Close Menu
The Bharat TimesThe Bharat Times
  • होम
  • देश दुनिया
  • छत्तीसगढ़
    • कोरबा
    • अंबिकापुर
    • कोंडागाँव
    • जांजगीर चांपा
    • दुर्ग
    • जगदलपुर
    • धमतरी
    • दंतेवाड़ा
    • बलौदाबाजार
    • भटगांव
    • महासमुंद
    • रायगढ़
    • राजनांदगांव
    • रायपुर
    • देश दुनिया
    • सारंगढ़ बिलाईगढ़
  • मध्य प्रदेश
    • डिंडोरी
      • समनापुर
      • सरसीवा
      • सलिहा
  • राजनीति
  • मेरा शहर

Subscribe to Updates

Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

What's Hot

चंद्रमा की मिट्टी से ऑक्सीजन प्राप्त करने की अवधारणा क्रांतिकारी

29/05/2026 - 11:01 AM

“विश्व पर्यावरण दिवस अभियान-2026” के अंतर्गत रेलवे मंडल में विभिन्न गतिविधियों का आयोजन

29/05/2026 - 10:55 AM

खनिज विभाग ने बिना लाइसेंस के कोल डिपो से 1500 टन कोयला किया जब्त

29/05/2026 - 10:52 AM
Facebook X (Twitter) Instagram
Friday, May 29
Facebook X (Twitter) Instagram
The Bharat TimesThe Bharat Times
Demo
  • होम
  • देश दुनिया
  • छत्तीसगढ़
    • कोरबा
    • अंबिकापुर
    • कोंडागाँव
    • जांजगीर चांपा
    • दुर्ग
    • जगदलपुर
    • धमतरी
    • दंतेवाड़ा
    • बलौदाबाजार
    • भटगांव
    • महासमुंद
    • रायगढ़
    • राजनांदगांव
    • रायपुर
    • देश दुनिया
    • सारंगढ़ बिलाईगढ़
  • मध्य प्रदेश
    • डिंडोरी
      • समनापुर
      • सरसीवा
      • सलिहा
  • राजनीति
  • मेरा शहर
  • होम
  • देश दुनिया
  • छत्तीसगढ़
  • मध्य प्रदेश
  • राजनीति
  • मेरा शहर
The Bharat TimesThe Bharat Times
Home»छत्तीसगढ़»चंद्रमा की मिट्टी से ऑक्सीजन प्राप्त करने की अवधारणा क्रांतिकारी
छत्तीसगढ़ बिलासपुर

चंद्रमा की मिट्टी से ऑक्सीजन प्राप्त करने की अवधारणा क्रांतिकारी

HD MAHANTBy HD MAHANT29/05/2026 - 11:01 AM
Facebook Twitter WhatsApp Copy Link
Share
Facebook Twitter WhatsApp Copy Link

क्या यही बनेगा चंद्र बस्तियों का आधार?

सुरेश सिंह बैस “शाश्वत”
बिलासपुर, छत्तीसगढ़

मानव सभ्यता अब केवल पृथ्वी तक सीमित रहने की कल्पना नहीं कर रही, बल्कि वह अंतरिक्ष में स्थायी उपस्थिति स्थापित करने की दिशा में तेजी से बढ़ रही है। इसी क्रम में चंद्रमा मानव बस्तियों के लिए सबसे उपयुक्त और निकटतम लक्ष्य माना जा रहा है। परंतु चंद्रमा पर स्थायी निवास स्थापित करने की सबसे बड़ी चुनौती है- “ऑक्सीजन”।बिना ऑक्सीजन के न तो मनुष्य जीवित रह सकता है और न ही रॉकेट ईंधन तैयार किया जा सकता है। यहीं से वैज्ञानिकों की दृष्टि चंद्रमा की मिट्टी अर्थात “लूनर रेजोलिथ” पर गई। वैज्ञानिकों ने पाया कि चंद्रमा की मिट्टी में विभिन्न धातुओं के ऑक्साइड प्रचुर मात्रा में मौजूद हैं। यदि इन ऑक्साइडों से ऑक्सीजन को अलग कर लिया जाए, तो चंद्रमा पर मानव बस्ती बसाने का सपना काफी हद तक साकार हो सकता है। प्रश्न यह है कि यह तकनीक कितनी सफल हो सकती है, और क्या वास्तव में यह व्यावहारिक एवं सुरक्षित विकल्प सिद्ध होगा?

