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    छत्तीसगढ़ HD MAHANTBy HD MAHANTApril 20, 2026

    पंडित श्याम लाल चतुर्वेदी जनशती समारोह – शोध परक ग्रंथ है ” पद्मश्री पंडित श्यामलाल चतुर्वेदी स्मृति ग्रंथ “- डॉ राघवेंद्र दुबे

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    बिलासपुर। पावन छत्तीसगढ़ महतारी के आँचल में अनेक विभूतियों ने जन्म लिया और अपने अद्भुत प्रतिभाशाली व्यक्तित्व एवं कृतित्व से पूरे छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित किया है । इसी क्रम में एक नाम देश के सुविख्यात पत्रकार एवं साहित्यकार श्रद्धेय पद्मश्री पंडित श्यामलाल चतुर्वेदी जी का भी विशेष रूप से उल्लेखनीय है । बहुमुखी प्रतिभा के धनी पंडित श्यामलाल चतुर्वेदी जी का सरल सहज और मूल छत्तीसगढ़िया मिलनसार स्वभाव उनके संपर्क में आने वाले का मन मोह लेता था । वे जहाँ देश के सुविख्यात पत्रकार थे वहीं वे हिन्दी एवं छत्तीसगढ़ी के सुप्रसिद्ध कवि साहित्यकार भी थे । उनकी प्रतिभा का आकलन करते हुए उन्हें छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के प्रथम अध्यक्ष का गुरूतर दायित्व दिया गया था ,वहीं भारत सरकार द्वारा पद्मश्री की उपाधि से अलंकृत किया गया था ।वे छत्तीसगढ़ ही नहीं पूरे देश के अनेक संस्थाओं समितियों से संबद्ध रहे तथा सम्मानित होते रहे ।विगत दिनों उनके सुपुत्र वरिष्ठ पत्रकार सूर्यकांत चतुर्वेदी जी एवं शशिकांत चतुर्वेदी जी के संयोजन में आयोजित जन्मशती समारोह का भव्य आयोजन लखीराम अग्रवाल सभागार बिलासपुर में अरूण साव उप मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ के मुख्य आतिथ्य, जगदीश उपासने की अध्यक्षता में तथा सुप्रसिद्ध जन प्रतिनिधियों, साहित्यकार एवं पत्रकारगणों के आतिथ्य में तथा विशेष वक्ता के रूप में डाॅ विनय कुमार पाठक पूर्व अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग एवं कुलपति थावे विद्यापीठ गोपालगंज बिहार एवं वरिष्ठ पत्रकार विश्वेश ठाकरे की उपस्थिति में तथा सुप्रसिद्ध पत्रकार डाॅ वैभव बेमेतरिहा के सफल संचालन और परिवारजनों,साहित्यकार ,कलाकार,पत्रकार एवं नागरिकगणों की उपस्थिति में किया गया ।
    इस अवसर पर पद्मश्री पंडित श्यामलाल चतुर्वेदी जी पर केन्द्रित स्मृति ग्रंथ का विमोचन सम्मानीय अतिथियों द्वारा किया गया । इस शोध परक ग्रंथ में देश एवं प्रदेश के पुरोधाओं सहित वर्तमान के साहित्यकार पत्रकार एवं परिवारजनों के कुल 99 आलेखों सहित उनके कुछ विशिष्ट निबंधों को शामिल किया गया है । इस शोध परक ग्रंथ का कुशल संपादन वरिष्ठ पत्रकार रूद्र अवस्थी ने किया है । इस ग्रंथ में बहुमुखी प्रतिभा के धनी पंडित श्यामलाल चतुर्वेदी जी की स्मृति को नमन् करते हुए जहाँ माननीय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी,मान,डाॅ रमन सिंह अध्यक्ष छत्तीसगढ़ विधानसभा,दीपक कुमार तिवारी न्यायाधीश छ ग उच्च न्यायालय बिलासपुर, अमर अग्रवाल जी विधायक बिलासपुर विधानसभा,डाॅ धर्मजीत सिंह विधायक तखतपुर विधानसभा, सुशांत शुक्ला विधायक बेलतरा विधानसभा,दिलीप लहरिया विधायक मस्तुरी विधानसभा, अटल श्रीवास्तव विधायक कोटा विधानसभा,पूजा विधानी महापौर नगर पालिक निगम बिलासपुर, प्रो वी के सारस्वत कुलपति पंडित सुन्दर लाल शर्मा विश्व विद्यालय ने अपनी हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं वहीं इस ग्रंथ के संयोजकद्वय शशिकांत एवं सूर्यकांत चतुर्वेदी जी ने उनकी विशिष्ट स्मृतियों को व्यक्त करते हुए इस ग्रंथ के प्रकाशन के उद्देश्य को स्पष्ट किया है । इसमें शामिल अपने आलेख में देश के सुविख्यात भाषाविद् समीक्षक डाॅ विनय कुमार पाठक पूर्व अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग एवं कुलपति थावे विद्यापीठ गोपालगंज बिहार ने उनकी कृति “राम वनवास ” का विवेचन करते हुए लिखा है कि–” पंडित श्याम लाल चतुर्वेदी प्रणीत प्रथम प्रबंध काव्य-” राम वनवास” सन 1955 की प्रकाशित महत्वपूर्ण कृति है इस दृष्टि से आज तक इस रचना का मूल्यांकन नहीं हो सका था । छत्तीसगढ़ी प्रबंध काव्य परंपरा में इस लघु खंड काव्य का उल्लेखनीय स्थान