छत्तीसगढ़बिलासपुर

सीपत के देवी बगलामुखी मां मन्ना दाई मंदिर में जगराता और नवरात्रि की धूम

बिलासपुर 25 मार्च 2026/ सीपत क्षेत्र के अंतर्गत वनांचल ग्राम सोंठी में स्थित बगलामुखी मां मन्नादाई मंदिर में चैत्र नवरात्रि के दौरान सार्वजनिक देवी भागवत का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें राष्ट्रीय कथावाचिका दीदी हेमलता शर्मा के द्वारा अपने संगीतमयी मधुर कण्ठ से हजारों की तादाद में उपस्थित श्रद्धालुओं की भीड़ को देवी महिमा की कथा सुनाई जा रही है। मंदिर में प्रतिदिन हजारों की तादात में भक्तों की भीड़ उमड रही है, जो की दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। सोंठी के बगलामुखी मां मन्नादाई मंदिर में समिति के अध्यक्ष एवं शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जेवरा के प्राचार्य रामेश्वर जायसवाल जो की अपनी पत्नी श्रीमती उषा जायसवाल के साथ मुख्य यजमान, के द्वारा मार्च को अपने जन्म दिवस के अवसर पर मृत्युपरान्त शरीर दान की घोषणा की गई।रामेश्वर जायसवाल ने अपने शरीर दान के संकल्प के बारे में बताया कि उनका यह कार्य लोगों में जन जागरूकता फैलाने का प्रयास है ताकि मृत्यु के बाद जरूरतमंदों को हम अपने आंख किडनी लीवर इत्यादि अंगों का दान कर सके।उनका यह कार्य मानवता की एक मिसाल है। घोषणा के साथ ही उनके द्वारा छत्तीसगढ़ आयुर्वेद ज्ञान संस्थान सिम्स से मंगाया गया फॉर्म की प्रविष्टि की गई। श्री रामेश्वर जायसवाल के द्वारा माता रानी के मंदिर के उत्थान हेतु दिन-रात एक करके प्रयास किया गया है, उन्होंने समस्त ग्राम वासियों को एकता के सूत्र में पिरोकर चंदा एवं श्रमदान के द्वारा विशाल मंदिर ज्योति कक्ष एवं मंच का निर्माण कराया है।सोंठी मंदिर की विशेष खासियत है कि यह पूरी तरह से पर्यावरण संरक्षण अनूकुल है। मंदिर में माता की बगिया बनाई गई है, जहां पर चंपा, गुड़हल, नारियल के साथ-साथ विविध प्रजाति के सैकड़ो औषधिय पौधे एवं पुष्प लगे हुए हैं।विदित हो कि 400 वर्ष पुरानी बगलामुखी मां मन्नादाई की प्रतिमा जो की सोंठी पहाड़ से लाई गई है, में पूर्व में बलिप्रथा जारी थी, वर्तमान मंदिर निर्माण के बाद श्री रामेश्वर जायसवाल ने ग्राम वासियों के एकत्र करके पशु बलि को बंद कराया।मंदिर में किसी भी प्रकार का नशा मदिरापान इत्यादि प्रतिबंधित है। कल संध्या अपने जन्म दिवस के अवसर पर जैसे ही श्री रामेश्वर जायसवाल द्वारा शरीर दान की घोषणा की गई पंडाल में मौजूद हजारों की तादाद में उपस्थित श्रद्धालुओं के आंख से आंसू बहने लगे। पूरा भागवत पंडाल अश्रुपूरित भावना से परिपूर्ण हो गया और लोगों ने श्री जायसवाल की जय जयकार लगाते हुए “आप अमर हो गए” का नारा लगाया।रामेश्वर जायसवाल जो की सामाजिक एवं धार्मिक कार्यों के लिए क्षेत्र में पहले ही विख्यात है, शरीर दान की घोषणा के बाद लोगों ने उसके साहसपूर्ण महान कार्य की भूरि भूरि प्रशंसा की है।

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!