छत्तीसगढ़दंतेवाड़ा

169 ग्राम पंचायतों का अल्टीमेटम: अधिकारों की अनदेखी पर जिला से राज्य स्तर तक आंदोलन की चेतावनी

दंतेवाड़ा 5 फरवरी 2026/ जिले की 169 ग्राम पंचायतों ने अपने संवैधानिक अधिकारों, बुनियादी विकास कार्यों और वित्तीय संसाधनों की लगातार उपेक्षा को लेकर शासन-प्रशासन के खिलाफ निर्णायक रुख अपनाया है। पंचायती प्रतिनिधियों ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि उनकी जायज़ और अनिवार्य मांगों पर तत्काल लिखित आदेश जारी नहीं किए गए, तो ग्राम सभाओं के निर्णयानुसार जिला स्तर से लेकर राज्य स्तर तक लोकतांत्रिक आंदोलन, धरना-प्रदर्शन एवं पंचायत स्तरीय कार्य बहिष्कार किया जाएगा।

यह चेतावनी पत्र विधायक, विधानसभा क्षेत्र दंतेवाड़ा के नाम प्रेषित किया गया है, जिसमें उल्लेख किया गया है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 244 (1) के अंतर्गत अनुसूचित क्षेत्र होने के बावजूद तथा पेसा अधिनियम 1996 के पूर्णतः लागू होने के बाद भी ग्राम सभाओं और पंचायतों के संवैधानिक अधिकारों की निरंतर अवहेलना की जा रही है, जो सीधे तौर पर लोकतांत्रिक व्यवस्था पर प्रहार है।

पत्र में कहा गया है कि जिले की 169 ग्राम पंचायतों में सड़क, जल, सिंचाई, कृषि सहायता, निर्माण कार्यों और मूलभूत संसाधनों का घोर अभाव है। शासन-प्रशासन की उदासीनता के चलते ग्रामीण जनता में भारी असंतोष व्याप्त है और स्थिति अब धैर्य की सीमा से बाहर जा चुकी है।

प्रमुख मांगें —सभी 169 ग्राम पंचायतों को तत्काल 20 से 30 लाख रुपये तक के निर्माण कार्य स्वीकृत किए जाएं।

दंतेवाड़ा जिले में वर्ष 2021-22 में घोषित मेडिकल कॉलेज के लिए स्वीकृत राशि के उपयोग का सार्वजनिक खुलासा किया जाए।

सभी पहुंचविहीन वार्डों में मिट्टी, मुरुम एवं सड़क निर्माण के अभिलेख तैयार कर कार्य कराया जाए।

किसानों को बोर खनन एवं तार फेंसिंग की सुविधा दी जाए तथा अंश राशि अधिकतम 10 प्रतिशत ही रखी जाए।

प्रत्येक ग्राम पंचायत में सिंचाई एवं जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए बड़े जलाशयों, डबरी व तालाबों को स्वीकृति दी जाए।

जिले के सभी पुराने डेमों और तालाबों का तत्काल जीर्णोद्धार किया जाए।

ग्राम पंचायतों को देय मूलभूत राशि पूर्ण रूप से एवं बिना कटौती के प्रदान की जाए।

सरपंचों का मानदेय 20,000 रुपये तथा वार्ड पंचों का मानदेय 5,000 रुपये प्रतिमाह सुनिश्चित किया जाए।
पत्र के अंत में पंचायत प्रतिनिधियों ने दो टूक कहा है कि यदि उपरोक्त मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो उत्पन्न होने वाली किसी भी प्रशासनिक, सामाजिक या कानून-व्यवस्था संबंधी स्थिति की पूर्ण जिम्मेदारी शासन एवं प्रशासन की होगी।

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