बसना/महासमुंद।
अर्नव चक्रवात के प्रभाव से तेज हवाओं और बारिश ने महासमुंद जिले के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। बसना विधानसभा क्षेत्र के सिरको, छान्दनपुर, अरेकेल, कुडेकेल और जमड़ी सहित विभिन्न गांवों में धान की फसल को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आ रही हैं। वहीं, जिले के अन्य क्षेत्रों से भी लगभग ऐसी ही स्थिति की जानकारी मिल रही है। खेतों में खड़ी धान की फसल तेज हवा के कारण गिरने लगी है, जिससे किसानों को उत्पादन प्रभावित होने और आर्थिक नुकसान का डर सता रहा है।
किसानों के लिए यह स्थिति इसलिए भी चिंताजनक है, क्योंकि धान की फसल तैयार होने में लगभग एक माह शेष था और खेती की अधिकांश लागत पहले ही लगाई जा चुकी थी। बीज, खाद, कीटनाशक, मजदूरी और अन्य कृषि कार्यों पर पूंजी खर्च करने के बाद किसान अच्छी पैदावार की उम्मीद लगाए बैठे थे। लेकिन अचानक बदले मौसम ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेरने की आशंका पैदा कर दी है।
जिलेभर में फसल प्रभावित होने की आशंका
तेज हवा और बारिश के कारण खेतों में धान के पौधों के गिरने की स्थिति सामने आ रही है। फसल की इस अवस्था में पौधों के गिरने से कटाई में परेशानी होने के साथ उत्पादन और गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। यदि खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहता है, तो नुकसान बढ़ने की आशंका है।
बसना क्षेत्र के साथ महासमुंद जिले के विभिन्न हिस्सों से भी फसलों पर मौसम की मार पड़ने की जानकारी मिल रही है। हालांकि, जिले में कुल कितने क्षेत्र में फसल प्रभावित हुई है और वास्तविक नुकसान कितना हुआ है, इसकी स्थिति आधिकारिक सर्वे के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
खेती की लागत डूबी तो कर्ज चुकाना होगा मुश्किल
किसानों की चिंता केवल फसल गिरने तक सीमित नहीं है। खरीफ सीजन में खेती के लिए बड़ी रकम खर्च करने वाले किसानों को अब अपनी लागत वापस मिलने की चिंता सता रही है। अनेक किसान फसल से होने वाली आमदनी के भरोसे कृषि संबंधी कर्ज चुकाने और परिवार की जरूरतें पूरी करने की योजना बनाते हैं। ऐसे में यदि उत्पादन प्रभावित होता है, तो किसानों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।
सर्वे कराकर राहत देने की मांग
मौसम की मार से चिंतित किसानों ने शासन-प्रशासन से प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल निरीक्षण कराने की मांग की है। किसानों का आग्रह है कि कृषि विभाग और राजस्व विभाग की टीमें गांव-गांव पहुंचकर फसलों की स्थिति का जायजा लें तथा वास्तविक क्षति का आकलन करें। साथ ही, प्रभावित किसानों को शासन के नियमानुसार राहत और मुआवजा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की जाए।
प्रशासनिक सर्वे से स्पष्ट होगी नुकसान की वास्तविक तस्वीर
फिलहाल महासमुंद जिले के किसानों की नजर मौसम की स्थिति और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है। जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में फसल क्षति की जानकारी सामने आने के बीच व्यापक सर्वे कराया जाना जरूरी है, ताकि प्रभावित रकबे और नुकसान की वास्तविक स्थिति सामने आ सके। किसानों को उम्मीद है कि शासन-प्रशासन उनकी परेशानी को गंभीरता से लेते हुए समय पर सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में आवश्यक कदम उठाएगा।






