मध्यप्रदेश से अवैध शराब लेकर छत्तीसगढ़ में घुस रही बोलेरो ने जवानों को कुचलने की कोशिश की, बैरियर तोड़कर फरार हुई गाड़ी छोड़कर आरोपी भाग निकले, लेकिन साइबर ट्रैकिंग और पुलिस की लगातार निगरानी ने आखिरकार पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया।
बलरामपुर-रामानुजगंज 6 जून 2026/ अवैध शराब तस्करी के एक सनसनीखेज मामले में रघुनाथनगर और बलांगी पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए डेढ़ महीने से फरार चल रहे दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। मामला 22 अप्रैल 2026 का है, जब बोलेरो क्रमांक CG 15 A 6984 का चालक मध्यप्रदेश के बैढ़न से अवैध शराब लेकर रघुनाथनगर की ओर आ रहा था। तुगवा बैरियर पर तैनात जवानों ने वाहन को रोकने का संकेत दिया, लेकिन चालक ने रुकने के बजाय बैरियर को टक्कर मार दी और जवानों पर वाहन चढ़ाने की कोशिश करते हुए तेज रफ्तार में भाग निकला। सूचना मिलते ही थाना रघुनाथनगर और चौकी बलांगी पुलिस ने घेराबंदी की। पुलिस दबाव बढ़ता देख चालक रघुनाथनगर पहुंचने से पहले एक बंद पेट्रोल पंप के पास कच्चे रास्ते में बोलेरो को दुर्घटनाग्रस्त अवस्था में छोड़कर फरार हो गया। मामले में चौकी बलांगी में अपराध क्रमांक 37/26 धारा 109, 124(6) बीएनएस तथा थाना रघुनाथनगर में अपराध क्रमांक 38/26 धारा 34(2) आबकारी अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की गई।
पुलिस अधीक्षक वैभव वेंकट और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विश्व दीपक त्रिपाठी के मार्गदर्शन में रघुनाथनगर, बलांगी और साइबर टीम लगातार आरोपियों की तलाश में जुटी रही। साइबर विश्लेषण के दौरान पता चला कि मुख्य आरोपी देवनंदन कुशवाहा (25 वर्ष), निवासी हरदी बड़ा, थाना रघुनाथनगर घटना के बाद झारखंड के गढ़वा जिले के डंडई स्थित अपने ससुराल में छिपा हुआ है। पुलिस ने दबिश देकर उसे हिरासत में लिया। पूछताछ में उसने खुलासा किया कि उसने बोलेरो सस्ते दाम में खरीदी थी और शराब तस्करी के लिए उसका उपयोग करता था। उसने बताया कि बैढ़न स्थित कचनी शराब भट्टी के मैनेजर मृत्युंजय जायसवाल (29 वर्ष), निवासी कोटल पोखर, जिला साहिबगंज, झारखंड से 94 हजार रुपये का भुगतान कर शराब खरीदी थी, जिसे वह सूरजपुर के रेवटी निवासी रवि गुप्ता को बेचने ले जा रहा था। इसके बाद पुलिस ने साइबर सहायता से दूसरे आरोपी मृत्युंजय जायसवाल को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसमें शराब बिक्री और भुगतान की पुष्टि हुई। पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर दोनों आरोपियों को 6 जून 2026 को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें रामानुजगंज जेल भेज दिया गया। बहरहाल, यह कार्रवाई बताती है कि तकनीक और पुलिस की संयुक्त निगरानी से सीमापार तस्करी करने वाले अपराधी भले कुछ समय तक बच निकलें, लेकिन कानून की पकड़ से आखिरकार नहीं बच सकते।






