रतनपुर का गौरवशाली गज किला, पर्यटन के नए अध्याय की ओर बढ़ते कदम
सुरेश सिंह बैस
बिलासपुर 30 जून 2026/ छत्तीसगढ़ की प्राचीन राजधानी रतनपुर स्थित ऐतिहासिक गज किला इन दिनों अपने नए स्वरूप को लेकर चर्चा का केंद्र बना हुआ है। लगभग एक हजार वर्ष पुराने इस ऐतिहासिक दुर्ग को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के संरक्षण एवं देखरेख में व्यवस्थित रूप से संवारा जा रहा है। करीब 2 करोड़ 60 लाख रुपये की लागत से चल रहे इस महत्वाकांक्षी सुंदरीकरण कार्य के पूरा होने के बाद गज किला न केवल अपनी प्राचीन गरिमा को पुनः प्राप्त करेगा, बल्कि प्रदेश के प्रमुख हेरिटेज पर्यटन स्थलों में भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाएगा। रतनपुर सदियों तक कलचुरी राजाओं की राजधानी रहा है। यहां का प्रत्येक पत्थर इतिहास की अनगिनत कहानियों का साक्षी है। वर्षों से उपेक्षा का शिकार रहे इस ऐतिहासिक परिसर में अब व्यापक स्तर पर संरक्षण एवं विकास कार्य किए जा रहे हैं। पहली बार किले के भीतर पर्यटकों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए योजनाबद्ध ढंग से कार्य होते दिखाई दे रहे हैं।
जमींदोज तालाबों को मिल रहा नया जीवन
गज किले के भीतर स्थित दो प्राचीन तालाब समय के साथ मिट्टी से भरकर अपनी पहचान खोते जा रहे थे। अब इन तालाबों की लगभग तीन फीट तक खुदाई कर उनकी मजबूत पिचिंग की जा रही है। चारों ओर सुरक्षात्मक बाउंड्री बनाई जा रही है तथा वर्षा जल के समुचित संचयन की व्यवस्था भी विकसित की जा रही है। उद्देश्य केवल तालाबों का सौंदर्य बढ़ाना नहीं, बल्कि उनके मूल स्वरूप को पुनर्जीवित करना भी है। यह कार्य भविष्य में जल संरक्षण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण साबित होगा।
राजस्थानी पत्थरों से निखर रही ऐतिहासिक सुंदरता
किले की प्राचीन वास्तुकला के अनुरूप राजस्थानी पत्थरों का उपयोग कर आकर्षक पैदल मार्ग (पाथवे) तैयार किए जा रहे हैं। परिसर में राजस्थानी मार्बल से बनी बैठने की कुर्सियां, सुंदर डस्टबिन तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं स्थापित की जा रही हैं। इन कार्यों से किले की ऐतिहासिक गरिमा अक्षुण्ण रहते हुए आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का समावेश भी हो रहा है।
पर्यटकों की सुविधा पर विशेष ध्यान
सुंदरीकरण के साथ-साथ पर्यटकों की मूलभूत सुविधाओं का भी विस्तार किया जा रहा है। वर्षों से खराब पड़े वाटर कूलर की जगह नया वाटर कूलर स्थापित किया गया है, जिससे गर्मी के मौसम में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को शीतल पेयजल उपलब्ध हो रहा है। पूरे परिसर में स्वच्छता बनाए रखने के लिए पर्याप्त संख्या में डस्टबिन लगाए गए हैं।
सीसीटीवी निगरानी से सुरक्षित होगी धरोहर
गज किले की सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए पूरे परिसर को शीघ्र ही सीसीटीवी कैमरों से लैस किया जाएगा। इससे असामाजिक गतिविधियों पर रोक लगेगी तथा ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण और अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।
श्रद्धा और पर्यटन का अद्भुत संगम
