Close Menu
The Bharat TimesThe Bharat Times
  • होम
  • देश दुनिया
  • छत्तीसगढ़
    • कोरबा
    • अंबिकापुर
    • कोंडागाँव
    • जांजगीर चांपा
    • दुर्ग
    • जगदलपुर
    • धमतरी
    • दंतेवाड़ा
    • बलौदाबाजार
    • भटगांव
    • महासमुंद
    • रायगढ़
    • राजनांदगांव
    • रायपुर
    • देश दुनिया
    • सारंगढ़ बिलाईगढ़
  • मध्य प्रदेश
    • डिंडोरी
      • समनापुर
      • सरसीवा
      • सलिहा
  • राजनीति
  • मेरा शहर

Subscribe to Updates

Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

What's Hot

पति-पत्नी के बीच हुआ विवाद; पत्नी ने काट दिया पति का प्राइवेट पार्ट

24/05/2026 - 11:40 AM

अवैध गांजा के साथ रकम सहित आरोपी महिला पकड़ी गई

24/05/2026 - 11:37 AM

शादी का झांसा देकर किया दुष्कर्म; पहुंचा जेल की सलाखों में

24/05/2026 - 11:35 AM
Facebook X (Twitter) Instagram
Sunday, May 24
Facebook X (Twitter) Instagram
The Bharat TimesThe Bharat Times
Demo
  • होम
  • देश दुनिया
  • छत्तीसगढ़
    • कोरबा
    • अंबिकापुर
    • कोंडागाँव
    • जांजगीर चांपा
    • दुर्ग
    • जगदलपुर
    • धमतरी
    • दंतेवाड़ा
    • बलौदाबाजार
    • भटगांव
    • महासमुंद
    • रायगढ़
    • राजनांदगांव
    • रायपुर
    • देश दुनिया
    • सारंगढ़ बिलाईगढ़
  • मध्य प्रदेश
    • डिंडोरी
      • समनापुर
      • सरसीवा
      • सलिहा
  • राजनीति
  • मेरा शहर
  • होम
  • देश दुनिया
  • छत्तीसगढ़
  • मध्य प्रदेश
  • राजनीति
  • मेरा शहर
The Bharat TimesThe Bharat Times
Home»छत्तीसगढ़»पुस्तक समीक्षा -अनुपम जीवन संस्मरण है”बोलती परछाइयाँ”-डॉ राघवेंद्र दुबे
छत्तीसगढ़ बिलासपुर

पुस्तक समीक्षा -अनुपम जीवन संस्मरण है”बोलती परछाइयाँ”-डॉ राघवेंद्र दुबे

HD MAHANTBy HD MAHANT05/04/2026 - 6:18 AM
Facebook Twitter WhatsApp Copy Link
Share
Facebook Twitter WhatsApp Copy Link

