(बालाघाट), बैहर 17 जून 2026/ अनुसूचित जनजाति (ST) का समान दर्जा दिलाने की वर्षों पुरानी मांग को लेकर बैहर की धरती पर पनिका समाज का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ा। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, महाराष्ट्र, ओडिशा और उत्तरप्रदेश से हजारों समाजजन एक मंच पर जुटे और एक स्वर में सामाजिक न्याय की हुंकार भरते हुए राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री के नाम एसडीएम के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। महासभा में वक्ताओं ने कहा कि 53 वर्षों से लंबित मांग अब केवल समाज का मुद्दा नहीं, बल्कि समान अधिकार और संवैधानिक न्याय का प्रश्न बन चुकी है।
बैहर में आयोजित अखिल भारतीय पनिका, पनका, पंख एवं पान समाज की महासभा में समाज के वरिष्ठ नेताओं ने वर्ष 1971 की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक ही समाज को अलग-अलग राज्यों में अलग दर्जा मिलना संविधान की समानता की भावना के विपरीत है। इससे शिक्षा, रोजगार और सरकारी योजनाओं में समाज के लाखों लोग आज भी वंचित हैं। वक्ताओं ने जबलपुर हाईकोर्ट के वर्ष 2009 के आदेश तथा विभिन्न राज्यों द्वारा केंद्र सरकार को भेजी गई अनुशंसाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि अब केंद्र सरकार को बिना विलंब निर्णायक कदम उठाना चाहिए।
बैहर के वरिष्ठ समाजसेवी बिहारी दास मुरचले ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में कहा, “यह आंदोलन किसी सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि अपने संवैधानिक अधिकारों के सम्मान की लड़ाई है। जब तक पूरे देश में पनिका समाज को समान रूप से अनुसूचित जनजाति का दर्जा नहीं मिलता, तब तक हमारा संघर्ष शांत नहीं होगा। समाज को एकजुट रहना होगा और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए निर्णायक लड़ाई लड़नी होगी।” उनके संबोधन पर पूरा पंडाल तालियों और जयघोष से गूंज उठा।
रायपुर (छत्तीसगढ़) से पहुंचे समाजसेवी सुमित दास महंत ने अपने प्रभावशाली उद्बोधन में कहा, “बैहर की यह ऐतिहासिक सभा पूरे देश के पनिका समाज की एकता और जागरूकता का प्रतीक है। हमारा संघर्ष किसी विशेष सुविधा के लिए नहीं, बल्कि संविधान द्वारा मिले समान अधिकारों के लिए है। एक ही समाज को अलग-अलग राज्यों में अलग दर्जा देना सामाजिक न्याय के सिद्धांत के विरुद्ध है। अब केंद्र सरकार को वर्षों से लंबित इस मांग पर संवेदनशीलता दिखाते हुए पूरे देश में पनिका समाज को समान रूप से अनुसूचित जनजाति का दर्जा देना चाहिए।” उन्होंने युवाओं से संगठित होकर शिक्षा, जागरूकता और लोकतांत्रिक तरीके से अधिकारों की इस लड़ाई को आगे बढ़ाने का आह्वान करते हुए कहा कि “जब समाज एकजुट होता है, तब इतिहास बदलता है। बैहर से उठी यह आवाज अब दिल्ली तक गूंजनी चाहिए।”
महासभा में रायपुर (छत्तीसगढ़) से मनोज मानिकपुरी एच. डी. महंत, एवं शंकर मानिकपुरी की विशेष उपस्थिति रही। सभी प्रतिनिधियों ने समाज की एकता को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि अब पूरे देश के पनिका समाज को एक मंच पर आकर अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए निरंतर संघर्ष करना होगा।
ज्ञापन में वर्ष 1971 से लागू व्यवस्था की समीक्षा कर संशोधन, संसद में विधेयक लाकर पूरे देश में पनिका समाज को समान रूप से ST का दर्जा देने तथा पात्र लोगों को तत्काल अनुसूचित जनजाति प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की गई। समाज ने चेतावनी दी कि यदि जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो दिल्ली कूच, राष्ट्रव्यापी आंदोलन और आवश्यकता पड़ने पर सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा।
बहरहाल, बैहर की यह ऐतिहासिक महासभा केवल एक सम्मेलन नहीं, बल्कि पनिका समाज की एकता, स्वाभिमान और संवैधानिक अधिकारों की बुलंद आवाज बनकर राष्ट्रीय स्तर पर गूंजती दिखाई दी।




