गज किले के भीतर स्थित जगन्नाथ मंदिर, हनुमान मंदिर एवं राधा स्वामी मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। प्रतिदिन सुबह-शाम बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं पर्यटक यहां दर्शन के साथ-साथ ऐतिहासिक धरोहर का अवलोकन करने पहुंचते हैं। सुंदरीकरण कार्य को देखकर अधिकांश लोग इस प्रयास की मुक्त कंठ से सराहना कर रहे हैं।राजनांदगांव से आए पर्यटक ने बताया कि पहले की तुलना में आज गज किला कहीं अधिक व्यवस्थित और आकर्षक दिखाई देता है। सुंदर पाथवे, बैठने की व्यवस्था और साफ-सफाई पर्यटकों को विशेष रूप से प्रभावित कर रही है। वहीं समाजसेवी डॉ. सुनील जायसवाल का कहना है कि रतनपुर के इतिहास में पहली बार गज किले के भीतर इतने व्यापक स्तर पर संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण का कार्य हो रहा है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अमूल्य धरोहर सिद्ध होगा।
वहीं इसके उलट स्थानीय पर्यावरण प्रेमी और वरिष्ठ साहित्यकार शीतल पटनवार जी ने इस दिखावे के सौंदर्यीकरण पर नाखुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह सब ढिंढोरा तो पीटा ही जाता रहा है। लेकिन अभी तक वास्तविक सौंदर्य करण और रखरखाव पर वैसी गंभीरता नहीं दिखाई गई अगर विभाग और प्रशासन इस पर पूरी गंभीरता से काम करें तो इस महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल की काया ही पूरी तरह निखर जाएगी।
नगरवासियों का सहयोग भी आवश्यक
स्थानीय नागरिकों का मानना है कि केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। यदि नगरवासी भी अपनी ऐतिहासिक धरोहर को स्वच्छ रखने, उसकी सुरक्षा करने और पर्यटकों के प्रति सकारात्मक व्यवहार अपनाने का संकल्प लें, तभी यह विरासत लंबे समय तक सुरक्षित रह सकेगी। इतिहास केवल इमारतों से नहीं, बल्कि समाज की जागरूकता से भी जीवित रहता है।
रतनपुर गज किले का गौरवशाली इतिहास
11वीं शताब्दी में कलचुरी वंश के महान शासक राजा रत्नदेव प्रथम ने इस भव्य किले का निर्माण कराया था। उन्होंने अपनी रानी रत्ना देवी के नाम पर इस नगर का नाम रतनपुर रखा और इसे अपनी राजधानी बनाया। लगभग सात शताब्दियों तक कलचुरी वंश ने यहीं से शासन किया। किले के मुख्य द्वार पर स्थापित पत्थर के चार विशाल हाथियों (गज) के कारण इसका नाम गज किला पड़ा। ये हाथी शक्ति, समृद्धि और शौर्य के प्रतीक माने जाते हैं।
लगभग 12 फीट ऊंची और 8 फीट चौड़ी मजबूत पत्थर की प्राचीरों से घिरा यह किला आज भी अपनी भव्यता का परिचय देता है। इसके भीतर राजमहल, दरबार हॉल, प्राचीन मंदिर, जलाशय तथा कई ऐतिहासिक संरचनाओं के अवशेष विद्यमान हैं। सिंह द्वार और गणेश द्वार इसके प्रमुख प्रवेश द्वार हैं। इतिहासकारों के अनुसार रतनपुर छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध 36 गढ़ों में से एक प्रमुख गढ़ था, जिससे आगे चलकर पूरे प्रदेश का नाम छत्तीसगढ़ पड़ा। मुगल और मराठा शासनकाल में भी रतनपुर का विशेष महत्व बना रहा। वर्ष 1818 में अंग्रेजों ने इस क्षेत्र पर अधिकार कर लिया, किंतु गज किला आज भी अपनी ऐतिहासिक गरिमा के साथ अतीत की गौरवगाथा सुनाता है।
पर्यटन की नई पहचान बनने की ओर
सुंदरीकरण कार्य पूर्ण होने के बाद गज किला न केवल इतिहास प्रेमियों और शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा, बल्कि धार्मिक पर्यटन, सांस्कृतिक पर्यटन और विरासत पर्यटन को भी नई गति देगा। यदि इस धरोहर का संरक्षण इसी प्रकार जारी रहा तो निकट भविष्य में रतनपुर का गज किला छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश के प्रमुख ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों की सूची में अपना महत्वपूर्ण स्थान बना सकता है। इतिहास केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि भविष्य की पहचान भी होता है। रतनपुर का गज किला आज उसी पहचान को नए युग के अनुरूप संवारने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।











