नापते हुए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क भोजन एवं दवाओं की व्यवस्था निरंतर और सफलतापूर्वक की जा रही है, जो सेवा और श्रद्धा का एक अनुकरणीय उदाहरण है।

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