सुरेश सिंह बैस
बिलासपुर 23 जून 2026/ शहरी क्षेत्रों में विकास कार्यों के दौरान सीमेंट-कंक्रीट से घिरे पेड़ों को अब राहत मिलने वाली है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने प्रदेश के सभी नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों को पेड़ों के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने पेड़ों के तनों के चारों ओर एक मीटर तक बने सीमेंट-कंक्रीट ढांचे को हटाने तथा उन पर लगाए गए विज्ञापन बोर्ड, साइन बोर्ड, तार, केबल और अन्य अवरोधों को तत्काल हटाने के आदेश दिए हैं।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी पेड़ों के तनों से एक मीटर की परिधि के भीतर किसी प्रकार का निर्माण, मरम्मत या अन्य गतिविधि नहीं की जाएगी। इसके साथ ही बड़े पेड़ों के आसपास लगाए गए ट्री गार्ड भी हटाए जाएंगे, ताकि वृक्षों को प्राकृतिक रूप से बढ़ने और फैलने के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध हो सके।
जड़ों तक हवा और पानी पहुंचाने की पहल
विभाग के अनुसार सड़क चौड़ीकरण, फुटपाथ निर्माण और अन्य शहरी विकास कार्यों के दौरान कई स्थानों पर पेड़ों की जड़ों के आसपास सीमेंट और कंक्रीट बिछा दी जाती है। इससे मिट्टी तक हवा और पानी का प्रवाह बाधित हो जाता है। परिणामस्वरूप वृक्षों की वृद्धि प्रभावित होती है और लंबे समय में उनके सूखने का खतरा बढ़ जाता है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि पेड़ों की जड़ों को जीवित और स्वस्थ बनाए रखने के लिए मिट्टी का खुला रहना आवश्यक है। वर्षा का पानी और ऑक्सीजन जड़ों तक पहुंचने से वृक्ष अधिक मजबूत और दीर्घायु बनते हैं।
पेड़ों पर पेंटिंग और नाम लिखने पर भी रोक
नए निर्देशों में पेड़ों के तनों पर पेंट करने, खुरचकर नाम लिखने अथवा किसी प्रकार की आकृति बनाने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार इससे वृक्षों की छाल को नुकसान पहुंचता है तथा संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, जिससे उनकी सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
स्थानीय निकायों को सौंपी जिम्मेदारी
नगरीय प्रशासन विभाग ने सभी नगरीय निकायों को अपने-अपने क्षेत्रों में ऐसे पेड़ों की पहचान कर सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। पेड़ों के आसपास बने अनावश्यक ढांचे, लगाए गए बोर्ड और अन्य बाधाओं को हटाने की जिम्मेदारी स्थानीय निकायों को दी गई है। वहीं क्षेत्रीय अधिकारियों को नियमित निगरानी कर कार्रवाई की समीक्षा करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
हरियाली संरक्षण की दिशा में अहम कदम
बढ़ते शहरीकरण और लगातार घटते हरित क्षेत्र के बीच विभाग का यह निर्णय पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पेड़ों के आसपास पर्याप्त खुली मिट्टी उपलब्ध रहेगी तो उनकी जड़ों को पर्याप्त हवा और पानी मिलेगा, जिससे उनकी आयु बढ़ेगी और शहरों में हरियाली का संरक्षण अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगा।