बिलासपुर । पावन छत्तीसगढ़ महतारी के आँचल में बसे वीरांगना बिलासा की नगरी बिलासपुर की माटी की ऐसी विशिष्टता है कि यहाँ समाज साहित्य कला सेवा के लिए समर्पित अनेक विभूतियों ने जन्म लिया और स्वयं के साथ बिलासपुर ही नहीं बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित किया है । इसके अंचल में जो भी आया वह अरपा मैया के प्रताप और यहाँ की पावन भूमि की महिमा ने उसे संवेदनशीलता से परिपूर्ण करके यहीं का बना दिया फिर इसके आँचल में जिन्होंने जन्म लिया,पले बढ़े उनके तो रग रग में इसका मया दुलार प्रवाहित होते रहता है । यहाँ की ही महिमा है कि कुछ प्रतिभायें साहित्य के साथ साथ पत्रकारिता के क्षेत्र में भी बिलासपुर को गौरवान्वित करते रहे हैं ।इसी क्रम में एक नाम है—वरिष्ठ साहित्यकार एवं पत्रकार आदरणीय श्री सुरेश सिंह बैस जी का जो इतिहास एवं हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर की दोहरी उपाधि के साथ जहाँ एल एल बी किये वहीं बीजेएमसी पत्रकारिता की परीक्षा में मैरिट में उत्तीर्ण होकर अंचल को गौरवान्वित किया है और साहित्य समाज की सेवा में निर्भीकता के साथ समर्पित होकर सेवा कर रहे हैं ।
इनकी अब तक प्रकाशित कृतियाँ– गुनगुनाते शब्द भाग 2 (कविताएं एवं संस्मरण रिपोर्ट संकलन), कवियों का संसार (कविता संकलन), कलम की महफिल (कविता संकलन), संसार मोती (काव्य संकलन), तथा बोलती परछाइयां (जीवन के विभिन्न पहलुओं को उकेरती एकल पुस्तक) के साथ शीघ्र प्रकाश्य” लोक धर्म संस्कृति’ पर आधारित पुस्तक एवं विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में लेख एवं कविताएं बहुत ही चर्चित और प्रशंसित रहे हैं ।
ये अनेक साहित्यिक एवं सामाजिक संस्थाओं एवं समितियां से अभिन्न रूप से जुड़े हुए हैं अत इन्हें राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय अनेक पुरस्कार एवं सम्मानों से सम्मानित किया गया है ।
स्पष्टवादिता , निर्भीकता और समाज के प्रति गहरी संवेदनशीलता यही गुण है जो सुरेश सिंह बैस के व्यक्तित्व और लेखनी दोनों में स्पष्ट दिखाई देते हैं । उनका स्वभाव जितना पारदर्शी है उतनी ही उनकी कलम की सच्चाई भी । वे जो सोचते हैं जो देखते हैं वही लिखते हैं और जो लिखते हैं वही जीते हैं । यही ईमानदारी उन्हें दूसरों से अलग पहचान दिलाती है ।
बिलासपुर के शांत वातावरण में रहकर भी वे वर्षों से पत्रकारिता और समाज सेवा के क्षेत्र में अपनी अमिट छाप छोड़ रहे हैं । फिलहाल वे रायपुर और बिलासपुर से प्रकाशित होने वाले दैनिक अखबार छत्तीसगढ़ वॉच में नियमित रूप से फीचर कालम और समाचार लेखन में सक्रिय हैं, साथ ही दिल्ली, लखनऊ, अलीगढ़, प्रयागराज सहित कई शहरों के अखबारों में भी उनके लेख निरंतर प्रकाशित हो रहे हैं । उनकी लेखनी सबसे बड़ी विशेषता है निष्पक्षता और निर्भीकता । बिना लाग लपेट के सटीक बातें कहना उनका स्वभाव है । यही कारण है कि उनके लेख पाठकों को सीधे दिल से जोड़ते हैं ।
सुरेश सिंह बैस की पत्रकारिता यात्रा वर्ष 1986 से शुरू हुई । प्रारंभ में उन्होंने दैनिक बिलासपुर टाइम्स, दैनिक श्रमस्वर, दैनिक स्वदेश ,दैनिक सांध्य समीक्षक और दैनिक भास्कर जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में कार्य किया । नागपुर से प्रकाशित अंग्रेजी दैनिक हितवाद में उप संपादक और संवाददाता के रूप में भी उन्होंने अपनी सेवाएं दी बाद में वे पाक्षिक छत्तीसगढ़ मेल में कार्यकारी मुख्य संपादक रहे और मासिक पत्रिका छत्तीसगढ़ की माटी में लंबे समय तक लेखन किया । पत्रकारिता में उनके योगदान को अनेक संस्थाओं और विश्वविद्यालयों द्वारा सम्मानित किया गया है जिनमें साहित्यकार युवा परिषद अंबिकापुर ,मध्य प्रदेश लेखक संघ, रोटरी क्लब, जेल प्रशासन, गुरु घसीदास विश्वविद्यालय और पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय शामिल हैं ।
