भिलाई 5 जून 2026/ पांच दशक से अधिक समय तक लोककला, कबीर भजन और छत्तीसगढ़ी संस्कृति की मशाल जलाने वाले भिलाई के मानिकपुरी दंपति को ऐसा सम्मान मिला है, जिसने पूरे छत्तीसगढ़ और मानिकपुरी पनिका समाज को गौरवान्वित कर दिया है। वाराणसी स्थित काशी हिन्दी विद्यापीठ ने राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कबीर भजन गायक एवं लोक कलाकार श्री नवल दास मानिकपुरी और उनकी धर्मपत्नी, आकाशवाणी एवं दूरदर्शन से अनुबंधित सुप्रसिद्ध लोक गायिका श्रीमती अनुसुईया मानिकपुरी को कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए विद्या वाचस्पति (मानद डॉक्टरेट) की उपाधि से सम्मानित किया है।
यह सम्मान 25 मई 2026 को काशी हिन्दी विद्यापीठ में आयोजित समारोह में प्रदान किया गया। विद्यापीठ के कुलाधिपति सुखमंगल सिंह मंगल, कुलपति डॉ. संभाजी राजाराम बाविस्कर और कुलसचिव इंद्रजीत निर्भिक ने दोनों कलाकारों को यह प्रतिष्ठित सम्मान सौंपा। बताया गया कि अकादमिक परिषद की अनुशंसा पर उन्हें पिछले 50 वर्षों से अधिक समय तक कला, संगीत और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन में दिए गए योगदान के लिए चयनित किया गया।
श्री नवल दास मानिकपुरी कलाकार विकास संघ छत्तीसगढ़ के संस्थापक एवं प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। वहीं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती अनुसुईया मानिकपुरी लोकगायन की दुनिया में एक प्रतिष्ठित नाम हैं। दोनों ने अपने गीत-संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रदेश की लोक परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
मानिकपुरी परिवार की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए उनके सुपुत्र मनीष मानिकपुरी भी छालीवुड और बॉलीवुड से जुड़े लोकप्रिय निर्माता-निर्देशक के रूप में पहचान बना चुके हैं। उन्होंने कई फिल्मों का निर्माण कर विभिन्न मंचों पर सम्मान प्राप्त किया है।
इस उपलब्धि पर प्रांतीय मानिकपुरी पनिका समाज छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. ललित कुमार मानिकपुरी ने दोनों कलाकारों को हार्दिक बधाई देते हुए इसे पूरे समाज के लिए गौरव का क्षण बताया। समाज ने राज्य सरकार से मांग की है कि ऐसे वरिष्ठ और प्रतिभाशाली कलाकारों को कला एवं संस्कृति से जुड़े महत्वपूर्ण दायित्वों में स्थान देकर उनके अनुभव का लाभ प्रदेश को दिलाया जाए।
गौरतलब है कि यह सम्मान केवल दो कलाकारों का नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, कबीर परंपरा और उस समर्पण का सम्मान है, जिसने वर्षों की साधना से प्रदेश की पहचान को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया है।





