छत्तीसगढ़

सत्य की कीमत: पत्रकार मुकेश चंद्राकर हत्याकांड में बड़ा खुलासा, PWD के 5 अफसर गिरफ्तार

 

रायपुर/बीजापुर, 30 जुलाई 2025/छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में स्वतंत्र पत्रकार मुकेश चंद्राकर की सनसनीखेज हत्या के मामले में पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए लोक निर्माण विभाग (PWD) के पांच अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार अफसरों में दो सेवानिवृत्त कार्यपालन अभियंता (EE), एक वर्तमान EE, एक SDO और एक उप अभियंता शामिल हैं। सभी को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।

भ्रष्ट गठजोड़ के खिलाफ आवाज बनी जानलेवा

पत्रकार मुकेश चंद्राकर ने बीजापुर जैसे संवेदनशील और नक्सल प्रभावित क्षेत्र में सड़क निर्माण में भारी भ्रष्टाचार को उजागर किया था। उन्होंने सोशल मीडिया और अपने वीडियो पोर्टल के माध्यम से घटिया निर्माण कार्य का खुलासा किया था, जिससे ठेकेदार और अफसरों की मिलीभगत सामने आने लगी थी।सूत्रों के अनुसार, इस खुलासे से नाराज होकर ठेकेदार सुरेश चंद्राकर — जो मुकेश का करीबी रिश्तेदार भी था — ने विभागीय अफसरों के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची।

हत्या के बाद सेप्टिक टैंक में फेंकी गई लाश

1 जनवरी 2025 को मुकेश लापता हो गए थे और 3 जनवरी को उनकी लाश एक पुराने सेप्टिक टैंक से बरामद हुई। इस निर्मम हत्या की साजिश का मास्टरमाइंड ठेकेदार सुरेश चंद्राकर है, जिसे पुलिस ने हैदराबाद से गिरफ्तार किया था।

अब तक की स्थिति: कौन-कौन किस स्थिति में

  • रिमांड पर:सुरेश चंद्राकर (मुख्य आरोपी, ठेकेदार)

    अग्रिम जमानत पर:

    बी. एल. ध्रुव – तत्कालीन EE

  • जी. एस. कोडोपी – उप अभियंता
    • वी. के. चौहान (सेवानिवृत्त EE)
    • एच. एन. पात्र – तत्कालीन EE
    • प्रमोद सिंह कंवर – SDO बीजापुर
    • संतोष दास – उप अभियंता, जगदलपुरआर. के. सिन्हा – SDOआज गिरफ्तार हुए:

    डी. आर. साहू (सेवानिवृत्त EE

  • सरकारी स्तर पर भी तेज हुई हलचल
  • बीजापुर एएसपी चंद्रकांत गोवर्ना ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए कहा कि हत्या की जांच में PWD अधिकारियों की संलिप्तता सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई है। इससे पहले डिप्टी सीएम और लोक निर्माण मंत्री अरुण साव के निर्देश पर FIR दर्ज हुई थी, जिसमें भ्रष्टाचार और मिलीभगत के पुख्ता आरोप हैं।

पत्रकारिता का साहस, व्यवस्था पर प्रहार

मुकेश चंद्राकर उन पत्रकारों में थे जो खतरों के बीच भी सच को सामने लाने से पीछे नहीं हटते थे। उन्होंने नक्सल प्रभावित क्षेत्र में रहकर जिस तरह से जमीनी हकीकत उजागर की, वह सत्ता और सिस्टम के लिए असहज थी — और शायद यही उनकी हत्या की सबसे बड़ी वजह बनी।

यह मामला एक बार फिर बताता है कि जब कलम सच्चाई के पक्ष में उठती है, तो उसके खिलाफ षड्यंत्र रचे जाते हैं — लेकिन सच को दबाया नहीं जा सकता।

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