बिलासपुर। जिला आयुर्वेद चिकित्सालय में फर्जी नियुक्ति का मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। एक शिकायत के आधार पर कर्मचारी की नियुक्ति के दौरान प्रस्तुत शैक्षणिक प्रमाण पत्रों की जांच जारी है। आरोप है कि संबंधित कर्मचारी ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी हासिल की।जांच में सामने आया है कि कर्मचारी महावीर साहू के पास एक ही कक्षा के दो अलग-अलग प्रमाण पत्र हैं। इनमें एक नियमित अंकसूची है, जबकि दूसरा समतुल्यता प्रमाण पत्र है, जो नियमित प्रमाण पत्र जारी होने से एक वर्ष पहले का बताया जा रहा है। यह स्थिति सेवा नियमों के विपरीत मानी जा रही है। सूत्रों के अनुसार, जांजगीर और सक्ती के जिला शिक्षा अधिकारियों (डीईओ) से जांच प्रतिवेदन प्राप्त किए गए हैं, वहीं हसौद स्थित स्कूल से भी रिपोर्ट आयुर्वेद विभाग को सौंपी गई है। इन रिपोटों में कई प्रकार के विरोधाभास सामने आए हैं, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि जिस अनुक्रमांक के आधार पर रोल नंबर जारी हुआ, वह प्रमाण पत्र में अंकित अनुक्रमांक से मेल नहीं खाता। ऐसे में यह संदेह गहराया है कि या तो अंकसूची फर्जी है या फिर संबंधित स्कूल द्वारा दी गई जांच रिपोर्ट में त्रुटि है।मामले को लेकर संयुक्त संचालक शिक्षा, संभाग बिलासपुर को पत्र भेजा गया है, जिसमें अंतिम जांच रिपोर्ट के आधार पर उचित कार्रवाई की मांग की गई है। अब निगाहें संयुक्त संचालक की जांच पर टिकी हैं, जिससे पूरे मामले की सच्चाई सामने आने की उम्मीदें हैं।


