छत्तीसगढ़

बांग्लादेश को 10 हजार एकड़ ज्यादा जमीन दी:इंदिरा-मनमोहन बिल लाए तो BJP ने विरोध किया; 68 साल पुराना विवाद कैसे खत्म हुआ

पिछले 10 सालों में प्रधानमंत्री मोदी के 8 बड़े फैसले, आज दूसरे एपिसोड में बांग्लादेश को 10 हजार एकड़ ज्यादा जमीन देने की कहानी…

16वीं सदी की बात है। कूचबिहार के महाराजा नर नारायण और रंगपुर के फौजदार शतरंज खेलते थे। शतरंज की बाजी में दोनों अपने-अपने गांवों को दांव पर लगाते थे। यानी हर बाजी में कोई न कोई एक गांव जरूर जीतता था। इस तरह कूचबिहार के राजा ने रंगपुर के 111 गांव और रंगपुर के राजा ने कूचबिहार के 51 गांव जीत लिए। बाद में इन गांवों पर शासन को लेकर दोनों रियासतों के बीच जंग भी हुई।

1713 में इन गांवों को लेकर दोनों रियासतों में समझौता हुआ। समझौते के तहत रंगपुर के 111 गांवों पर कूचबिहार का राज और कूचबिहार के 51 गांवों पर रंगपुर का शासन हो गया। सालों तक यह समझौता लागू रहा। 1947 में भारत-पाकिस्तान का बंटवारा हुआ। रंगपुर पाकिस्तान का हिस्सा बना और कूचबिहार भारत का, पर इन गांवों को लेकर कोई फैसला नहीं लिया गया।

कूचबिहार के 111 गांव, जो रंगपुर में थे, वो पाकिस्तान में फंस गए और रंगपुर के 51 गांव भारत में रह गए। यानी भारत में पाकिस्तान के गांव और पाकिस्तान में भारत के गांव। किसी भी देश ने इन गांवों में रहने वालों को नागरिकता नहीं दी। 162 गांवों के करीब 50 हजार लोग बिना देश के हो गए।

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