चंद्रमा की मिट्टी में ऑक्सीजन कहाँ छिपी है?

चंद्रमा का वातावरण लगभग न के बराबर है, इसलिए वहाँ पृथ्वी जैसी स्वतंत्र ऑक्सीजन नहीं मिलती। किंतु चंद्र मिट्टी में सिलिकॉन, आयरन, मैग्नीशियम, एल्यूमिनियम आदि धातुएँ ऑक्साइड के रूप में विद्यमान हैं। वैज्ञानिक अनुमान लगाते हैं कि चंद्रमा की मिट्टी का लगभग 40-45 प्रतिशत भाग ऑक्सीजन तत्व से बना है, किंतु वह रासायनिक रूप से बंधा हुआ है।

उदाहरण के लिए—

सिलिका (SiO₂)
आयरन ऑक्साइड (FeO)
एल्यूमिनियम ऑक्साइड (Al₂O₃) इन यौगिकों को तोड़कर शुद्ध ऑक्सीजन निकाली जा सकती है।

ऑक्सीजन निकालने की प्रमुख वैज्ञानिक विधियाँ
1. मोल्टन साल्ट इलेक्ट्रोलिसिस (Molten Salt Electrolysis)

यह सबसे चर्चित और संभावनाशील तकनीक मानी जा रही है। इसमें चंद्र मिट्टी को अत्यधिक तापमान पर पिघलाकर उसमें विद्युत प्रवाहित की जाती है। इस प्रक्रिया से ऑक्साइड टूटते हैं और ऑक्सीजन अलग हो जाती है। वही बची मिट्टी शीशे की तरह कठोर हो जाती है। जिससे कई अन्य धातुएं भी प्राप्त की जा सकती हैं।

सरल रूप में प्रक्रिया:

इस तकनीक का लाभ यह है कि इससे ऑक्सीजन के साथ-साथ उपयोगी धातुएँ भी प्राप्त होती हैं, जिनसे चंद्रमा पर निर्माण कार्य किया जा सकता है।
2. हाइड्रोजन रिडक्शन तकनीक

इस विधि में हाइड्रोजन गैस को चंद्र मिट्टी में उपस्थित ऑक्साइडों के साथ अभिक्रिया कराई जाती है, जिससे जल बनता है। फिर उस जल का विद्युत अपघटन करके ऑक्सीजन प्राप्त की जाती है।

मुख्य अभिक्रिया: इसके बाद
इस तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह है कि हाइड्रोजन पुनः प्रयोग में लाई जा सकती है।

3. सौर ऊर्जा आधारित तापीय अपघटन
चंद्रमा पर वायुमंडल न होने से सूर्य का प्रकाश अत्यंत तीव्र रूप में पहुँचता है। वैज्ञानिक विशाल दर्पणों द्वारा सूर्य की ऊर्जा केंद्रित कर अत्यधिक तापमान उत्पन्न करने की योजना बना रहे हैं, जिससे ऑक्साइड टूट सकें। यह ऊर्जा की दृष्टि से टिकाऊ विकल्प हो सकता है क्योंकि चंद्रमा पर सौर ऊर्जा प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है।

मानव बस्तियों के लिए यह तकनीक कितनी महत्वपूर्ण होगी?

