छत्तीसगढ़बिलासपुर

जिले के गर्ल्स स्कूलों में केवल फाइलों में बने हैं टॉयलेट, मौके पर गायब

बिलासपुर। जिले के अधिकांश सरकारी स्कूलों की छात्राओं की सुविधा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। जहां देखने में आया की फाइलों में तो टॉयलेट सुविधा युक्त बने हुए हैं, लेकिन मौके पर आधे अधूरे या बिल्कुल नहीं बन पाए गए।डेढ़ करोड़ रुपये खर्च करने और एजेंसी बदलने के बावजूद जिले के सैकड़ों स्कूलों में गर्ल्स टॉयलेट आज भी अधूरे पड़े हैं। हाईकोर्ट की तय डेडलाइन गुजरे एक साल से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन ज़मीनी हकीकत नहीं बदली। अब प्रशासन ने 8 मार्च की नई समय-सीमा तय की है।

सरकारी स्कूलों में शौचालय संकट, 508 स्कूल अब भी इंतजार में

दरअसल जिले के शासकीय स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं के नाम पर हालात बेहद चिंताजनक हैं। स्कूलों में शौचालयों की कम के चलते छात्राओं को आज भी भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। कई स्कूलों में छात्राएं मजबूरी में खुले में जाने को विवश हैं। । हाईकोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिए थे कि 15 जून 2025 तक सभी स्कूलों में शौचालयों की मरम्मत और नए निर्माण का काम पूरा किया जाए,लेकिन एक साल बाद भी आदेश हवा में ही नजर आ रहा है। विभागीय खींचतान इस देरी की बड़ी वजह बनकर सामने आई है। शुरुआत में शिक्षा विभाग ने निर्माण की जिम्मेदारी आरईएस को सौंपी और डेढ़ करोड़ रुपये भी जारी किए गए। काम समय पर शुरू नहीं हुआ तो एजेंसी बदलकर जिला पंचायत को जिम्मेदारी दी गई, लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात। मौजूदा स्थिति यह है कि 508 स्कूलों में गर्ल्स टॉयलेट आज भी अधूरे हैं।

कलेक्टर ने दिखाई सख्ती, 8 मार्च तक का दिया अल्टीमेटम

टीएल बैठक में कलेक्टर संजय अग्रवाल ने नाराजगी जाहिर करते हुए 8 मार्च तक हर हाल में काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं। सवाल साफ है। जब फंड की कोई कमी नहीं और हाईकोर्ट का आदेश भी मौजूद है, तो फिर छात्राओं को आज तक शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा क्यों नहीं मिल पाई।

जिले के सभी गर्ल्स स्कूलों में टॉयलेट का निर्माण प्रगति पर है।मार्च तक काम पूरा करने की तैयारी की जा रही है।
– विजय टांडे, जिला शिक्षा अधिकारी,बिलासपुर

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