सुरेश सिंह बैस
बिलासपुर 23 मई 2026/ छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से एक सराहनीय और नई पहल की जा रही है, जिसके तहत अब सरकारी स्कूलों में ‘बुक बैंक’ स्थापित किए जाएंगे। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पुरानी किताबों का पुनः उपयोग करना है ताकि किसी भी परिस्थिति में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो। इस व्यवस्था को इसी शिक्षा सत्र से लागू किया जा रहा है, जिसके लिए लोक शिक्षण संचालनालय रायपुर ने सभी संयुक्त संचालक और जिला शिक्षा अधिकारियों को आवश्यक आदेश जारी कर दिए हैं।
बिलासपुर के जिला शिक्षा अधिकारी विजय तांडे के अनुसार, यह योजना फिलहाल कक्षा पहली से लेकर कक्षा दसवीं तक के लिए लागू होगी, जहाँ छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक और एनसीईआरटी (NCERT) पाठ्यक्रम की पुस्तकें बच्चों को निःशुल्क बांटी जाती हैं।
इस नई व्यवस्था के तहत, बच्चों को वितरित की गई
पाठ्यपुस्तकों को शैक्षणिक सत्र समाप्त होने (वार्षिक परीक्षा) के बाद वापस ले लिया जाएगा। इसके बाद इन किताबों को कक्षावार और विषयवार एकत्र किया जाएगा। इस दौरान विशेष रूप से यह ध्यान रखा जाएगा कि कटी-फटी या अनुपयोगी किताबों को अलग कर दिया जाए और जो पुस्तकें दोबारा इस्तेमाल करने योग्य हैं, उन्हें स्कूल में ही सुरक्षित व संभालकर रखा जाए। इस पूरी प्रक्रिया और बुक बैंक स्थापित करने की मुख्य जिम्मेदारी संस्था प्रमुख (प्रिंसिपल/हेडमास्टर) की होगी, जिनके निर्देशन में शिक्षक बच्चों को किताबों को सुरक्षित रखने और सत्र के अंत में वापस करने के लिए प्रेरित करेंगे।
अधिकारियों के मुताबिक, अक्सर यह देखा जाता है कि नया शिक्षा सत्र शुरू होने के बाद भी स्कूलों तक समय पर नई पाठ्यपुस्तकें नहीं पहुँच पाती हैं। पाठ्यपुस्तकों की अनुपलब्धता के कारण शिक्षकों को अध्यापन कराने में भारी दिक्कत आती है और बिना किताबों के बच्चों को पढ़ाना संभव नहीं हो पाता। इस हर साल होने वाली समस्या से निपटने के लिए ही ‘बुक बैंक’ की योजना पर काम शुरू किया गया है। नए सत्र की शुरुआत में यदि नई किताबें आने में देरी होती है, तो शिक्षक बुक बैंक में सुरक्षित रखी गई इन्हीं पुरानी किताबों को बच्चों में बाँट देंगे ताकि समय पर कक्षाएं शुरू हो सकें और किताबों की कमी की वजह से पढ़ाई का नुकसान न हो। इसके साथ ही, बच्चों में भी इस अनूठी परंपरा को विकसित किया जाएगा कि वे किताबों को संभालकर रखें ताकि अगले वर्ष वे अन्य छात्रों के काम आ सकें।





