सुरेश सिंह बैस// रायपुर 28 अप्रैल 2026/ प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी ने आम जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। तापमान लगातार 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते सावधानी नहीं बरती गई, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
धूप और लू से बचाव जरूरी
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. श्रीकांत गिरी ने सलाह दी है कि लोग अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें और धूप से बचाव के उपाय अपनाएं। लापरवाही बरतने पर उल्टी, दस्त, बुखार और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। दोपहर के समय बाहर निकलने पर त्वचा झुलसने और शरीर में जलन की शिकायतें बढ़ रही हैं। महिलाओं में इसका असर अधिक देखा जा रहा है।
तापमान में लगातार वृद्धि
पिछले एक सप्ताह के आंकड़ों पर नजर डालें तो अधिकतम तापमान 41 से 44 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है, जबकि न्यूनतम तापमान भी 25 से 29 डिग्री के बीच दर्ज किया जा रहा है। यह स्थिति सामान्य से अधिक गर्मी का संकेत दे रही है।
*एक नजर तापमान पर*
28 अप्रैल: 44.4c / 29.6
27 अप्रैल: 44.4c / 29.2
26 अप्रैल: 44°C / 29°C
25 अप्रैल: 44°C / 28°C
24 अप्रैल: 43°C / 29°C
23 अप्रैल: 43°C / 28°C
22 अप्रैल: 42°C / 26°C
प्री-मानसून बारिश में कमी से कृषि प्रभावित
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक डॉ. एस.आर. पटेल के अनुसार, प्री-मानसून बारिश में कमी और अनियमितता के कारण मिट्टी की नमी प्रभावित हो रही है। इससे खरीफ फसलों की बुवाई समय पर नहीं हो पा रही और उत्पादन पर भी असर पड़ने की आशंका है। उन्होंने सुझाव दिया कि सूखा सहनशील फसल किस्मों को अपनाने के साथ वर्षा जल संरक्षण और उन्नत कृषि तकनीकों पर ध्यान देना जरूरी है।
घटती हरियाली बढ़ा रही गर्मी
वैज्ञानिकों का मानना है कि तीव्र गर्मी की एक प्रमुख वजह लगातार घटती हरियाली और असंतुलित भूमि उपयोग है। विशेषज्ञ अजीत विलियम्स के अनुसार, शहरीकरण के साथ हरित क्षेत्रों का विस्तार बेहद आवश्यक है। बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण और शहरों में ग्रीन बेल्ट का निर्माण तापमान नियंत्रण में सहायक हो सकता है।
समाधान की दिशा में कदम जरूरी
विशेषज्ञों ने एक स्वर में कहा है कि बढ़ती गर्मी से निपटने के लिए व्यक्तिगत सतर्कता के साथ-साथ सामूहिक प्रयास भी जरूरी हैं। जल संरक्षण, हरियाली बढ़ाना और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाना ही इस चुनौती से निपटने का प्रभावी उपाय है।




