छत्तीसगढ़

CG में Congress को एक और झटका, अब इस वरिष्ठ नेता ने दिया इस्तीफा, पार्टी के बड़े नेताओं पर कार्यकर्ताओं का शोषण करने का लगाया आरोप

दुर्ग। जिले में कांग्रेस पार्टी के लिए दिन कुछ ठीक नहीं चल रहा है। कांग्रेस पार्टी के नेता जहां अपने बगावती तेवर दिखाते हुए पार्टी की पोल खोलने में लगे हैं. एक तरफ जहां कांग्रेस के पूर्व महासचिव अरुण सिसोदिया को कांग्रेस कोषाध्यक्ष पर 5 करोड़ 89 लाख रुपये के घपले का आरोप लगाने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. वहीं कांग्रेस के पार्षद और एमआईसी मेंबर भाजपा प्रवेश कर रहे हैं. इस बीच आज कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और क्रेडा सदस्य, युवा मितान क्लब के संभाग संयोजन, दुर्ग ग्रामीण के पूर्व जिला महामंत्री, विजय साहू ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है.

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज को इस्तीफा भेजते हुए, विजय साहू ने अपने पत्र में लिखा की दिल्ली से लेकर छत्तीसगढ़ तक पार्टी अपने उद्देश्यों से भटक गई है और पार्टी के वरिष्ठ नेता कार्यकर्ताओं का शोषण कर रहे हैं. आज पार्टी संगठन का संचालन जुआ सट्टा शराब माफिया एवं असामाजिक तत्व के लोग कर रहे हैं. जिसके चलते वे कांग्रेस की प्राथमिक सदस्य इस्तीफा दे रहे हैं.

आपको बता दे की विजय साहू 36 वर्षों से पार्टी से जुड़े हुए हैं जिसके चलते वैशाली नगर विधानसभा क्षेत्र में इस बार जब प्रत्याशियों के पैनल बनाए गए. तब विजय साहू का नाम भी शामिल किया गया. लेकिन पूर्व सीएम भूपेश बघेल की पारिवारिक सदस्य और भिलाई के जिला अध्यक्ष मुकेश चंद्राकर को प्रत्याशी बनाया गया. लेकिन चन्द्राकर को 40 हजार मतो से हारका सामना करना पड़ा.

विजय साहू ने पूर्व सीएम भूपेश बघेल द्वारा कार्यकर्ताओं को स्लीपर सेल कहे जाने का भी विरोध किया. उन्होंने कहा कि जिन कार्यकर्ताओं ने पार्टी को खड़ा करने और उन्हें सीएम बनने में कड़ी मेहनत की वह आज उन्हें स्लीपर सेल लग रहे हैं. यह कार्यकर्ताओं का अपमान है. इन शब्दों से कार्यकर्ताओं का मनोबल लगातार टूट रहा है. वहीं लोकसभा चुनाव में भी दुर्ग जिले के लोगों को ही अन्य लोकसभा क्षेत्र से लड़ाया जा रहा है. विजय साहू ने सवाल उठाया कि क्या वहां के स्थानीय कार्यकर्ता इस लायक नहीं है. उन्होनें कहा कि पूर्व सीएम स्वयं अपने लिए सेफ जोन खोजकर राजनांदगांव चले गए. पार्टी के भीतर दिल्ली दरबार में हाजरी लगाने वालों का ही बोलबाला है. बाकी छोटे कार्यकताओं की उपेक्षा की जा रही है.

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