पूर्व सरपंच और तहसीलदार की सांठगांठ का आरोप, बारिश में निर्माणाधीन मकान ढहाने से मचा हड़कंप; न्यायालय में जमीन प्रकरण लंबित होने के बावजूद कार्रवाई पर उठे सवाल
सीधी/टिकरी 27 अगस्त 2026/ सीधी जिले के मझौली थाना क्षेत्र अंतर्गत उप तहसील मड़वास की ग्राम पंचायत टिकरी में गरीब परिवार के निर्माणाधीन आवास पर बुलडोजर चलाए जाने का मामला अब प्रशासन के लिए बड़ा सवाल बनता जा रहा है। पीड़ित परिवार ने पूर्व सरपंच और राजस्व अमले पर गंभीर आरोप लगाते हुए कार्रवाई को पक्षपातपूर्ण बताया है। परिवार का कहना है कि बारिश के बीच उनका आशियाना उजाड़ दिया गया, जबकि जमीन संबंधी प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है।
पीड़ित परिवार के मुताबिक, वर्षों से जमीन पर उनका कब्जा और उपयोग रहा है। इसी जमीन पर परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्माण करा रहा था। आरोप है कि अचानक प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए निर्माणाधीन मकान को बुलडोजर से जमींदोज कर दिया गया। कार्रवाई के समय बारिश का मौसम होने के कारण परिवार की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
न्यायालय में मामला लंबित, फिर भी चला बुलडोजर?
पीड़ित परिवार का सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब भूमि संबंधी मामला न्यायालय में विचाराधीन है, तो निर्माणाधीन मकान को गिराने की इतनी जल्दबाजी क्यों की गई? परिवार का आरोप है कि संबंधित पक्षों के प्रभाव और दबाव में प्रशासनिक कार्रवाई की गई।
परिवार ने अधिकारियों के समक्ष दस्तावेज प्रस्तुत कर निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जमीन पर कोई वैधानिक विवाद था तो न्यायालयीन प्रक्रिया के तहत उसका निराकरण किया जाना चाहिए था, न कि बारिश के बीच गरीब परिवार का निर्माणाधीन घर गिरा दिया जाता।
‘न्याय नहीं मिला तो अनशन करेंगे’—पीड़ित परिवार का बड़ा ऐलान
लगातार अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाने के बाद भी राहत नहीं मिलने से पीड़ित परिवार ने अब बड़ा फैसला लिया है। परिवार ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने निष्पक्ष जांच कर न्याय नहीं दिया और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं की, तो वे अनशन पर बैठेंगे।
पीड़ित परिवार ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी से विवाद करना नहीं, बल्कि अपने अधिकार और न्याय के लिए लड़ना है। परिवार ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि आखिर किस आदेश और किस आधार पर निर्माणाधीन मकान को गिराया गया।
पूर्व सरपंच की भूमिका पर भी सवाल
मामले में पूर्व सरपंच सरोज साकेत पति श्रीनिवास साकेत की भूमिका को लेकर भी पीड़ित परिवार ने गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का आरोप है कि पद और प्रभाव का दुरुपयोग कर उनके खिलाफ कार्रवाई का रास्ता तैयार किया गया।
गरीब के आशियाने पर कार्रवाई या नियमों की अनदेखी?
मामले ने प्रशासनिक कार्रवाई की निष्पक्षता पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि भूमि विवाद न्यायालय में लंबित था, तो कार्रवाई से पहले न्यायालयीन स्थिति और सभी दस्तावेजों का परीक्षण किस स्तर पर हुआ? क्या पीड़ित परिवार को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर मिला? और सबसे अहम—भारी बारिश के बीच ही निर्माणाधीन आवास गिराने की जरूरत क्यों पड़ी?
इन सवालों के जवाब अब जिला प्रशासन की जांच से ही सामने आएंगे।
पीड़ित परिवार ने जिला कलेक्टर से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे अनशन के जरिए अपनी आवाज बुलंद करेंगे। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में जांच और कार्रवाई को लेकर क्या कदम उठाता है।





