रायपुर 30 मई 2026/ पत्रकार सिर्फ खबरें नहीं लिखते, वे लोकतंत्र की नब्ज़ को ज़िंदा रखते हैं और सत्ता से लेकर समाज तक हर व्यवस्था को आईना दिखाने का काम करते हैं। इसी संदेश के साथ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने पर राजधानी रायपुर के वीआईपी रोड स्थित राम मंदिर परिसर के सुंदर सदन में आयोजित ‘पत्रकारिता गौरव मार्तंड उत्सव’ में पत्रकारों को लोकतंत्र का सच्चा सेनानी बताया। उन्होंने कहा कि मीडिया की सकारात्मक आलोचना केवल व्यक्तियों को नहीं, बल्कि सरकार और प्रशासन को भी आत्ममंथन कर बेहतर काम करने की प्रेरणा देती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि माता कौशल्या और भगवान राम के ननिहाल की धरती छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता की गौरवशाली परंपरा पर आधारित यह आयोजन बेहद सराहनीय है। उन्होंने रायपुर प्रेस क्लब को बधाई देते हुए कहा कि यह देश के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित प्रेस क्लबों में शामिल है, जिसकी विरासत प्रेरणादायी रही है।
मुख्यमंत्री साय ने रायपुर की पत्रकारिता परंपरा को याद करते हुए कहा कि इस शहर ने पत्रकारिता जगत को कई शिखर पुरुष दिए हैं। उन्होंने मधुकर खेर, मायाराम सुरजन, ललित सुरजन, रमेश नैय्यर और बबन प्रसाद मिश्र सहित अनेक वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का स्मरण करते हुए उनके योगदान को नमन किया। उन्होंने कहा कि मीडिया लोकतंत्र की आधारशिला है और स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ लड़ाई तक पत्रकारिता ने हमेशा परिवर्तन का नेतृत्व किया है। मुख्यमंत्री ने 30 मई 1826 को कोलकाता से जुगल किशोर शुक्ल द्वारा प्रकाशित देश के पहले हिंदी समाचार पत्र ‘उदंत मार्तंड’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इसी अखबार ने हिंदी पत्रकारिता की मजबूत नींव रखी और आज 200 वर्षों की यह गौरवशाली यात्रा पूरे देश के लिए गर्व का विषय है।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने भारतीय सनातन परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि देवर्षि नारद को आदि पत्रकार माना जाता है और यही कारण है कि पत्रकार समुदाय नारद जयंती को सम्मानपूर्वक मनाता है। उन्होंने इसे रोचक संयोग बताते हुए कहा कि ‘उदंत मार्तंड’ का प्रकाशन भी नारद जयंती के दिन शुरू हुआ था, जो भारतीय पत्रकारिता की सांस्कृतिक और वैचारिक जड़ों को दर्शाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय पत्रकारिता ने राष्ट्रवादी चेतना को मजबूत करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। महात्मा गांधी, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, माधवराव सप्रे और सुभाषचंद्र बोस जैसे स्वतंत्रता सेनानियों ने पत्रकारिता को जनजागरण और राष्ट्रीय चेतना का सबसे प्रभावी माध्यम बनाया। उन्होंने कहा कि जब भी भारतीय पत्रकारिता का इतिहास लिखा जाएगा, तब छत्तीसगढ़ का नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज होगा।
मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ के महान पत्रकार और साहित्यकार माधवराव सप्रे का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने ‘छत्तीसगढ़ मित्र’ के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में लोगों को जागृत और संगठित करने का महत्वपूर्ण कार्य किया। उन्होंने भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए कहा कि अटल जी की पत्रकारिता ने राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय चेतना की ऐसी अलख जगाई, जिसने लाखों लोगों को प्रेरित किया। ‘स्वदेश’ और ‘राष्ट्रधर्म’ जैसे प्रकाशनों ने राष्ट्रीय अस्मिता को जन-जन तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार मोदी की गारंटियों को धरातल पर उतार रही है और जनकल्याणकारी योजनाओं को आम लोगों तक पहुंचाने में मीडिया की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने पत्रकारों को लोकतंत्र का सशक्त स्तंभ बताते हुए कहा कि एक जागरूक, निष्पक्ष और जिम्मेदार मीडिया ही समाज और शासन के बीच विश्वास का मजबूत पुल बन सकता है।
लोकतंत्र की ताकत सिर्फ संसद और सरकार में नहीं, बल्कि उन कलमों में भी बसती है जो सच लिखने का साहस रखती हैं और समाज को जागरूक बनाने का संकल्प निभाती हैं।






