स्वयंप्रभा फाउंडेशन और आम्रपाली गृह निर्माण संस्था ने यूसीसी समिति को सौंपे महत्वपूर्ण सुझाव
आदिवासी परंपराओं के संरक्षण, महिलाओं के समान अधिकार और लिव-इन संबंधों में बच्चों के भविष्य की सुरक्षा पर दिया जोर
रायपुर, 30 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों की भागीदारी और जनसंवाद का क्रम जारी है। इसी कड़ी में स्वयंप्रभा फाउंडेशन एवं आम्रपाली सहकारी गृह निर्माण संस्था मर्यादित, रायपुर के प्रतिनिधियों ने समान नागरिक संहिता समिति के समक्ष महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए।
समिति के सदस्य सेवानिवृत्त आईएएस एम.के. राऊत और वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार ने प्रतिनिधिमंडल के सुझावों को गंभीरतापूर्वक सुना। समिति की ओर से सुझावों के समुचित परीक्षण और विचार-विमर्श के दौरान उन्हें संज्ञान में लेने की बात कही गई। प्रतिनिधियों ने विश्वास जताया कि व्यापक जनभागीदारी और विभिन्न समुदायों के विचारों के आधार पर तैयार समान नागरिक संहिता सामाजिक न्याय, महिला सशक्तिकरण, नागरिक अधिकारों की सुरक्षा और सामाजिक समरसता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया कि समान नागरिक संहिता का उद्देश्य सभी नागरिकों को समान कानूनी अधिकार, महिलाओं को न्यायपूर्ण संरक्षण और समाज में समानता एवं समरसता को बढ़ावा देना होना चाहिए। साथ ही छत्तीसगढ़ की विशिष्ट आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और संवैधानिक अधिकारों का संरक्षण भी सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है। स्वयंप्रभा फाउंडेशन के अध्यक्ष शिव नारायण मुंदड़ा, डॉ. मुकेश शाह तथा आम्रपाली सहकारी गृह निर्माण संस्था के अध्यक्ष इन्द्रनाथ सिंह ने अपने सुझाव प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति एवं पारिवारिक अधिकारों से जुड़े कानूनों में समानता स्थापित होने से नागरिकों को न्याय मिलने में सुविधा होगी और कानूनी प्रक्रियाएं सरल बनेंगी।
महिलाओं के अधिकारों को प्राथमिकता देते हुए प्रतिनिधियों ने बहुविवाह जैसी सामाजिक कुप्रथाओं, भरण-पोषण संबंधी असमानताओं और संपत्ति अधिकारों में भेदभाव दूर करने के लिए प्रभावी प्रावधान बनाने की आवश्यकता बताई। विशेष रूप से बेटियों को पैतृक संपत्ति में समान अधिकार तथा महिलाओं को विवाह और तलाक के मामलों में न्यायपूर्ण संरक्षण देने पर जोर दिया गया।
प्रतिनिधिमंडल ने छत्तीसगढ़ की लगभग 32 प्रतिशत आदिवासी आबादी का उल्लेख करते हुए कहा कि जनजातीय समुदायों की विशिष्ट सामाजिक व्यवस्था, सांस्कृतिक पहचान और सदियों पुरानी परंपराओं का संरक्षण जरूरी है। यूसीसी लागू करने से पहले इनके सामाजिक हितों और संवैधानिक अधिकारों का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए, ताकि किसी भी समुदाय के अधिकार प्रभावित न हों।
लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े सामाजिक एवं कानूनी पहलुओं पर भी सुझाव दिए गए। प्रतिनिधियों ने ऐसे संबंधों के पंजीयन की उपयुक्त कानूनी व्यवस्था पर विचार करने तथा इन संबंधों से जन्म लेने वाले बच्चों के उत्तराधिकार, संपत्ति संबंधी अधिकारों और भविष्य की सुरक्षा के लिए स्पष्ट एवं न्यायसंगत प्रावधान बनाने की आवश्यकता बताई।




