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Home»छत्तीसगढ़»अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही जीवनदायिनी अरपा; क्या साबरमती की तर्ज पर बदलेगी बिलासपुर की सूरत?
छत्तीसगढ़ बिलासपुर

अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही जीवनदायिनी अरपा; क्या साबरमती की तर्ज पर बदलेगी बिलासपुर की सूरत?

HD MAHANTBy HD MAHANT10/05/2026 - 9:28 AM
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सुरेश सिंह बैस
बिलासपुर 10 मई 2026/ छत्तीसगढ़ की न्यायधानी और संस्कारधानी कहे जाने वाले बिलासपुर की पहचान, यहाँ की जीवनदायिनी ‘अरपा’ नदी आज अपने अस्तित्व के लिए आँसू बहा रही है। वर्षों से राजनीति का शिकार रही अरपा की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है। शासन-प्रशासन की उपेक्षा और जन-भागीदारी की कमी ने इस पवित्र नदी को एक नाले के रूप में तब्दील कर दिया है। अब समय आ गया है कि बिलासपुर के निवासी अपनी ‘कुंभकर्णी नींद’ से जागें और अरपा के उद्धार के लिए एक निर्णायक कदम उठाएं।

*चुनावी वादों की भेंट चढ़ी ‘अरपा’*

बीते कई दशकों से हर चुनाव में अरपा का संरक्षण एक मुख्य मुद्दा रहा है। चाहे सांसद प्रत्याशी हों या विधायक, सभी ने अरपा की सुंदरता और संवर्धन के सब्जबाग दिखाकर वोट तो बटोरे, लेकिन चुनाव जीतते ही वादे ठंडे बस्ते में चले गए। आज भी अरपा की दशा जस की तस बनी हुई है। सवाल यह उठता है कि क्या केवल सरकारों के भरोसे रहने से अरपा का उद्धार संभव है?

साबरमती मॉडल: एक प्रेरणा

गुजरात की साबरमती नदी, जो कभी अरपा की तरह ही प्रदूषित और सूखी हुआ करती थी, आज देश के लिए एक मिसाल है। जनशक्ति और दृढ़ इच्छाशक्ति के संगम से साबरमती का कायाकल्प हो चुका है। बिलासपुर की जनता भी यदि ठान ले, तो अरपा को साबरमती से भी सुंदर और निर्मल बनाया जा सकता है।

नर्मदा-अरपा संगम: एक क्रांतिकारी विजन

अरपा के पुनरुद्धार के लिए एक साहसी परिकल्पना सामने आ रही है। चूंकि अरपा का उद्गम पेंड्रा की मैकल पर्वत श्रेणियों से होता है, जो अमरकंटक के अत्यंत समीप है, विशेषज्ञों का मानना है कि:
*भौगोलिक सुधार* : अमरकंटक जैसे पवित्र तीर्थ को छत्तीसगढ़ की सीमा में शामिल करने हेतु ठोस प्रयास हों।
*नदी जोड़ो अभियान* : नर्मदा की एक धारा को नहर के माध्यम से अरपा के उद्गम स्थल तक लाया जाए।
*डबल इंजन सरकार का लाभ* : वर्तमान में केंद्र, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश तीनों जगह भाजपा की सरकारें हैं। ऐसे में अंतर्राज्यीय समन्वय के साथ नर्मदा-अरपा का सम्मिलन कोई असंभव कार्य नहीं है।

See also  मानिकपुरी पनिका/पनका समाज, छत्तीसगढ़ के प्रदेश स्तरीय सामाजिक निर्वाचन हेतु नामांकन प्रक्रिया प्रारंभ

तीर्थ नगरी के रूप में स्थापित होगा बिलासपुर

यदि अरपा में नर्मदा की अविरल धारा प्रवाहित होती है, तो बिलासपुर का परिदृश्य पूरी तरह बदल जाएगा।
*गंगा आरती की तर्ज पर आयोजन:* तोरवा स्थित छठ घाट पर ‘नर्मदा-अरपा आरती’ का भव्य आयोजन इसे धार्मिक पर्यटन का केंद्र बना देगा।
*आर्थिक विकास* : रिवर फ्रंट डेवलपमेंट, नौकायन और धार्मिक मेलों के आयोजन से बिलासपुर एक प्रतिष्ठित तीर्थ नगरी के रूप में विश्व मानचित्र पर उभरेगा।

अब नहीं तो कब?

अरपा केवल एक नदी नहीं, बिलासपुर की आत्मा है। इसकी दुर्दशा के लिए हम और आप भी समान रूप से दोषी हैं। अब समय केवल ढोल-नगाड़े पीटने का नहीं, बल्कि धरातल पर उतरकर ‘प्राण-पण’ से जुटने का है। यदि शासन, प्रशासन और जनता हृदय से एक हो जाएं, तो अरपा की कल-कल ध्वनि फिर से बिलासपुर की फिजाओं में गूंजेगी। “अरपा की पुकार, जागो बिलासपुर संस्कार!”

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