बसना।
छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर प्रदेश की समृद्ध लोकसंस्कृति, गौरवशाली परंपराओं, प्राकृतिक सौंदर्य और अपनी माटी के प्रति प्रेम एवं सम्मान की भावना को समर्पित छत्तीसगढ़ी लोकगीत ‘छत्तीसगढ़ के पबरित माटी’ का 1 नवंबर को भव्य विमोचन किया गया। यामिनी स्टूडियो छत्तीसगढ़ की इस विशेष संगीतमय प्रस्तुति का भव्य रिलीज बसना विधायक डॉ. संपत अग्रवाल के करकमलों से हुआ।
इस अवसर पर विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पवित्र माटी, समृद्ध लोकसंस्कृति, गौरवशाली परंपराओं और जनभावनाओं को गीत-संगीत के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने का यह प्रयास सराहनीय है। राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर ‘छत्तीसगढ़ के पबरित माटी’ जैसे भावपूर्ण लोकगीत का लोकार्पण प्रदेशवासियों के लिए हर्ष और गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि यह गीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की धरती, संस्कृति, परंपरा, लोकजीवन और जनभावनाओं के प्रति सम्मान एवं आत्मीयता की संगीतमय अभिव्यक्ति है। ऐसी प्रस्तुतियां नई पीढ़ी को अपनी भाषा, जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
लोकसंस्कृति और ग्रामीण जीवन की झलक
‘छत्तीसगढ़ के पबरित माटी’ गीत में प्रदेश की हरियाली, खेत-खलिहान, गांवों की सुंदरता, लोकनृत्य, पारंपरिक वेशभूषा, लोकवाद्य और छत्तीसगढ़ के सीधे-सादे जनजीवन को संगीतमय अंदाज में प्रस्तुत किया गया है। गीत के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान और माटी की महक को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।
प्रतिभाशाली कलाकारों ने दिया स्वर और अभिनय
इस लोकगीत में दीपक कुमार साहू एवं प्रतिभा त्रिपाठी ने अपनी सुमधुर आवाज दी है, वहीं गोरे बरिहा एवं सुषमा कैवर्त ने अभिनय के माध्यम से प्रस्तुति को आकर्षक बनाया है। गीत के भावपूर्ण बोल शिक्षक एवं साहित्यकार प्रेमचन्द साव ‘प्रेम’ ने लिखे हैं। संगीत संयोजन ताम्रध्वज केंवट ने किया है तथा इसके निर्माता कमलेश कुमार साहू हैं। गीत की रिकॉर्डिंग स्वर म्यूजिक एकेडमी एवं रिकॉर्डिंग स्टूडियो, भिलाई में की गई है।
इस संगीतमय प्रस्तुति को साकार करने में अमर स्टूडियो गिरसा, तावसिफ जमाल (स्वर म्यूजिक एकेडमी भिलाई), कोरियोग्राफर संदीप भारती, कैमरामैन रविकांत साहू, एडिटिंग अभिजीत भारती तथा मेकअप कलाकार गायत्री साहू, कल्पना चौहान, मिथिलेश साहू, परमानंद निषाद और दुर्गेश परघनिया सहित अन्य सहयोगियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

गीतकार प्रेमचन्द साव ‘प्रेम’ की रचनात्मक पहल
गीत के रचनाकार प्रेमचन्द साव ‘प्रेम’ शिक्षक एवं साहित्यकार हैं। वे शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए बाल साहित्य, कविता, गीत तथा सामाजिक-सांस्कृतिक विषयों पर निरंतर लेखन करते रहे हैं। उनकी रचनाओं में माटी, प्रकृति, गांव, शिक्षा, संस्कार और सामाजिक सरोकारों के प्रति विशेष अनुराग दिखाई देता है। ‘छत्तीसगढ़ के पबरित माटी’ गीत के माध्यम से उन्होंने अपनी जन्मभूमि और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान के प्रति अपने भावों को शब्दों में पिरोया है।
गायिका प्रतिभा त्रिपाठी का राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए चयन
इस गीत की प्रमुख गायिका प्रतिभा त्रिपाठी के लिए यह अवसर दोहरी उपलब्धि का है। अपनी मधुर एवं भावपूर्ण गायिकी से छत्तीसगढ़ी लोकसंस्कृति को स्वर देने वाली प्रतिभा त्रिपाठी का सत्र 2026-27 के राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए चयन होना उनके शिक्षकीय जीवन और बहुआयामी प्रतिभा का परिचायक है। शिक्षा के साथ संगीत के क्षेत्र में भी वे अपनी पहचान बना रही हैं।
राज्य स्थापना दिवस पर सांस्कृतिक सौगात
यामिनी स्टूडियो छत्तीसगढ़ की इस विशेष प्रस्तुति से जुड़े कलाकारों एवं रचनाकारों ने उम्मीद जताई है कि ‘छत्तीसगढ़ के पबरित माटी’ गीत श्रोताओं के दिलों में विशेष स्थान बनाएगा और छत्तीसगढ़ी लोकगीत-संगीत की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने में योगदान देगा।
विमोचन के अवसर पर विधायक के निज सचिव नरेंद्र बोरे एवं वरिष्ठ कार्यकर्ता रमेश अग्रवाल उपस्थित रहे।






