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Home»छत्तीसगढ़»पुनरुद्धार के बाद भी बदहाल शहर के तालाब-
छत्तीसगढ़ बिलासपुर

पुनरुद्धार के बाद भी बदहाल शहर के तालाब-

HD MAHANTBy HD MAHANT23/05/2026 - 10:09 AM
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बिलासपुर के 117 ऐतिहासिक जलाशय आज अस्तित्व के संकट में

– सुरेश सिंह बैस
बिलासपुर 23 मई 2026/ कभी शहर की पहचान, जल संरक्षण का प्रमुख आधार और सांस्कृतिक धरोहर माने जाने वाले बिलासपुर के ऐतिहासिक तालाब आज उपेक्षा, अतिक्रमण और प्रशासनिक उदासीनता के कारण अस्तित्व के संकट से जूझ रहे हैं। विडंबना यह है कि पिछले 10 वर्षों में तालाबों के सौंदर्यीकरण, संरक्षण और विकास के नाम पर 25 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन हालात अब भी चिंताजनक बने हुए हैं। अधिकांश तालाब बदहाल हैं और कई जलाशय तो बेहिसाब गंदगी तथा जलकुंभी की चपेट में आ चुके हैं। शहर में लगभग 147 तालाबों का उल्लेख मिलता है, किंतु इनमें से 117 तालाब ही वर्तमान में दर्ज हैं। विशेषज्ञों और पर्यावरण प्रेमियों का मानना है कि लगातार बढ़ते अतिक्रमण, अनियोजित शहरीकरण और रखरखाव की कमी के कारण अनेक तालाब या तो पूरी तरह समाप्त हो चुके हैं अथवा सिकुड़ते जा रहे हैं।

करोड़ों खर्च, फिर भी नहीं बदली तस्वीर

नगर निगम और प्रशासन द्वारा समय-समय पर तालाबों के संरक्षण के बड़े दावे किए गए। वर्ष 2007-08 से लेकर अब तक करोड़ों रुपये खर्च कर कांक्रीट घाट, पुल, फाउंटेन, लाइटिंग और सौंदर्यीकरण जैसे कार्य कराए गए। लेकिन अधिकांश योजनाएं केवल निर्माण कार्यों तक सीमित रह गईं। नियमित सफाई, जल संरक्षण और प्राकृतिक स्वरूप बचाने की दिशा में अपेक्षित प्रयास नहीं हुए। डीपूपारा तालाब इसका बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी तालाब आज गंदगी, जलकुंभी और बदहाल व्यवस्था का प्रतीक बन चुका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि तालाबों की वास्तविक जरूरत संरक्षण और सफाई है, न कि केवल दिखावटी निर्माण।

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ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर पर संकट

गंगानगर, चांदमारी, कोतवाली, गांधी चौक और जूना बिलासपुर क्षेत्र के कई तालाब कभी शहर की जीवनरेखा माने जाते थे। ये जलस्रोत न केवल पेयजल और भूजल संरक्षण का आधार थे, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के केंद्र भी रहे हैं। आज इन तालाबों पर अतिक्रमण, गंदगी और सीवेज का दबाव लगातार बढ़ रहा है। पर्यावरणविदों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में शहर को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। तालाब केवल सौंदर्य का विषय नहीं, बल्कि भविष्य की जल सुरक्षा का आधार हैं।

प्रशासन और जनता दोनों की जिम्मेदारी

विशेषज्ञ मानते हैं कि तालाबों को बचाने के लिए केवल सरकारी योजनाएं पर्याप्त नहीं होंगी। इसके लिए जनभागीदारी, नियमित निगरानी और कठोर कार्रवाई की आवश्यकता है। अतिक्रमण हटाने, सीवेज प्रवाह रोकने, जलकुंभी सफाई और वर्षा जल संरक्षण जैसे कार्यों को प्राथमिकता देनी होगी।बिलासपुर नगर की पहचान रहे ये ऐतिहासिक तालाब आज मदद की पुकार कर रहे हैं। करोड़ों खर्च होने के बावजूद यदि जलाशय नहीं बच पाए, तो यह केवल प्रशासनिक विफलता ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ गंभीर लापरवाही भी होगी।

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