पत्रकारिता के समानांतर वे समाज सेवा के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं । पिछले 10 वर्षों से विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, जन सहयोग और सामाजिक न्याय के कार्यों में योगदान दे रहे हैं । वे अखिल वैश्विक क्षत्रिय महासभा ट्रस्ट दिल्ली में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में कार्यरत थे और संगठन के माध्यम से अनेक उत्कृष्ट सामाजिक कार्य किए हैं साथ ही राष्ट्रीय साहित्य क्रांति प्रोत्साहन परिषद सिंगरौली मध्य प्रदेश के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद पर रहते हुए साहित्यिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है ।
विधि के क्षेत्र में उन्होंने किरण परियोजना के माध्यम से जेल में बंद कैदियों के पुनर्वास हेतु अधिवक्ता व काउंसलर के रूप में उल्लेखनीय योगदान दिया । वे सामाजिक संस्था हितार्थ एवं सेवा के फाउंडर मेंबर हैं और कोरोना काल में भी लोगों की शिक्षा स्वास्थ्य और विवाह जैसी मूलभूत जरूरत के लिए लगातार सहयोग करते रहे । उनके प्रयासों से तीन निर्धन कन्याओं के विवाह सामाजिक सहयोग से संपन्न हुआ । ये उनकी संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण के उदाहरण हैं ।
पत्रकारिता और समाज सेवा दोनों ही सुरेश सिंह बैस के जीवन के दो अभिन्न पक्ष हैं । उन्होंने लेखन को अपनी साधना बनाया और समाज सेवा को अपना धर्म । यही कारण है कि वे आज भी विनम्रता से कहते हैं कि” समाज सेवा को उपलब्धि नहीं यह जीवन जीने का तरीका है । “
इन्होंने अपनी अनुपम कृति “बोलती परछाइयां”में जीवन के अनमोल संस्मरणों के संग्रह में 18 शीर्षकों के माध्यम से अपने जीवन की अनुभूतियों को बहुत ही सहज,सरल सुंदर एवं प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त किया है, जो मनोरम और प्रभावशाली तो है ही पाठकों के मन को पढ़ने के लिए और बांधे रहने के लिए सक्षम हैं ।
अपने मंतव्य को स्पष्ट करते हुए इस कृति की भूमिका में उन्होंने लिखा है कि “बोलती परछाइयां मेरे जीवन की उन झलकियों का संकलन है जो कभी धुंधली यादों के रूप में मन के किसी कोने में चुपचाप बैठी थी । ये वे परछाइयां हैं जिन्होंने मेरे जीवन में कभी प्रेम बनाकर दस्तक दी, कभी स्नेह बनकर लिपटी, तो कभी डर और रहस्य बनकर रातों की नींदे चुरा ली । ये परछाइयां केवल दृश्य नहीं अनुभव हैं जिनमें प्रेम की मिठास है, स्नेह की आत्मीयता है, रोमांस की कोमलता है, डर की सिहरन है और भूत प्रेतों के रहस्यमय संसार की झलक भी है । हर प्रसंग के पीछे कोई ना कोई भावना है ,एक चाहत ,एक डर ,एक तलाश या फिर कोई अधूरी कहानी , जो पाठकों से संवाद करना चाहती है । मेरी यह कोशिश उन सभी पाठकों के लिए है जो जीवन के भावनात्मक रहस्यमय और संवेदनशील पक्षों को पढ़ना, महसूस करना और आत्मसात करना पसंद करते हैं । आशा है” बोलती परछाइयां “आपके हृदय को स्पर्श करेंगी और कुछ देर के लिए आपको आपके ही भीतर के संसार से जोड़ देंगी । इस संग्रह में प्रेम की कोमलता है, स्नेह की गर्माहट है, रोमांस की नमी है, डर की सिहरन है और भूत प्रेतों की अनकही कहानियां हैं, जो अक्सर हमारे अनुभवों का हिस्सा बनकर हमें सोचने पर मजबूर कर देती हैं । उन्होंने आगे लिखा है कि “इस पुस्तक में संकलित संस्मरण केवल घटनाएं नहीं है यह मेरे जीवन के वे अनुभव है जो समय के साथ बोलने लगे । ये वो क्षण हैं जब किसी की मुस्कानों ने दिल छू लिया ,किसी स्पर्श ने रोमांस को जन्म दिया और कभी अनदेखी परछाइयां ने भय का आभास कराया । मैंने कोशिश की है कि हर पाठक इनमें अपने जीवन की कोई कहानी, कोई अनुभव ,कोई छाया देख सके क्योंकि हम सबके जीवन में कुछ ना कुछ ऐसा जरूर घटा होता है जो शब्दों में बांधना मुश्किल,पर महसूस करना बेहद आसान होता है । आगे उन्होंने लिखा है कि—“परछाइयां बेशक चुप रहती हैं
पर जब वह बोलने लगे तभी
जीवन की सबसे सच्ची
कहानी जन्म लेती हैं ।“
इस तरह वरिष्ठ साहित्यकार एवं पत्रकार श्री सुरेश सिंह बैस ने “बोलती परछाइयां” में अपने जीवन में घटित घटनाओं के साथ उल्लेखनीय संस्मरणों को भी अभिव्यक्त करने में सफल हुए हैं । इस अनुपम कृति के प्रकाशन के लिए मैं उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना करता हूं तथा यह भी कामना करता हूं कि वह इसी तरह सतत समाज एवं साहित्य सेवा में संलग्न रहें । पुनः हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाओं के साथ—
— डॉ राघवेंद्र कुमार दुबे बिलासपुर

