धमतरी 6 मई 2026/ सांकरा चेक पोस्ट पर रात जैसे ही गहराई, सफेद रंग की एक महेन्द्रा TUV 300 ने नाके के करीब आते ही माहौल बदल दिया… पुलिस की नजर गाड़ी पर टिकी और अगले ही पल बैरिकेड बंद हो चुके थे। अंदर बैठे तीन चेहरे घबराए हुए थे, लेकिन उन्हें शायद अंदाजा नहीं था कि इस बार धमतरी पुलिस सिर्फ चेकिंग नहीं, पूरे अंतर्राज्यीय गांजा नेटवर्क की सांसें रोकने निकली है। गाड़ी रुकी, दरवाजे खुले और फिर शुरू हुई वो तलाशी जिसने डिक्की के भीतर छिपे 44 पैकेटों का राज बाहर ला दिया। पैकेट खुलते गए और हवा में गांजे की गंध फैलती गई… कुल 37 किलो 800 ग्राम गांजा, जिसकी कीमत करीब 18 लाख 90 हजार रुपये बताई गई। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई, क्योंकि पुलिस की नजर सिर्फ माल पर नहीं बल्कि उस पूरे रास्ते पर थी जहां से ओडिशा का जहर महाराष्ट्र पहुंचाया जा रहा था। पूछताछ शुरू हुई तो तीनों आरोपियों की जुान खुल गई। सामने आया कि भवानीपटना ओडिशा से खरीदा गया गांजा नासिक महाराष्ट्र में खपाने ले जाया जा रहा था। गिरफ्तार आरोपियों में अजय नंदू जाधव पिता नंदू जाधव उम्र 27 वर्ष निवासी राजनगांव 14 चारी रोड राहता जिला अहमदनगर महाराष्ट्र, मनोहर बालाजी कांबले पिता बालाजी कांबले उम्र 35 वर्ष निवासी नगर देवी मंदिर परिसर शिंदे नासिक रोड जिला नासिक महाराष्ट्र और अंतावन राजू पगारे पिता राजू सयाजी पगारे उम्र 19 वर्ष निवासी गौतम नगर राहता जिला अहमदनगर महाराष्ट्र शामिल हैं। पुलिस ने सिर्फ गांजा ही नहीं पकड़ा बल्कि तस्करी में इस्तेमाल महेन्द्रा TUV 300 वाहन, चार मोबाइल फोन समेत कुल 25 लाख 30 हजार रुपये की संपत्ति जब्त कर ली। सबसे बड़ा झटका इसलिए माना जा रहा है क्योंकि यह कार्रवाई उस समय हुई जब 24 घंटे पहले ही इसी सांकरा नाके पर 54 किलो 970 ग्राम गांजा पकड़कर धमतरी पुलिस ने तस्करों की कमर तोड़ी थी। यानी महज एक दिन में 92 किलो 770 ग्राम गांजा जब्त कर पुलिस ने साफ कर दिया कि सीमावर्ती रास्तों पर अब हर पहिया शक के घेरे में है। सूत्रों के मुताबिक एसपी धमतरी खुद लगातार नाकों का निरीक्षण कर रहे थे, जवानों को ब्रीफ कर रहे थे और हर संदिग्ध वाहन की बारीकी से जांच के निर्देश दे रहे थे। उसी सख्ती का नतीजा रहा कि ओडिशा-महाराष्ट्र रूट पर सक्रिय तस्करों का नेटवर्क अब पुलिस के रडार में पूरी तरह आ चुका है। थाना सिहावा में NDPS एक्ट की धारा 20(बी) के तहत अपराध दर्ज कर तीनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया है। बहरहाल, सांकरा का यह नाका अब सिर्फ चेक पोस्ट नहीं रहा… यह वो जाल बन चुका है जहां नशे का हर रास्ता आकर फंस रहा है, और संदेश बिल्कुल साफ है — कानून की नजर से बचकर जहर बेचने निकले लोग आखिरकार सलाखों तक ही पहुंचते हैं।







