ग्रामीणों ने नालों पर बनाए बोरी बंधान, गांवों में रुकेगा बारिश का पानी
सुरेश सिंह बैस
बिलासपुर 27 मई 2026/ जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देते हुए मस्तूरी जनपद पंचायत क्षेत्र के ग्रामीणों ने श्रमदान की अनूठी मिसाल पेश की है। कलेक्टर संजय अग्रवाल के अभिनव “मोर गांव मोर पानी” अभियान से प्रेरित होकर गांव-गांव में नालों पर बोरी बंधान तैयार किए जा रहे हैं, जिससे बारिश का पानी अब बहकर निकलने के बजाय गांवों में ही संरक्षित होने लगा है।
“मोर गांव मोर पानी” अभियान को मिला जनसहभागिता का मजबूत साथ
ग्रामीणों, किसानों और मनरेगा मजदूरों की सामूहिक भागीदारी से चल रहे इस अभियान ने जल संरक्षण की दिशा में नई उम्मीद जगाई है। मस्तूरी क्षेत्र के ग्राम पंचायत निरतु, कुकदा, बोहारडीह, लोहरसी, कुकुर्दी केरा, रैलहा, जैतपुर, नेवारी, जलसों, बकरकुदा, जुहली, खम्हरिया, मड़ई, सोंठी, पंधी, देवरी, बरेली, कौव्वताल और झलमला सहित अनेक गांवों में बोरी बंधान का कार्य तेज गति से जारी है। कई स्थानों पर कार्य पूर्ण हो चुका है, जबकि अन्य गांवों में निर्माण कार्य लगातार जारी है।
गांवों में रुकेगा पानी, सुधरेगा भू-जल स्तर
ग्रामीणों का कहना है कि पहले बारिश का अधिकांश पानी तेज बहाव के साथ नालों से निकल जाता था, जिससे गर्मी के दिनों में जल संकट गहरा जाता था। अब बोरी बंधान बनने से पानी गांवों में ही रुकने लगा है। इससे खेतों में नमी बनी रहेगी, भू-जल स्तर सुधरेगा तथा सिंचाई व्यवस्था मजबूत होगी। ग्रामीणों का मानना है कि यह अभियान केवल जल संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों में सामूहिक जिम्मेदारी और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ा रहा है।
कोसगाई नाला बना प्रेरणा का केंद्र
ग्राम कुकदा के ग्रामीण हेमंत पटेल ने बताया कि कोसगाई नाला पर बनाए गए बोरी बंधान से कुकदा के साथ-साथ मड़ई और बिटकुला गांव के किसानों को भी सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल सकेगा। इसके अलावा ग्रामीणों एवं पशुओं के लिए निस्तारी सुविधा भी बेहतर होगी। उन्होंने कहा कि यह प्रयोग आने वाले समय में अन्य गांवों के लिए भी प्रेरणादायक मॉडल साबित होगा।
जनसहभागिता से मजबूत हुआ अभियान
मनरेगा मजदूरों, किसानों और युवाओं ने एकजुट होकर नालों में बोरी बंधान तैयार किए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रत्येक गांव में इसी तरह छोटे-छोटे जल संरक्षण कार्य किए जाएं, तो भविष्य में जल संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है। मस्तूरी जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जेआर भगत ने बताया कि “मोर गांव मोर पानी” अभियान के तहत पूरे क्षेत्र में व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। अब तक 17 नालों को बोरी बंधान के लिए चिन्हांकित किया गया है, जिनमें कई स्थानों पर कार्य प्रारंभ हो चुका है तथा अनेक जगहों पर कार्य पूर्ण भी हो गया है। शासन की मंशा है कि वर्षा जल को गांवों में ही रोका जाए, ताकि भू-जल स्तर में सुधार हो और किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सके।
जनपद पंचायत मस्तूरी की कार्यक्रम अधिकारी रुचि विश्वकर्मा ने बताया कि अभियान के अंतर्गत ग्रामीण अब जल संरक्षण गतिविधियों में सक्रिय रूप से भागीदारी निभा रहे हैं। चिन्हांकित नालों में से 8 स्थानों पर कार्य पूर्ण किया जा चुका है, जबकि अन्य जगहों पर चरणबद्ध तरीके से कार्य जारी है।
जल संरक्षण की नई नजीर बनेगा बोरी बंधान
ग्रामीणों का विश्वास है कि कोसगाई नाला पर किया गया यह बोरी बंधान आने वाले समय में जल संरक्षण की बड़ी मिसाल बनेगा। इससे खेतों की सिंचाई, कुओं एवं हैंडपंपों के जलस्तर को बनाए रखने में मदद मिलेगी और गर्मी के मौसम में पेयजल संकट से भी राहत मिलने की संभावना है।
बोरी बंधान से होंगे ये बड़े लाभ
* भू-जल स्तर में सुधार होगा
कुएं, हैंडपंप और तालाब लंबे समय तक पानी से भरे रहेंगे
खेतों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा।
* ग्रामीणों और पशुओं के लिए निस्तारी सुविधा बेहतर होगी
बारिश का पानी गांवों में ही संरक्षित रहेगा।
* गर्मी में जल संकट कम होगा
फसलों के उत्पादन में वृद्धि की संभावना बढ़ेगी।
“मोर गांव मोर पानी” अभियान के तहत मस्तूरी क्षेत्र में शुरू हुई यह पहल अब ग्रामीण जल प्रबंधन और सामूहिक श्रमदान की प्रेरक मिसाल बनती दिखाई दे रही है।