HD MAHANT
Share. Facebook Twitter WhatsApp Copy Link

Related Posts

पति-पत्नी के बीच हुआ विवाद; पत्नी ने काट दिया पति का प्राइवेट पार्ट

24/05/2026 - 11:40 AM

अवैध गांजा के साथ रकम सहित आरोपी महिला पकड़ी गई

24/05/2026 - 11:37 AM

शादी का झांसा देकर किया दुष्कर्म; पहुंचा जेल की सलाखों में

24/05/2026 - 11:35 AM

अवैध खनन और अवैध बोरिंग पर कलेक्टर ने कसी लगाम; पुलिस कार्रवाई में कई वाहन किए गए जप्त

24/05/2026 - 11:33 AM

नाटक: “मोबाइल म फंसे दुनिया”

24/05/2026 - 11:30 AM

मरवाही–पेंड्रा के जंगलों में घूम रहे रहस्यमयी दुर्लभ सफेद भालू का आतंक

23/05/2026 - 10:17 AM

Comments are closed.

पोस्ट

पति-पत्नी के बीच हुआ विवाद; पत्नी ने काट दिया पति का प्राइवेट पार्ट

24/05/2026 - 11:40 AM

अवैध गांजा के साथ रकम सहित आरोपी महिला पकड़ी गई

24/05/2026 - 11:37 AM

शादी का झांसा देकर किया दुष्कर्म; पहुंचा जेल की सलाखों में

24/05/2026 - 11:35 AM

अवैध खनन और अवैध बोरिंग पर कलेक्टर ने कसी लगाम; पुलिस कार्रवाई में कई वाहन किए गए जप्त

24/05/2026 - 11:33 AM

एच. डी. महंत
मुख्य संपादक

Official Address :
Shop No. 2, Ground Floor, Gokul Apartment, Near Shyam Nagar Chowk, Shyam Nagar, Telibandha Raipur, Chhattisgarh – 492013

Facebook X (Twitter) YouTube WhatsApp
UDYAM-CG-33-0000933
May 2026
M T W T F S S
 123
45678910
11121314151617
18192021222324
25262728293031
« Apr    
© 2026 The Bharat Times. Designed by Nimble Technology.

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.