सुरेश सिंह बैस “शाश्वत”
प्रत्येक वर्ष 8 मई को संपूर्ण विश्व में ‘अंतरराष्ट्रीय रेडक्रॉस दिवस’ मनाया जाता है। यह दिन मानवता के मसीहा और रेडक्रॉस के संस्थापक हेनरी ड्यूमेंट के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। हेनरी ड्यूमेंट के अथक प्रयासों के परिणामस्वरूप ही 1864 के जेनेवा समझौते के माध्यम से ‘अंतरराष्ट्रीय रेडक्रॉस मूवमेंट’ की नींव रखी गई थी। शांति के प्रति उनके इसी विजन के लिए उन्हें विश्व का प्रथम नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान किया गया।
रेडक्रॉस मूलतः एक स्वयंसेवी संस्था है, जो प्राकृतिक या मानवीय आपदाओं के समय पीड़ितों को राहत पहुँचाने में अग्रणी भूमिका निभाती है। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में रेडक्रॉस का कार्यक्षेत्र केवल युद्ध के दौरान घायल सैनिकों या युद्धबंदियों की सेवा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका दायरा अत्यंत व्यापक हो चुका है।
कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के दौर में इस संस्था ने जिस प्रकार जनहानि को कम करने और आर्थिक-सामाजिक सहयोग प्रदान करने में अपनी भूमिका निभाई, उससे इसकी महत्ता और उत्तरदायित्व दोनों में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी की बात करें तो इसकी स्थापना 1920 में ‘भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी अधिनियम’ के तहत की गई थी और 1929 में इसे अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त हुई।
आज का दौर अत्यंत जटिल है। पिछले तीन वर्षों से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा है। वहीं, मध्य-पूर्व में इजरायल, फिलिस्तीन, अमेरिका ईरान और लेबनान के बीच व अशांत पाकिस्तान के अंदरूनी हालात, अफगानिस्तान से हो रहे संघर्ष ने दुनिया को विनाश के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। इन युद्धों के दुष्परिणाम केवल सीमा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरी दुनिया महंगाई, संसाधनों के अभाव और बिगड़ते कूटनीतिक संबंधों के रूप में इसे झेल रही है।
भारत भी इन वैश्विक संकटों और सीमा पार आतंकवाद से अछूता नहीं है। एक ओर जहाँ पाकिस्तान जैसा पड़ोसी देश अपनी जर्जर अर्थव्यवस्था और आंतरिक विद्रोह की स्थिति से जूझ रहा है, वहीं वैश्विक स्तर पर शांति बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है। ऐसे कठिन समय में रेडक्रॉस के समर्पित स्वयंसेवक ‘आशा की किरण’ बनकर उभरते हैं।
रक्तदान और सेवा का संकल्प रेडक्रॉस की पहचान केवल आपदा प्रबंधन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि रक्तदान के क्षेत्र में इसका योगदान अतुलनीय है। यह संस्था:स्वयंसेवी शिविरों के माध्यम से भारी मात्रा में रक्त एकत्र करती है।
जरूरतमंदों को समय पर रक्त उपलब्ध कराकर अनमोल जीवन बचाती है।
आमजन को रक्तदान के प्रति जागरूक और प्रेरित करती है।
भारत में 700 से अधिक शाखाओं के नेटवर्क के साथ यह संस्था स्वास्थ्य सेवाओं और सामुदायिक देखभाल को बढ़ावा दे रही है।
वैश्वीकरण, परमाणु हथियारों की होड़, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं के इस दौर में रेडक्रॉस जैसी संस्था की प्रासंगिकता और अधिक बढ़ गई है। जब दुनिया युद्ध और विनाश की आशंकाओं से घिरी हो, तब रेडक्रॉस एक विश्वसनीय मित्र की तरह मदद का हाथ बढ़ाती है। आइए, इस दिवस पर हम भी इस महान संस्था के उद्देश्यों को आत्मसात करें और मानवता की सेवा में अपना यथासंभव योगदान देने का संकल्प लें।
सुरेश सिंह बैस “शाश्वत”