(क) जीवन रक्षा का आधार
एक मनुष्य को प्रतिदिन लगभग 550 लीटर ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। यदि चंद्रमा पर रहने वाले अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी से लगातार ऑक्सीजन भेजनी पड़े, तो इसकी लागत अत्यधिक होगी। स्थानीय स्तर पर ऑक्सीजन उत्पादन “स्वावलंबी चंद्र बस्ती” की दिशा में पहला कदम होगा।
(ख) रॉकेट ईंधन निर्माण
रॉकेट प्रणोदन में तरल ऑक्सीजन अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यदि चंद्रमा पर ही ऑक्सीजन तैयार होने लगे, तो अंतरिक्ष यान को पृथ्वी से पूरा ईंधन ले जाने की आवश्यकता नहीं होगी।
इससे- अंतरिक्ष मिशनों की लागत घटेगी, मंगल मिशन सरल होंगे, चंद्रमा अंतरिक्ष “फ्यूल स्टेशन” बन सकता है।
(ग) निर्माण कार्य में उपयोग
ऑक्सीजन निष्कर्षण के बाद बची धातुएँ – लोहे, एल्यूमिनियम, टाइटेनियम के रूप में उपयोगी हो सकती हैं। इससे चंद्रमा पर आवास, उपकरण और सौर संयंत्र बनाए जा सकते हैं।

क्या यह तकनीक वास्तव में सफल हो पाएगी?

वैज्ञानिक दृष्टि से यह तकनीक अत्यंत संभावनाशील है, किंतु चुनौतियाँ भी कम नहीं हैं।
1. अत्यधिक ऊर्जा की आवश्यकता
ऑक्साइड तोड़ने के लिए हजारों डिग्री तापमान चाहिए। चंद्रमा पर ऊर्जा उत्पादन आसान नहीं है। वहाँ रात लगभग 14 पृथ्वी दिनों तक रहती है, जिससे सौर ऊर्जा बाधित होती है।
2. चंद्र धूल की समस्या
चंद्र मिट्टी अत्यंत महीन और तीक्ष्ण होती है। यह मशीनों, स्पेस सूट और उपकरणों को नुकसान पहुँचा सकती है। अपोलो मिशनों में अंतरिक्ष यात्रियों ने इसे गंभीर समस्या बताया था।
3. कम गुरुत्वाकर्षण और विकिरण
चंद्रमा का गुरुत्व पृथ्वी का केवल लगभग 1/6 है। वहाँ वातावरण भी नहीं है, जिससे घातक अंतरिक्ष विकिरण सीधे सतह तक पहुँचता है। इसलिए केवल ऑक्सीजन उत्पादन से ही मानव बस्ती संभव नहीं होगी; विकिरण सुरक्षा और जैविक अनुकूलन भी आवश्यक होंगे।
4. आर्थिक लागत
प्रारंभिक संयंत्रों को चंद्रमा तक पहुँचाना अत्यंत महँगा होगा। वर्तमान तकनीक के अनुसार चंद्रमा तक एक किलोग्राम सामग्री भेजने की लागत लाखों रुपये तक पहुँच सकती है। फिर भी यह तकनीक क्यों आशाजनक मानी जा रही है? क्योंकि यह “इन-सिटू रिसोर्स यूटिलाइजेशन” (ISRU) की अवधारणा पर आधारित है, अर्थात स्थानीय संसाधनों का उपयोग। अंतरिक्ष विज्ञान में यह भविष्य की कुंजी मानी जा रही है। यदि मानव को दीर्घकाल तक चंद्रमा या मंगल पर रहना है, तो उसे वहाँ उपलब्ध संसाधनों से –
पानी,
ऑक्सीजन,
ईंधन,
निर्माण सामग्री
स्वयं तैयार करनी होगी। पृथ्वी पर निर्भरता बनाए रखना व्यावहारिक नहीं है।

विश्व की अंतरिक्ष एजेंसियों की पहल

NASA का “आर्टेमिस कार्यक्रम” चंद्रमा पर दीर्घकालीन मानव उपस्थिति की योजना बना रहा है।European Space Agency ऑक्सीजन निष्कर्षण तकनीक पर प्रयोग कर चुकी है।‌ ISRO भी भविष्य के चंद्र अभियानों में संसाधन उपयोग तकनीकों पर कार्य कर रहा है। China National Space Administration चंद्र अनुसंधान स्टेशन की दिशा में आगे बढ़ रही है।

क्या यह सही साबित होगा?

