रायपुर 20 मई 2026/ छत्तीसगढ़ में अपराध, ट्रैफिक और वीआईपी मूवमेंट के बढ़ते दबाव के बीच अब पुलिस को पहले से कहीं ज्यादा ताकत मिलने जा रही है। राजधानी रायपुर में लागू कमिश्नरेट सिस्टम के बाद अब दुर्ग और बिलासपुर में भी पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है। गृह मंत्री विजय शर्मा ने साफ संकेत दिए हैं कि राज्य सरकार दोनों बड़े शहरों में कानून-व्यवस्था को तेज और मजबूत बनाने के लिए यह बड़ा प्रशासनिक बदलाव करने जा रही है। लंबे समय से औद्योगिक गतिविधियों, बढ़ती आबादी, ट्रैफिक दबाव और अपराध नियंत्रण को लेकर दुर्ग-भिलाई और बिलासपुर में कमिश्नरेट सिस्टम की मांग उठ रही थी, जिसे अब सरकार गंभीरता से आगे बढ़ा रही है। अभी रायपुर को छोड़कर अधिकांश जिलों में पुलिस व्यवस्था एसपी मॉडल पर चलती है, जहां कई अहम प्रशासनिक और कानूनी फैसलों के लिए पुलिस को कलेक्टर पर निर्भर रहना पड़ता है। धारा 144 लागू करने से लेकर मजिस्ट्रेट शक्तियां और कई लाइसेंस संबंधी अधिकार प्रशासन के पास रहते हैं, लेकिन कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने के बाद जिले में पुलिस का मुखिया पुलिस आयुक्त यानी कमिश्नर होगा और कानून-व्यवस्था से जुड़े कई फैसले पुलिस सीधे और तेजी से ले सकेगी। सरकार का मानना है कि तेजी से शहरी स्वरूप ले चुके दुर्ग और बिलासपुर में अब पारंपरिक पुलिसिंग मॉडल पर्याप्त नहीं रह गया है। बढ़ते अपराध, ट्रैफिक जाम, संवेदनशील गतिविधियां और लगातार बढ़ते वीआईपी मूवमेंट को देखते हुए त्वरित निर्णय क्षमता वाली व्यवस्था जरूरी हो गई थी। गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि रायपुर में कमिश्नरेट प्रणाली के सकारात्मक परिणाम मिले हैं और इसी अनुभव के आधार पर अब इसे अन्य बड़े शहरों तक विस्तार देने की तैयारी है। सूत्रों के मुताबिक कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने के बाद पुलिस को ज्यादा प्रशासनिक और कानूनी अधिकार मिलेंगे, जिससे अपराध नियंत्रण, भीड़ प्रबंधन और आपात स्थितियों में फैसले लेने की प्रक्रिया पहले से कहीं ज्यादा तेज हो जाएगी। बहरहाल, छत्तीसगढ़ में पुलिसिंग के इस नए मॉडल को कानून-व्यवस्था की दिशा में बड़ा और निर्णायक बदलाव माना जा रहा है, जिसका सीधा असर अपराधियों पर दबाव और आम लोगों की सुरक्षा पर दिखाई दे सकता है।