है । संवाद संयोजना इसकी विशेषता है जो इसे इतर छत्तीसगढ़ी प्रबंध काव्य से पृथक करती है । संवादों के माध्यम से भावाभिव्यक्ति तथा कथात्मक सगुंफन यद्यपि हिंदी काव्य के लिए नवीन प्रवृत्ति है तथापि उसका बीज” राम- वनवास ” में मिलता है । संवाद- सगुंफित राम– वनवास पारंपरिक प्रबंध काव्य की विशेषताओं को समेटे हुए आंचलिकता के कारण उल्लेखनीय है । करमा लोक छंद में निबद्ध एवं 72 पदों में आबद्ध यह कृति यद्यपि राम- केवट संवादों के मार्मिक प्रसंगों के साथ वनवास काल की प्रमुख घटनाओं को संक्षिप्त ढंग से संजोती है तथापि छत्तीसगढ़ी संस्कृति और पर्यावरण को उजागर करती है । करमा लोक छंद को कवि “करमा तार म ” कह कर कबीर की “झीनी -झीनी बीनी चदरिया “का स्मरण कर देता है । मंगलाचरण के रूप में एक पृथक पद “सरस्वती के सुमरना” है ।
    वहीं इस ग्रंथ के कुशल संपादक वरिष्ठ पत्रकार रूद्र अवस्थी ने इस ग्रंथ के उद्देश्य को अपनी संपादकीय में उल्लेखित किया है कि–” छत्तीसगढ़ के माटी पुत्र पंडित श्यामलाल चतुर्वेदी की स्मृति में ग्रंथ का प्रकाशन कुछ ऐसा काम है जैसे समूचे छत्तीसगढ़ के आकार , प्रकार ,स्वभाव ,व्यवहार ,चिंतन ,जनजीवन, भूत, भविष्य ,वर्तमान ,कर्मठता ,निरंतरता, खुशहाली से लेकर उपेक्षा तक सब कुछ एक किताब में समेट लेना है। क्योंकि श्यामलाल जी का व्यक्तित्व असल छत्तीसगढ़ से मेल खाता है और उन्हें छत्तीसगढ़ का पर्याय कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी । पत्रकारिता में चतुर्वेदी जी के साथ काम करने का जो अनुभव मिला उस आधार पर चतुर्वेदी जी की शख्सियत को सामने रखने से हमारे छत्तीसगढ़ का नक्शा सामने उभर कर आता है । छत्तीसगढ़ जी हां । देश के नक्शे में एक सूबा जो अपनी सीमाओं के दायरे के हिसाब से बहुत बड़ा तो नहीं है और दूर से देखने वालों को बहुत छोटा भी नजर आता है , लेकिन कोई नजदीक आकर नजर डाले तो जमीन के इस हिस्से में उसे सब कुछ दिखाई देगा । उन्होंने आगे लिखा है कि ऐसी शख्सियत के मालिक पंडित श्याम लाल जी पत्रकारिता से लेकर साहित्य समाज भाषा संस्कृति को अपने हिस्से का बहुत कुछ दे गए । अपने जीवन काल में उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों के दिलों में राज किया और सरकार ने पद्मश्री से विभूषित किया ।जन्मशती पर उनके योगदान को याद करने का एक पुण्य अवसर है । वे भले ही हम सबके बीच नहीं हैं लेकिन उनकी यादें अभी भी लोगों के दिलों दिमाग में जीवित हैं । जन्मशती पर इन्हीं यादों को शब्द देकर लोगों के बीच प्रस्तुत करने के मकसद से स्मृति ग्रंथ की रूपरेखा बनी । यह हमारा सौभाग्य है कि पंडित श्यामलाल चतुर्वेदी को करीब से जानने वाले जितने भी लोगों से हमारा संपर्क हुआ सभी ने अपनी स्मृतियों को शब्दों में पिरोकर हमें अपना अमूल्य सहयोग प्रदान किया । हमने पंडित श्याम लाल चतुर्वेदी जी के व्यक्तित्व पर केंद्रित ऐसे लेख भी संकलित करने का प्रयास किया जो वर्षों पहले लिखे गए थे,जिसे स्मृति ग्रंथ में सभा प्रकाशित कर रहे हैं ,जैसे बिलासपुर शहर के एक चौराहे पर पंडित श्यामलाल चतुर्वेदी जी की आदमकद प्रतिमा प्रेरणा पूंजी की तरह स्थापित है ,और उनके नाम पर बनी स्मार्ट सड़क राहगीरों को इस बात का एहसास कराती रहेगी कि एक छोटे से गांव से निकलकर एक सामान्य व्यक्ति किन रास्तों से गुजर कर इतनी ऊंचाइयों तक पहुंचा ।कुछ इसी तरह यह स्मृति ग्रंथ आने वाली पीढ़ी को महान व्यक्तित्व की जीवन यात्रा का बोध कराता रहे इस उद्देश्य से हमने स्मृति ग्रंथ में गागर में सागर भरने की कोशिश की है।इस तरह बहुमुखी प्रतिभा के धनी पद्मश्री पंडित श्यामलाल चतुर्वेदी जी पर केन्द्रित इस शोध परक ग्रंथ के प्रकाशन एवं विमोचन के लिए संयोजक द्वय शशिकांत चतुर्वेदी जी एवं सूर्यकांत चतुर्वेदी जी तथा कुशल संपादक वरिष्ठ पत्रकार रूद्र अवस्थी तथा समस्त लेखकों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देता हूँ । यह विश्वास है कि ये ग्रंथ पाठकों तथा शोधार्थियों एवं अध्येताओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण एवं उपयोगी साबित होगी ।

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