सुरेश सिंह बैस
बिलासपुर 8, मई 2026/ शहर में क्रिकेट सट्टे का कारोबार अब स्थानीय सीमाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह अंतरराज्यीय और हाईटेक नेटवर्क का रूप ले चुका है। हाल ही में पुलिस द्वारा पकड़े गए छोटे सटोरियों से पूछताछ के बाद कई बड़े नामों का खुलासा हुआ है, जिनके तार दूसरे राज्यों में बैठे कथित ‘खाईवालों’ से जुड़े बताए जा रहे हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, मोबाइल एप और डिजिटल ट्रांजेक्शन के माध्यम से करोड़ों रुपये का सट्टा कारोबार संचालित किया जा रहा है। इस नेटवर्क में छोटे एजेंटों से लेकर बड़े खाईवालों तक की एक पूरी श्रृंखला सक्रिय है, जो कमीशन आधारित व्यवस्था पर काम करती है।
छोटे सटोरियों के जरिए चलता है पूरा नेटवर्क
सूत्रों के अनुसार, छोटे एजेंटों को 12 से 15 प्रतिशत तक कमीशन देकर उनसे नए ग्राहक जोड़ने का काम कराया जाता है। इन्हीं एजेंटों के माध्यम से आम लोगों को तेजी से पैसा कमाने का लालच देकर सट्टे के जाल में फंसाया जाता है। बताया जा रहा है कि एक रुपये के बदले कई गुना रकम मिलने का प्रलोभन देकर युवाओं और मध्यम वर्ग को इस अवैध कारोबार से जोड़ा जा रहा है।
पर्दे के पीछे बैठे हैं बड़े खिलाड़ी
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि असली संचालक सीधे सामने नहीं आते। वे दूसरे राज्यों में बैठकर मोबाइल, इंटरनेट कॉलिंग और ऑनलाइन आईडी के माध्यम से पूरे नेटवर्क को नियंत्रित करते हैं। स्थानीय स्तर पर काम करने वाले एजेंट केवल रकम इकट्ठा करने और आईडी उपलब्ध कराने का काम करते हैं, जबकि असली लेन-देन और हिसाब-किताब बड़े खाईवालों के हाथ में रहता है।
कई चर्चित नाम जांच के घेरे में
सूत्र बताते हैं कि जांच के दौरान कुछ चर्चित नाम भी सामने आए हैं, जिनकी गतिविधियों पर पुलिस और साइबर टीम लगातार नजर बनाए हुए है। पुलिस द्वारा वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों, मोबाइल लोकेशन और डिजिटल रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। सिविल लाइन और कोनी क्षेत्र सहित शहर के कई हिस्सों में सक्रिय नेटवर्क के संबंध में तकनीकी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
दूसरे राज्यों तक पहुंच सकती है कार्रवाई
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, नेटवर्क का संचालन छत्तीसगढ़ के बाहर से होने के संकेत मिले हैं। ऐसे में जांच टीम को अन्य राज्यों में भी भेजे जाने की तैयारी है। कई संदिग्ध लगातार लोकेशन बदल रहे हैं, जिससे जांच और चुनौतीपूर्ण हो गई है।
युवाओं को बना रहा शिकार
विशेषज्ञों का मानना है कि ऑनलाइन सट्टा केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि सामाजिक खतरा भी बनता जा रहा है। तेजी से पैसा कमाने की चाह में बड़ी संख्या में युवा इसकी गिरफ्त में आ रहे हैं, जिससे परिवार आर्थिक और मानसिक संकट का सामना कर रहे हैं।
पुलिस की सख्ती जारी
पुलिस का कहना है कि सट्टे के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए तकनीकी और साइबर विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। छोटे एजेंटों के साथ-साथ अब उन बड़े चेहरों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है, जो पर्दे के पीछे रहकर इस अवैध कारोबार को संचालित कर रहे हैं।
##- सट्टे के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। कुछ बड़े खाईवालों के नाम सामने आए हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। उनके नेटवर्क को तोड़ने के लिए तकनीकी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। जरूरत पड़ने पर अन्य राज्यों में भी टीम भेजी जाएगी। किसी भी हालत में सट्टे के नेटवर्क को पनपने नहीं दिया जायेगा।
– निमितेश सिंह सीएसपी,
– सिविल लाइन बिलासपुर