वैज्ञानिक दृष्टि से उत्तर है“हाँ, लेकिन धीरे-धीरे”। यह तकनीक तुरंत विशाल मानव नगर नहीं बसाएगी, किंतु चंद्रमा पर छोटे वैज्ञानिक आधार स्थापित करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। जैसे पृथ्वी पर प्रारंभिक मानव ने प्रकृति से संसाधन निकालना सीखा था, वैसे ही अंतरिक्ष सभ्यता का पहला कदम चंद्र मिट्टी से ऑक्सीजन निकालना हो सकता है। यह केवल तकनीकी प्रयोग नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के भविष्य का आधार बन सकता है। यदि यह सफल हुआ, तो आने वाले समय में चंद्रमा केवल अध्ययन का विषय नहीं रहेगा, बल्कि मानव का दूसरा घर बन सकता है।
चंद्रमा की मिट्टी से ऑक्सीजन प्राप्त करने की तकनीक विज्ञान की सबसे क्रांतिकारी अवधारणाओं में से एक है। यह मानव को पृथ्वी की सीमाओं से बाहर स्थायी जीवन की दिशा में ले जा सकती है। यद्यपि इसमें ऊर्जा, लागत, विकिरण और तकनीकी जटिलताओं जैसी बड़ी चुनौतियाँ हैं, फिर भी इसकी संभावनाएँ अत्यंत व्यापक हैं। संभव है कि आने वाली शताब्दियों में इतिहासकार लिखें कि मानव सभ्यता का “दूसरा अध्याय” तब प्रारंभ हुआ, जब मनुष्य ने पहली बार चंद्रमा की मिट्टी से सांस लेने योग्य ऑक्सीजन निकाली थी।

सुरेश सिंह बैस “शाश्वत”

HD MAHANT
Share. Facebook Twitter WhatsApp Copy Link

Related Posts

“विश्व पर्यावरण दिवस अभियान-2026” के अंतर्गत रेलवे मंडल में विभिन्न गतिविधियों का आयोजन

29/05/2026 - 10:55 AM

खनिज विभाग ने बिना लाइसेंस के कोल डिपो से 1500 टन कोयला किया जब्त

29/05/2026 - 10:52 AM

तोरवा में साइबर की पाठशाला-

29/05/2026 - 10:48 AM

कोर्ट के सामने पति ने दिया पत्नी को’तीन तलाक’

29/05/2026 - 10:45 AM

ग्रीष्मकालीन यात्रा में यात्रियों की सुविधा हेतु द पू म रेलवे की विशेष पहल

28/05/2026 - 8:46 AM

बिलासपुर में कबाड़ियों पर बड़ी कार्रवाई : तीन अवैध गोदामों पर चला बुलडोजर, 18 गिरफ्तार

28/05/2026 - 8:44 AM
Leave A Reply Cancel Reply

पोस्ट

चंद्रमा की मिट्टी से ऑक्सीजन प्राप्त करने की अवधारणा क्रांतिकारी

29/05/2026 - 11:01 AM

“विश्व पर्यावरण दिवस अभियान-2026” के अंतर्गत रेलवे मंडल में विभिन्न गतिविधियों का आयोजन

29/05/2026 - 10:55 AM

खनिज विभाग ने बिना लाइसेंस के कोल डिपो से 1500 टन कोयला किया जब्त

29/05/2026 - 10:52 AM

तोरवा में साइबर की पाठशाला-

29/05/2026 - 10:48 AM

एच. डी. महंत
मुख्य संपादक

Official Address :
Shop No. 2, Ground Floor, Gokul Apartment, Near Shyam Nagar Chowk, Shyam Nagar, Telibandha Raipur, Chhattisgarh – 492013

Facebook X (Twitter) YouTube WhatsApp
UDYAM-CG-33-0000933
May 2026
M T W T F S S
 123
45678910
11121314151617
18192021222324
25262728293031
« Apr    
© 2026 The Bharat Times. Designed by Nimble Technology.

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.